झारखंड के लातेहार की सुनीता देवी एक शानदार काम कर रही हैं, वह एक ऐसी 'रानी मिस्त्री' यानी महिला राजमिस्त्री हैं, जिन्होंने पुरुषों के वर्चस्व वाले निर्माण क्षेत्र में कदम रखकर लैंगिक रूढ़ियों को तोड़ा है। आइए जानते हैं विस्तार से।
महिलाएं जब ठान लेती हैं, तो उनके लिए कुछ भी नामुमकिन नहीं होता है, कुछ ऐसा ही कर दिखाया है झारखण्ड की सुनीता देवी ने, जो कि राजमिस्त्री हैं और अपने हुनर से कंस्ट्रक्शन का काम संभाल लेती हैं। उन्होंने हजार से ज्यादा ग्रामीण महिलाओं को राजमिस्त्री बनाया है और हैंड-पंप की मरम्मत का प्रशिक्षण दिया है, जिससे हजारों शौचालय बनाकर सीधे तौर पर स्वच्छता में सुधार हुआ है। बता दें कि जब पुरुष राजमिस्त्रियों की कमी हुई और उन्होंने छोटे पैमाने पर शौचालय बनाने के प्रोजेक्ट लेने से मना कर दिया, तो सुनीता देवी ने खुद ही करनी (trowel) उठा ली। तब से उन्होंने 1,600 से ज्यादा ग्रामीण महिलाओं को राजमिस्त्री के तौर पर प्रशिक्षित किया है, जिससे निर्माण क्षेत्र में पुरुषों के पारंपरिक एकाधिकार को तोड़ा गया है। उन्होंने खुद लगभग 475 शौचालय बनाए और अपने स्थानीय स्वयं सहायता समूह, 'विकास आजीविका' का नेतृत्व करते हुए, विद्रोहियों से प्रभावित लातेहार जिले में 1,500 से ज्यादा शौचालय बनवाए। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2019 में, उन्हें भारत के राष्ट्रपति द्वारा 'नारी शक्ति पुरस्कार' से सम्मानित किया गया, जो महिलाओं के लिए भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। उनके काम की सराहना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने 'मन की बात' संबोधन में की है। वाकई, ऐसी प्रेरणास्रोत महिलाओं की सराहना होनी बेहद जरूरी है, ताकि अन्य महिलाएं भी प्रेरणा ले सकें और अपने लिए क्षेत्र चुन सकें।
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