सुबुही नाज़ एक ऐसी महिला हैं, जिन्होंने सिंगल मॉम होते हुए भी स्नातक किया और फिर वह सफल उद्यमी बनीं। उन्होंने वाराणसी में वस्त्र व्यवसाय से लेकर व्यावसायिक मछली पालन का उद्यम शुरू किया। आइए जानें विस्तार से।
महिलाएं एक साथ कई सारे काम कर सकती हैं और सारे कामों को वह काफी परफेक्शन के साथ पूरे भी कर सकती हैं। जी हां, बनारस या वाराणसी की सुबुही नाज़ एक ऐसी ही महिला हैं। उन्होंने न सिर्फ एकल मां यानी सिंगल मदर बन कर अपने बच्चे का पालन-पोषण किया, बल्कि बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) से कला स्नातक और किया, साथ ही शुरुआत में उन्होंने एक छोटी कपड़ों की दुकान का संचालन शुरू किया और बाद में खुद के गुणों को यही तक सीमित न करके अपनी पढ़ाई का इस्तेमाल किया और लेकर उत्तर प्रदेश की अग्रणी मछली उत्पादकों में से एक बनने तक का सफल सफर तय किया है। गौरतलब है कि वाराणसी स्थित उनके उद्यम ने वित्त वर्ष 2024 में 36 टन से अधिक मछली का उत्पादन करके 45 लाख रुपये का वार्षिक कारोबार हासिल किया। उनके जीवन का संघर्ष आसान नहीं रहा। महज 27 साल की उम्र में उन्होंने अपने पति को खोया। इसके बाद, उन्होंने अपने बेटे के पालन-पोषण की सारी जिम्मेदारी उन्होंने अकेले पूरी की और फिर उसकी शिक्षा पूरी करने के लिए उन्होंने एक छोटी दुकान शुरू की। जब वह 47 वर्ष की हुईं, उनके बेटे ने उन्हें पढ़ने के लिए प्रेरित किया और फिर उन्होंने मत्स्य विज्ञान में स्नातक की पढ़ाई पूरी की और मत्स्यपालन के क्षेत्र में कदम रखने का फैसला किया। इस क्षेत्र में अधिक जानकारी या ज्ञान न होने के बावजूद, उन्होंने मझवान गांव में एक बीघा जमीन खरीदी और आठ कंक्रीट के टैंक बनवाए। लेकिन यह इतना आसान नहीं रहा। पहले ही साल उसे भारी नुकसान हुआ। बाद में उन्होंने काम किया और अनुभव और ट्रेनिंग हासिल की और अंतत: उन्हें अपने काम में सफलता मिली। उन्होंने उत्पादन को अनुकूलित करने के लिए वैज्ञानिक विधियों और पुनर्संचारी मत्स्य पालन प्रणाली (आरएएस) जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाकर दृढ़ता दिखाई। अब वह कई तालाबों के साथ 6 बीघा के फार्म का प्रबंधन करती हैं। और उन्हें उनके इस काम में दक्षता हासिल करने के बाद 83.6 मीट्रिक टन मछली उत्पादन के लिए राष्ट्रीय मत्स्यपालक पुरस्कार 2024 से सम्मानित किया गया। वाकई, वह कई महिलाओं के लिए प्रेरणा हैं।
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