जी हां, जमुना टुड्डू ने इस बात की गंभीरता को हमेशा समझा है कि हमारे देश में जंगलों को बचाना कितना जरूरी है। ऐसे में उन्हें लेडी टार्जन के नाम से इसलिए पुकारा जाता है, क्योंकि वह अपने काम को अंजाम पूरी निर्भयता से देती हैं। दरअसल, उनके काम को काफी लोकप्रियता मिलती रही है और उन्होंने कई कठिनाइयों का भी सामना किया है। दरअसल, उनके झारखंड के संगठन में 500 से अधिक समिति और 10,000 से अधिक सदस्य शामिल हैं। गौरतलब है कि उन्होंने अपनी एक सेना तैयार कर रखी है और वह गांव की महिलाओं साथ मिल कर लकड़ी माफियाओं और नक्सलियों का सामना करती हैं, जरूरत पड़ने पर हथियार उठाने से भी गुरेज नहीं करती हैं। उनके प्रयासों से 300 गांवों में लगभग 50 हेक्टेयर साल के जंगल को सफलतापूर्वक संरक्षित किया गया है। साथ ही उन्होंने संरक्षण को स्थानीय संस्कृति में एकीकृत किया है, जिसके तहत महिलाएं पेड़ों पर राखी बांधकर भाई के रूप में अपनी सुरक्षा का प्रतीक बनाती हैं। उन पर कई बार हमले हो चुके हैं। लेकिन वह फिर भी कभी पीछे नहीं हटीं। जमुना ने बहुत बुरा दौर भी देखा है और वह खुद उन लाखों ग्रामीण महिलाओं में से एक थीं, जो जीवन यापन के लिए संघर्ष करती थीं, लेकिन उन्होंने चुप रहने की जगह अपने कदम बढ़ाये और काम किया। लेकिन उन्होंने जिस साहस और समर्पण से जंगलों की रक्षा के लिए आवाज उठाई, वह आज करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा है। जमुना को अपने इस साहस के लिए पद्मश्री से नवाजा जा चुका है।बता दें कि जमुना टुडू का जन्म उड़ीसा के रायरंगपुर में हुआ था, उनके परिवार को मुफलिसी का सामना करना पड़ा। खास बात यह है कि उन्होंने अपने परिवार के हर सदस्य की जरूरतों को पूरा किया। रोजगार की तलाश में ही जमुना जमशेदपुर आ गयी थीं और वहां उन्होंने रेजा-कुली (मजदूरी) का काम शुरू किया था। फिर साल 1998 में उनकी शादी चाकुलिया गांव के एक राजमिस्त्री मानसिंह टुडू से हुई और वहीं से उनका सफर एक नई दिशा में मोड़ा। शादी के बाद उनकी दिलचस्पी इस काम के प्रति बढ़ी। दरअसल, चाकुलिया गांव जंगलों से घिरा था और वहां की महिलाएं आमतौर पर जलावन लकड़ी के लिए जंगल जाती थीं। इस क्रम में उन्होंने देखा कि केवल ग्रामीण ही नहीं, बल्कि लकड़ी और पत्थर माफिया भी बड़ी मात्रा में अवैध रूप से पेड़ काट रहे हैं। ऐसे में उन्होंने तय किया वह ऐसा नहीं होने देंगी। फिर वह महिलाओं को लेकर इस काम में जुटीं। कई बैठकें की। आंदोलन किया। वन सुरक्षा समिति बनायीं। एक रात तस्करी के दौरान वह वहां बैठीं, उन पर काफी पत्थरबाजी की गयी। लेकिन वह पीछे नहीं हटीं। उनके घर चोरी भी करवाई गयी, लेकिन फिर भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और आज वह एक शानदार प्रेरणादायक महिला बन चुकी हैं।
*Image used is only for representational purpose