मध्य प्रदेश की रहने वालीं मां और बेटी कमाल कर रही हैं। उन्होंने अपनी सूझ-बूझ से एक बड़ा कारनामा कर दिखाया है। जी हां, मेघा पटेल 'अमृताहार' की को-फाउंडर हैं, जो मध्य प्रदेश के ओरछा में स्थित एक स्टार्टअप है और इसे पूरी तरह से महिला किसान चलाती हैं। आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से।
दरअसल, मेघा ने अपनी मां के लिए कुछ खास करने की कोशिश की। मेघा ने अपनी मां किरण पटेल, जो कि 50 वर्षीय हैं, उनके साथ मिलकर, मां की देखभाल के एक साधारण से काम को खेती से सीधे किचन तक पहुंचने वाले एक सफल और केमिकल- फ्री एग्रीकल्चर ब्रांड में बदल दिया। इसकी सबसे बड़ी वजह यह रही कि उन्होंने प्रेरणा इस तरह से ली कि जब वे दिल्ली में रहती थीं, पढ़ाई के लिए, तो उस वक़्त उन्हें काम के दौरान सही खाना मिलना, जो कि पौष्टिक और हेल्दी भी हो ढूंढ पाने में दिक्कत होती थी। ऐसे में उनकी मां किरण ने मेघा की सेहत की चिंता करते हुए, अपने परिवार के 10 एकड़ के ग्रामीण खेत में उगाई गई दालें और पारंपरिक तरीके से पत्थर की चक्की पर पिसा हुआ आटा कूरियर से भेजना शुरू किया और इस तरह से उन्हें काम करने का आइडिया आया कि कुछ ऐसी शुरुआत की जा सकती हैं। यह महसूस करते हुए कि शहरों में रहने वाले लाखों परिवारों को भी जहरीले और बहुत ज़्यादा प्रोसेस किए गए खाने-पीने के सामान की इसी समस्या का सामना करना पड़ रहा है, दोनों ने अपने घर पर अपनाए जाने वाले तरीकों को बड़े पैमाने पर शुरू करने का फैसला किया। साथ ही उन्होंने आधिकारिक तौर पर अपना वेलनेस ब्रांड लॉन्च किया। और उसका नाम रखा 'अमृतआहार'। वे 4 एकड़ ज़मीन कठिया गेहूं (पारंपरिक लाल गेहूं) के लिए और 2 एकड़ ज़मीन काले गेहूं के लिए आवंटित करते हैं। बाकी बची जमीन पर बिना केमिकल वाले फ़र्टिलाइज़र के देसी दालें, मोटे अनाज, चना और मौसम के अनुसार फसलें उगाई जाती हैं। गौरतलब है कि यह स्टार्टअप पूरी तरह से किरण, उनकी दो बेटियों (जिनमें मेघा भी शामिल हैं) और उनकी बहू द्वारा चलाया जाता है। उल्लेखनीय है कि यह स्टार्टअप 15-20 स्थानीय ग्रामीण महिलाओं को रोजगार और आर्थिक आजादी देता है।