पटना की महिलाओं के एक समूह ऐसे कुछ सामुदायिक तालाब, जिन पर किसी का भी ध्यान नहीं था, उस जगह को ज्यादा पैदावार वाले मछली फार्म में बदल दिया है और उन्होंने एक ही साल में 1,250 किलो से ज्यादा मछली का उत्पादन किया है। आइए जानें विस्तार से।
यह जानना वाकई रोचक और प्रेरणादायक है कि 11 महिलाओं के एक समूह ने, जिन्हें शुरू में जलीय कृषि यानी कि एक्वा कल्चर का कोई पूर्व अनुभव नहीं था, एक ही वर्ष में सफलतापूर्वक 1,250 किलोग्राम मछली का उत्पादन किया। और उन्हें इससे 1,40,000 रुपये का लाभ हुआ, जिसे सदस्यों के बीच समान रूप से बांटा गया। गौरतलब है कि अक्टूबर 2023 की शुरुआत तक, समूह ने अगली फसल के लिए अपनी मछली की मात्रा को पहले ही दोगुना कर लिया था, जो उनके तेजी से विस्तार और स्थिरता को दर्शाता है। इस समूह का नाम जल जीवन एवं जय जीविका महिला मत्स्य उत्पादन समूह है और बिहार के पटना जिले की 11 महिलाओं का एक समूह। खास बात यह रही कि जलीय कृषि (aquaculture) का कोई पूर्व अनुभव न होने के बावजूद, उन्होंने नौबतपुर ब्लॉक में एक उपेक्षित सामुदायिक तालाब को सफलतापूर्वक पुनर्जीवित किया और उसे एक समृद्ध मछली फार्म में बदल दिया। बता दें कि मछलियां डालने से पहले, महिलाओं ने एक ऐसे अप्रयुक्त सामुदायिक तालाब को साफ करने और उसे ठीक करने के लिए काफी शारीरिक मेहनत की, जो पहले बहुत खराब हालत में था। यह पहल पारंपरिक जल निकायों के रिस्टोरेशन के साथ मछली और बत्तख पालन को जोड़ती है, जिससे महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों के लिए एक स्थायी आय का साधन उपलब्ध होता है। गौरतलब है कि इस समूह से जुड़ीं महिलाएं इस्तेमाल न हो रहे, खरपतवारों से भरे तालाब की सफाई भी करती हैं और साथ ही पानी की गुणवत्ता का प्रबंधन और मछली के बीज डालना। और साथ ही तालाब का निरंतर रखरखाव और कटाई का काम भी करती हैं।
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