निमिषा वर्मा के बारे में आपको यह जरूर जानना चाहिए कि उन्होंने एलोवेरा का उपयोग करके दुनिया की पहली 100 प्रतिशत पर्यावरण के अनुकूल बैटरी बनाई है, जो ई-कचरे और प्रदूषण की समस्या का समाधान करती है। आइए जानते हैं विस्तार से।
उत्तर प्रदेश में महिलाओं ने कई तरह के कमाल किये हैं, वे लगातार बेहतर कर रही हैं और खासतौर से नयी-नयी चीजें ईजाद कर रही हैं, ऐसे में आपके लिए यह जानना खास होगा कि लखनऊ की निमिषा वर्मा भी उनमें से एक हैं, जिन्होंने सीसा और पारा जैसे टॉक्सिक रसायनों को एलोवेरा-आधारित इलेक्ट्रोलाइट से बदलकर, उनको सीधे इलेक्ट्रॉनिक कचरे और मिट्टी प्रदूषण से निपटने में मदद की है और इसके लिए उन्होंने शानदार काम किया है। साथ ही आपको बता दें कि ये जो बैटरियां हैं, वे एलोवेरा जेल और अन्य हर्बल एक्सट्रेक्ट की रासायनिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करती हैं, जिससे ये नॉन एक्सप्लोसिव और बायोडिग्रेडेबल बन जाती हैं। बता दें कि बैटरी के अलावा, निमिषा की टीम ने भारत का पहला रिसाइकल्ड फर्टिलाइजर भी विकसित किया है, जो पुरानी बैटरियों से बना है और मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाने में सहायक है। यह भी उल्लेखनीय है कि वर्ष 2026 की शुरुआत तक, कंपनी 8 करोड़ बैटरियों की वार्षिक उत्पादन क्षमता वाली एक मैन्युफैक्चरिंग का संचालन कर रही हैं, जो भारत भर में 10,000 से अधिक आउटलेट्स में बिक्री करती है और जर्मनी और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों को निर्यात करती है। वहीं स्टार्टअप ने "बैटरीज ऑन ब्लॉकचेन" नामक एक ट्रैकिंग तंत्र लॉन्च किया है, जिसे ई-कचरा संग्रहण में सुधार करने और स्वच्छ भारत मिशन का समर्थन करने के लिए डिजाइन किया गया है। वाकई में, निमिषा का यह काम बेहद यूनिक और अनोखा है और वर्तमान दौर में इस तरह के नयेपन की बेहद जरूरत है।
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