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खेती को आधुनिकता से जोड़ कर मिसाल बनी हैं झारखंड की प्रियंका कुमारी

टीम Her Circle |  February 25, 2026

उल्लेखनीय हैं झारखंड की प्रियंका कुमारी, जिन्होंने मौसम पर निर्भर खेती से योजनाबद्ध खेती की ओर रुख किया और प्रशिक्षण और सहायता के माध्यम से 15 लाख रुपये की आजीविका अर्जित कर रही हैं। आइए जानें विस्तार से। 

प्रियंका झारखंड के गोला ब्लॉक से संबंध रखती हैं और उन्होंने अनिश्चित और मौसम पर निर्भर खेती से हटकर एक सुनियोजित और व्यवस्थित कृषि पद्धति अपनाकर अपना जीवन बदल दिया है। इस बदलाव से उनकी वार्षिक घरेलू आय लगभग 2-25 लाख रुपये से बढ़कर 13-15 लाख रुपये हो गई है। यह खास बात है कि छोटी जगहों पर भी लड़कियां बेहतरी के लिए काम कर रही हैं और उन्हें उनके काम के लिए सराहना भी मिल रही है, गौरतलब है कि अपने उल्लेखनीय काम के लिए इन्हें आईसीएआर द्वारा आयोजित 'मिलियनेयर फार्मर ऑफ इंडिया' पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। दरअसल, प्रियंका ने फार्मिंग में एक पहचान बनाई है। उन्होंने सात साल पहले इस बारे में सोचा। गौरतलब है कि जब 27 वर्ष की थीं, तो उनकी शादी हो गई थी और उसके बाद पूर्णकालिक खेती शुरू की, तो इस अनिश्चितता को उन्होंने जीवन का एक अभिन्न अंग मान लिया था। और कृषि ही परिवार की एकमात्र आजीविका थी। कोई वैकल्पिक योजना नहीं थी। ऐसे में प्रियंका ने योजना, श्रम समन्वय और घरेलू खर्चों की देख-रेख करती हैं, उनके पति बाजार में बिक्री का प्रबंधन करते हैं और उनके ससुराल वाले कटाई और दैनिक कृषि कार्यों में सहयोग करते हैं। यह भी उल्लेखनीय है कि 2016 में, जब टीआरआई ने झारखंड के गोला ब्लॉक में काम शुरू किया, तो उसकी टीमों ने स्वयं सहायता समूहों और ग्राम संगठनों के माध्यम से सामुदायिक बैठकों से शुरुआत की, जहां प्रियंका ने स्वयं को प्रशिक्षित किया। 2022 में एक महत्वपूर्ण मोड़ आया, जब टीआरआई ने परिवार को सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने में मदद की। उनके काम करने के तरीके में नयापन यह है कि पारंपरिक मौसमी चक्रों का पालन करने के बजाय, वह बाजार में उपलब्ध अवसरों की पहचान करने और लौकी, टमाटर और बैंगन जैसी बेमौसम सब्जियां उगाने के लिए एक नियोजन रजिस्टर का उपयोग करती है। अगर इस तरह से समझें तो मान लें कि सर्दियों में लौकी उगाने से जहां उन्हें सामान्य रूप से महज 5 रुपये प्रति किलो मिलते थे बिक्री करने पर, अब उसकी तुलना में उनकी कमाई 20 रुपये प्रति किलो की हुई। यानी अच्छा खासा मुनाफा हुआ। गौरतलब है कि सब्जियां बेचने के अलावा, वह स्थानीय किसानों को सब्जियों के पौधे उगाकर और बेचकर अतिरिक्त आय अर्जित करती है।*Image used is only for representational purpose




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