मिलिए मुसहर समुदाय की अनीता और गायत्री कुमारी से, जिन्होंने सामाजिक बाधाओं को तोड़कर पटना की पहली महिला बस चालकों में से एक बनने का गौरव हासिल किया है। आइए जानते हैं विस्तार से।
वाकई में, अनीता और गायत्री ने अपनी पहचान स्थापित की और खास जगह बना ली, उन्होंने वह कर दिखाया जो कई महिलाओं के लिए प्रेरणा बनी। जैसे कि उन्होंने महिला बस चालक के रूप में पहचान बनायीं, जो काम मुख्य रूप से पुरुषों का काम माना जाता रहा, उस क्षेत्र में उन्होंने पहचान बनायीं। गौरतलब है कि अनीता ने गांधी मैदान में गणतंत्र दिवस की झांकी के दौरान बस चलाकर खास पहचान बनायी। यह भी उल्लेखनीय है कि ये दोनों महिलाएं मुसहर समुदाय से हैं, जो बिहार के सबसे ऐतिहासिक रूप से पिछड़े समुदायों में से एक है। दरअसल, उन्होंने वर्ष 2023 में लाइट मोटर व्हीकल (LMV) लाइसेंस और 2024 में हेवी मोटर व्हीकल (HMV) लाइसेंस औरंगाबाद में स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ ड्राइविंग एंड ट्रैफिक रिसर्च (IDTR) के जरिये हासिल किए। बता दें कि अनीता को गांव वालों के ताने सुनने पड़े, जो कहते थे कि वह साइकिल भी नहीं चला सकती, बड़ी गाड़ियां क्या चलाएगी। वहीं गायत्री से अक्सर कहा जाता था कि वह भारी वाहन चलाने के लिए बहुत ज्यादा दुबली-पतली है। उनकी इस यात्रा में एनजीओ नारी गुंजन की संस्थापक पद्म श्री सुधा वर्गीज ने बहुत ज्यादा मदद की। उन्होंने इन महिलाओं को ड्राइविंग सीखने के लिए प्रोत्साहित किया और उन्हें अभ्यास करने के लिए अपनी खुद की कार भी दी है।
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