क्लाइमेट चेंज यानी जलवायु परिवर्तन से निदान पाने का मतलब प्लास्टिक या पॉली बैग का केवल इस्तेमाल बंद कर देना भर नहीं है, बल्कि छोटे ही सही, लेकिन निरंतर कोशिश जारी रखने में है। अहमदाबाद में रह रहीं सुप्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता और इसरो की पूर्व वैज्ञानिक पंक्ति पांडेय कुछ ऐसा ही मानती हैं और सस्टेनेब्लिटी को लेकर वे लगातार दिलचस्प प्रयास कर रही हैं अपने प्लैटफॉर्म ‘जीरो वेस्ट अड्डा’( ZeroWasteAdda) के माध्यम से। आइए जानते हैं विस्तार से।
क्या है जीरो अड्डा

Zero Waste Adda की शुरुआत वर्ष 2021 में की थी और यह सस्टेनेबिलिटी को समर्पित एक डिजिटल समुदाय है। इसकी फाउंडर पंक्ति, जो पर्यावरण को लेकर हमेशा सजग रही हैं और हमेशा ही इस बात में विश्वास रखती हैं कि सिर्फ बातें करने से नहीं होगा, बल्कि क्लाइमेट चेंज को क्लाइमेट एक्शन से बेहतर बनाया जा सकता है। पंक्ति बताती हैं कि यह एक ऐसा मंच है, रोजमर्रा की ज़ीरो वेस्ट प्रैक्टिस को सरल और व्यावहारिक बनाने की कोशिश की जाती है, जिससे लोग सहज तरीके से सस्टेनेबिलिटी को अपना सकें। वह कहती हैं कि इसरो में रहते हुए और अध्ययन करते हुए उन्होंने इस बात को समझा है कि पूरी दुनिया में जलवायु परिवर्तन को लेकर काम हो रहे हैं और भारत में भी लोगों को सजग और जागरूक करने की बेहद जरूरत है।
अलग से कुछ नहीं करना है

पंक्ति बताती हैं कि कई बार लोगों को लगता है कि हमें अलग से बहुत मेहनत करनी पड़ेगी, सस्टेनेब्लिटी को बरकरार रखने के लिए, लेकिन ऐसा नहीं है, छोटे स्टेप्स लेकर भी इसे पूरा किया जा सकता है। अपने पर्यावरण को बचाए रखने के लिए ऐसा नहीं है कि अलग से कोई टाइम देना पड़ता है। छोटी-छोटी आदत से बात बदल सकती है। पंक्ति कहती हैं कि उनकी कोशिश यही है कि वह सिर्फ ऊपरी तौर पर नहीं, बल्कि गहराई में जाकर क्या कर सकते हैं, इसके लिए गंभीरता से स्टेप्स लें।
ये तो बस शुरुआत है

पंक्ति कहती हैं कि उन्हें वर्ष 2024 में अपने इस काम के लिए नेशनल क्रिएटर्स अवार्ड 2024 की विजेता के रूप में नवाजा जा चुका है, इसकी उन्हें ख़ुशी है, लेकिन वह चाहती हैं कि आम लोग जब चीजों को समझेंगे और गंभीरता से लेंगे, तब उनके लिए बेस्ट होगा। वह कहती हैं कि इसरो में रहते हुए, जब अध्ययन करते हैं, तो हमें समझ आता है कि हालात गंभीर हैं, लेकिन बाहर लोग इसके बारे में नहीं सोचते हैं, हल्के में लेते हैं, जबकि पूरी दुनिया में लोगों के जीवन को यह प्रभावित करने वाली है। वह इस बात में पूरी तरह से यकीन करती हैं कि सार्थक बदलाव के लिए बड़ी-बड़ी कॉन्फ्रेंस या वैश्विक बैठकों की जरूरत नहीं होती, बल्कि इसकी शुरुआत घर से ही होती है और उन विकल्पों से, जिन्हें हम हर रोज चुनते हैं।
बच्चों को करती हैं जागरूक

पंक्ति कई स्कूलों में जाती हैं और बच्चों को जागरूक करने की कोशिश करती हैं। वह बस सतही नहीं, बल्कि पूरी जानकारी देती हैं कि प्लास्टिक का पूर्ण रूप से इस्तेमाल न करना संभव नहीं है। जरूरी यह है कि प्लास्टिक के इस्तेमाल के बाद उसे कैसे फेका जा रहा है, इसकी जानकारी हो। सो, बच्चों को घर में कचरा प्रबंधन कैसे करना है, इस पर फोकस देना महत्वपूर्ण हैं, ताकि लैंडफिल में जाकर कचरा लोगों को प्रभावित करे। पंक्ति रीयूज और रीसाइक्लिंग पर पूरी तरह से फोकस करना पसंद करती हैं और लोगों को इसके बारे में जागरूक करना चाहती हैं। वह बताती हैं कि सेकेंड हैंड होम फर्नीचर खरीदने की अगुवाई करती हैं और कोशिश करती हैं कि इंफोटेनमेंट पर फोकस हो सके। इसके अलावा, पंक्ति अपने इस मिशन को सिर्फ सोशल मीडिया, स्कूलों और बच्चों तक सीमित नहीं रखना चाहती हैं, बल्कि उन्होंने सोसाइटी में भी इस सर्कुलर मॉडल और कचरा प्रबंधन सिस्टम को लागू किया है, क्योंकि उनका मानना है कि जलवायु कार्रवाई आज की सबसे बड़ी जरूरत है और हमें हर दिशा में कदम उठाने की जरूरत है।
*All Pictures Credit : Pankti Pandey