जब भी किसी ऐसी महिला के बारे में जानने का मौका मिलता है, जो केवल अपने बारे में नहीं, बल्कि अन्य महिलाओं की भी जिंदगी को बेहतर करने की कोशिश करती हैं, तो उनसे मिलना हमेशा ही शानदार होता है। कुछ ऐसी ही हैं सुरभि, जिन्होंने एक सीधे-सादे, लेकिन दमदार आइडिया से पहचान बनाई। उन्होंने गांव और छोटे कस्बों की महिलाओं को असली नौकरी के मौकों से जोड़ना और उन्हें एक टिकाऊ करियर बनाने में मदद करना तय किया। इसकी शुरुआत आईआईटी दिल्ली और बर्कली की पूर्व छात्रा सुरभि यादव द्वारा साल 2020 में की गई थी। साथ ही उन्हें और भी कई तरीके से पहचान दिलाने में मदद की। ‘साझे सपने’दिल्ली में रजिस्टर्ड और मध्य प्रदेश में हेडक्वार्टर वाला एक नॉन-प्रॉफिट सोशल एंटरप्राइज है, जिसे अक्टूबर 2020 में शुरू किया गया था। यह ऐतिहासिक रूप से हाशिए पर रहे समुदायों, जिनमें दलित, आदिवासी और बहुजन समूह शामिल हैं और यह गांव की युवा महिलाओं को शुरू से आखिर तक उच्च वोकेशनल शिक्षा और आधुनिक करियर ट्रेनिंग देने में माहिर है। गौरतलब है कि यह संस्था जमीनी स्तर पर काम करती है, ताकि काबिल युवा महिलाओं की पहचान की जा सके, उन्हें जरूरी स्किल्स की ट्रेनिंग दी जा सके और उन्हें नौकरी के बाजार के लिए तैयार किया जा सके। बता दें कि ‘साझे सपने’ ने आर्थिक आजादी के दरवाजे खोल दिए हैं और इस सोच को बदल दिया है कि काम की दुनिया में गांव की महिलाएं क्या-कुछ हासिल कर सकती हैं। यह भी जान लें कि यह संस्था गांवों में 'सपना केंद्र' नाम से आवासीय और गैर-आवासीय कौशल विकास केंद्र चलाती है। यहां 18 से 25 वर्ष की युवतियों को आधुनिक कॉर्पोरेट और तकनीकी दुनिया के लिए तैयार करने वाला एक गहन कोर्स कराया जाता है, साथ ही स्थानीय भाषा में पढ़ाई कराई जाती है और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों को रोजमर्रा की बोलचाल की भाषाओं में सिखाया जाता है, जिससे सीखना आसान हो जाता है। यहां युवतियों को कोडिंग, प्रोजेक्ट मैनेजमेंट, डिजिटल साक्षरता, और गणित शिक्षण जैसे आधुनिक क्षेत्रों का प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके अलावा नेटवर्किंग, मोलभाव (Negotiation), पर्सनल फाइनेंस, अंग्रेजी बोलना, और क्रिटिकल थिंकिंग जैसी जरूरी स्किल्स सिखाई जाती हैं। यही नहीं अच्छी और खास बात यह है कि कोर्स पूरा होने के बाद युवतियों को विभिन्न कंपनियों, स्टार्टअप्स और एनजीओ में नौकरी की पक्की गारंटी दी जाती है। साथ ही इस कार्यक्रम से जुड़ने वाली और अपने सपनों को उड़ान देने वाली महिलाओं को गर्व से 'सपनेवाली' कहा जाता है। वहीं नौकरी लगने के बाद भी यह संस्था पहले एक साल तक कार्यस्थल पर महिलाओं को व्यावसायिक मार्गदर्शन (On-Job Mentoring) प्रदान करती है। वाकई, यह दिलचस्प है।
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