उत्तर प्रदेश के गोरखपुर की रीता कौशिक से, जिन्हें अपने पूरे गांव में औपचारिक शिक्षा प्राप्त करने वाली पहली महिला के रूप में मान्यता प्राप्त है। आइए जानें विस्तार से।
उत्तर प्रदेश में जिस इलाके से रीता आती हैं, उनके लिए यह आसान कदम नहीं था कि वह अपनी पढ़ाई पूरी कर पातीं, क्योंकि उनके गांव में अब भी शिक्षा को लेकर बहुत अधिक गंभीरता नहीं है। दरअसल, उत्तर प्रदेश की सबसे हाशिए पर पड़ी दलित उपजातियों में से एक, मुसहर समुदाय में जन्मीं रीता ने कई व्यवस्थागत बाधाओं को पार करते हुए गोरखपुर और कुशीनगर जिलों में एक सामाजिक क्रांति का नेतृत्व किया। गौरतलब है कि शुरू में उनके माता-पिता का मानना था कि लड़कियों को पढ़ना नहीं चाहिए, इसके बावजूद उन्होंने एक निजी स्कूल में छात्रवृत्ति प्राप्त की और बाद में दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से समाजशास्त्र में स्नातकोत्तर की उपाधि हासिल की। और वर्ष 2003-2004 में, उन्होंने सामुदायिक कल्याण एवं विकास संस्थान (एसकेवीएस) की स्थापना की ताकि अन्य दलित लड़कियों को ऐसी ही बाधाओं का सामना न करना पड़े। यह भी उल्लेखनीय है कि उन्होंने 25 हजार से अधिक बच्चों और युवाओं तक अपनी पहचान बनाई है, और उन्हें ब्रिज कोर्स और व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान किया है। उन्होंने 118 हाशिए पर पड़े परिवारों को उनकी जमीन का कानूनी स्वामित्व हासिल करने में मदद की है, जिससे स्थानीय प्रभावशाली समूहों द्वारा किए जा रहे लंबे समय से चले आ रहे उत्पीड़न को चुनौती मिली है। वाकई, जीवन में पढ़ाई से किस तरह पहचान बनाई जा सकती है, इसकी मिसाल रीता हैं और यह औरों को भी प्रोत्साहित करती हैं।
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