मिलिए उषा से, जो कि उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ की एक ग्रामीण उद्यमी हैं, जिन्होंने एक डिजिटल मृदा परीक्षण प्रयोगशाला स्थापित करके स्थानीय कृषि में क्रांति लाने के लिए पहचान हासिल की है। आइए जानें विस्तार से।
उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ इलाके में अपनी कहस पहचान स्थापित करने में उषा का जवाब नहीं है, क्योंकि उन्होंने स्थानीय कृषि में क्रांति लाने के लिए पहचान हासिल की है। दरअसल, उन्होंने एक एग्रीकल्चर कंपनी और ग्रुप के साथ मिलकर, एक डिजिटल सॉइल टेस्टिंग किट का इस्तेमाल करते हुए अपने घर से ही एक सॉइल टेस्टिंग लैब शुरू की और उनका यह बिजनेस किसानों को उनके घर पर ही मिट्टी की स्थिति के बारे में पूरी रिपोर्ट देता है, जिससे उन्हें अंधाधुंध खाद के इस्तेमाल से हटकर, डेटा-आधारित और टिकाऊ खेती की ओर बढ़ने में मदद मिलती है। वहीं उनकी सफलता ने उन्हें इस इलाके की दूसरी महिलाओं के लिए एक रोल मॉडल बना दिया है। इससे यह साबित होता है कि ग्रामीण महिलाएं भी एग्रीटेक सेक्टर में किस तरह आगे बढ़कर नेतृत्व कर सकती हैं। उनका काम सरकार के 'सॉइल हेल्थ कार्ड मिशन' के अनुरूप है, जिसमें वे छोटे किसानों के लिए आधुनिक कृषि तकनीक और ज़मीनी स्तर पर उसके अमल के बीच एक पुल का काम करती हैं। उल्लेखनीय है कि छोटी जगहों में भी खास पहचान बनाने में महिलाओं ने कोई कसर नहीं छोड़ी है। इस तकनीक से किसानों का अनावश्यक खाद पर होने वाला खर्च कम हुआ है और पैदावार की गुणवत्ता में सुधार आया।
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