बिहार के भोजपुर की रहने वालीं इंदु कुमारी ने अपनी सूझ-बूझ से एक शुरुआत की है और नोटबुक, फाइल और फोल्डर बनाने की एक यूनिट शुरू की है और इस तरह स्थानीय शैक्षिक सामग्री की आपूर्ति में एक अहम कमी को पूरा किया है। आइए जानें विस्तार से।
इंदु कुमारी एक ग्रामीण उद्यमी का बेहतरीन उदाहरण हैं, जिन्होंने पारंपरिक हस्तशिल्प से आगे बढ़कर औद्योगिक निर्माण के क्षेत्र में कदम रखा है। उनकी फैक्ट्री में मुख्य रूप से उनके ही गांव की अन्य महिलाएं काम करती हैं, उन्हें मशीन चलाने और बुकबाइंडिंग जैसे तकनीकी कौशल सिखाए जाते हैं, जो पहले उनके इलाके में उपलब्ध नहीं थे। बिहार उद्योग विभाग अक्सर उन्हें एक 'सफलता की कहानी' के तौर पर पेश करता है, ताकि महिलाओं को निर्माण क्षेत्र में आने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके—एक ऐसा क्षेत्र जिस पर ऐतिहासिक रूप से पुरुषों का ही वर्चस्व रहा है। भोजपुर में स्थित इंदु कुमारी ने यह बात समझी कि उनके जिले के स्कूल और स्थानीय दफ्तर अपनी जरूरतों के लिए काफी हद तक पटना जैसे बड़े शहरों या राज्य के बाहर के केंद्रों से आने वाले सामान पर निर्भर रहते थे। स्थानीय स्तर पर ही उत्पादन करके, उन्होंने आस-पास के शिक्षण संस्थानों के लिए परिवहन लागत और डिलीवरी के समय को काफी कम कर दिया, जिससे वे इस क्षेत्र में एक पसंदीदा सप्लायर बन गईं। उनकी यूनिट मुख्य रूप से नोटबुक, फाइल और फोल्डर बनाने पर ध्यान केंद्रित करती है; प्रतिस्पर्धी कीमतें बनाए रखने और उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए वे स्वचालित या अर्ध-स्वचालित मशीनों का उपयोग करती हैं। वाकई, इंदू कुमारी जैसी महिलाएं साबित करती हैं कि जगह नहीं सोच मायने रखती है, अगर आप जीवन में कुछ करना चाहते हैं, तो आपको बस शिद्दत से उसे करते रहना चाहिए।
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