एक खिलौने की कंपनी भी लोगों को किस तरह से आत्मनिर्भर बना सकती हैं, यह हुनर हमें कोकिला से सीखनी चाहिए। आइए जानते हैं विस्तार से।
आपके सामने कोई बच्चा खिलौने से खेल रहा है और अचानक आपके जेहन में बात आती है कि क्यों न इसकी कंपनी ही शुरू कर दी जाये, कुछ ऐसी ही सोच के साथ आगे बढ़ीं कोकिला। जी हां, तमिलनाडु के वालाजापेट की रहने वाली 61 साल की एंटरप्रेन्योर कोकिला के ने 59 साल की उम्र में 'वुडबी टॉयज' (Woodbee Toys) की शुरुआत की और फिर एक नया इतिहास रच दिया। उन्होंने अकेले अपने दम पर एक सफल व्यवसाय किया। दररअसल, उनकी जिंदगी आसान नहीं रही। कम समय में ही पति के गुज़रने के बाद, उन्होंने शुरुआती महज 200 रुपये से जैसे-तैसे अपना गुजारा चलाया, वहीं उन्होंने बाद में एक मामूली सरकारी नौकरी भी किया। लेकिन फिर अपनी समझ से उन्होंने एक करोड़ रुपये का बड़ा बिजनेस खड़ा किया। खास बात यह है कि उनकी कंपनी सस्टेनबल टॉय बनाती है। उनकी इको-फ्रेंडली और बिना जहरीले केमिकल वाले लकड़ी के खिलौने बनाने वाली कंपनी अब 40 से ज्यादा ग्रामीण महिलाओं को ट्रेनिंग देती है और उन्हें मजबूत बनाती है, जिससे उन्हें रोजगार का पक्का जरिया मिल गया है। उनके दिमाग में यह बात उस वक़्त आई, जब उन्होंने देखा कि उनके पोते-पोतियां असुरक्षित और केमिकल वाले प्लास्टिक के खिलौनों से खेल रहे हैं, और उन्हें एहसास हुआ कि बच्चों को बेहतर और इको-फ्रेंडली खिलौने मिलने चाहिए। बता दें कि 'वुडबी टॉयज़' मोंटेसरी और वाल्डोर्फ़ स्टाइल से प्रेरित 110 से ज़्यादा तरह के लकड़ी के खिलौने बनाती है। इनमें टीथर, झुनझुने, शेप सॉर्टर और अबेकस जैसे खिलौने शामिल हैं, जो नीम, पाइन और बीचवुड जैसी प्राकृतिक लकड़ियों से बनाए जाते हैं। इन खिलौनों की खास बात यह भी है कि मशीनों से बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन करने के बजाय, उन्होंने गांव की महिलाओं को काम पर रखा और उन्हें ट्रेनिंग दी, इनमें से कई महिलाएं पहले खेतों में दिहाड़ी मजदूरी करती थीं। खास बात यह रही कि इस पहल से वे कुशल कारीगर बन गई हैं और अब उनकी कमाई भी पक्की और भरोसेमंद है। एक खास बात आपको और बता दें कि यह ब्रांड मुख्य रूप से 'फ़ैमिली मार्केटिंग' पर निर्भर है और एक बहुत सफल, बिना बाहरी निवेश के शुरू किया गया (बूटस्ट्रैप्ड) बिज़नेस बन गया है, जो पूरे भारत और विदेशों में भी अपने प्रोडक्ट भेजता है।
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