मिलिए सरपंच योगेश्वरी चौधरी से, जिन्होंने महज दो साल में उनके गांव ने इतिहास रच दिया और भारत का पहला 'क्लाइमेट एक्शन पंचायत अवॉर्ड' जीता और अपने गांव की महिलाओं की तस्वीर और तकदीर दोनों ही बदल दी। आइए उनके बारे में विस्तार से जानते हैं।
जिनके जीवन में सिर्फ काम को तवज्जो देने का इरादा होता है, वे केवल काम पर ही फोकस करते हैं। सरपंच योगेश्वरी कुछ ऐसी ही हैं। उन्होंने हमेशा अपने गांव की महिलाओं की स्थिति को समझा और उनके लिए बेहतर विकल्प क्रिएट करने का निर्णय लिया। दरअसल, योगेश्वरी शत्रुघ्न चौधरी महाराष्ट्र के गोंदिया ज़िले की डव्वा ग्राम पंचायत की पहली महिला सरपंच हैं। और उन्होंने सूखे से जूझ रहे गांव को भारत की पहली 'क्लाइमेट एक्शन स्पेशल पंचायत अवॉर्ड' जीतने वाली पंचायत बनाकर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनायीं। एक स्कूल टीचर के तौर पर गहरे निजी दुख का सामना करने से लेकर एक मशहूर नेतृत्व में खड़े होने के लिए खुद को तैयार किया और उनका सफर, जमीनी स्तर पर जलवायु से जुड़े कामकाज के लिए एक मिसाल बन गया है। बता दें कि वर्ष 2017 में उनके पति का अचानक निधन हो गया, जिसके बाद उन्हें अकेले ही अपने छोटे बच्चे की परवरिश करनी पड़ी। इसी दौरान उन्होंने देखा कि डव्वा में स्थिति नहीं है। सो, फसलों के बर्बाद होने, गिरते भूजल स्तर और युवाओं के बड़े पैमाने पर पलायन से परेशान होकर उन्होंने स्थानीय प्रशासन में शामिल होने का फैसला किया। और फिर बिना किसी औपचारिक राजनीतिक समर्थन के, उन्होंने दिसंबर 2023 का चुनाव भारी अंतर से जीता, जो पूरी तरह से समुदाय के भरोसे पर आधारित था। वहीं गांव का भरोसा जीतने के लिए, उन्होंने स्मार्टफोन और ISRO के 'भुवन' ऐप का इस्तेमाल करके हर विकास परियोजना का दस्तावेजीकरण और जियो-टैगिंग करने पर जोर दिया। इससे सरकारी खर्च की तुरंत पुष्टि करना संभव हो गया। वहीं उन्होंने घरों में सोक पिट (soak pits) और स्थानीय नाले के किनारे खास रिचार्ज शाफ्ट बनाने का काम शुरू किया, जिससे गांव का कुल भूजल स्तर सफलतापूर्वक बढ़ गया। साथ ही साथ उन्होंने सोलर मिनी-ग्रिड लगवाए, जिनसे स्थानीय स्कूलों, सार्वजनिक जगहों और 400 से ज्यादा घरों को बिजली मिलती है, जिससे ईंधन और बिजली के बिलों में भारी कमी आई है। वाकई, बतौर सरपंच उन्होंने स्थानीय लोगों की परेशानी को पूर्ण रूप से सुलझाया। ऐसी प्रेरक महिलाओं की हमारे जीवन में बहुत जरूरत है, जो लोगों की भलाई के लिए अग्रसर रहती हैं।
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