किसान कैलाश वती पारंपरिक भारतीय ज्ञान को बचाने, ऑर्गेनिक किचन गार्डनिंग और रोजमर्रा की ज़िंदगी को समझदारी से जीने पर ध्यान देती हैं। दादी-नानी जैसी उनकी स्नेहपूर्ण मौजूदगी ने उन्हें सस्टेनेबल जीवनशैली और पुराने घरेलू नुस्खों के लिए एक भरोसेमंद स्रोत बना दिया है। आइए जानते हैं विस्तार से।
कुछ लोग उन्हें दादी, तो कुछ लोग उन्हें नानी कह कर पुकारते हैं। जी हां, कैलाश वती हर किसी की पसंदीदा हैं। इसकी वजह यह है कि वह किचन गार्डनिंग और घरेलू चीजों को खास बना देती हैं। हरियाणा के जींद में रहने वालीं कैलाश का पूरा जीवन अब जैविक जीवनशैली के बीच ही बीतता है। जी हां, उन्होंने उनकी एक और साथी डॉ मीनाक्षी के साथ मिलकर काम करते हुए अब एक खास पहचान बना ली है और अब वे पारंपरिक भारतीय ज्ञान को बचाने, ऑर्गेनिक किचन गार्डनिंग और रोजमर्रा की ज़िंदगी को समझदारी से जीने पर ध्यान देती हैं। खास बात यह है कि वह सिर्फ खुद को जैविक चीजों से प्रभावित नहीं रखती हैं, बल्कि वे दूसरों को भी इसे अपनाने के उपाय बताती हैं, वे कम खर्चे वाले उपाय बताती हैं और सस्टेनबल जिंदगी जीने की कोशिश करती हैं, वह बेकार हो चुके कंस्ट्रक्शन पाइप को पेंट करके हैंगिंग प्लांटर बनाना या प्लास्टिक की बोतलों का इस्तेमाल करके बगीचे की सुंदर सजावट करने जैसी चीजों में जुड़ी रहती हैं। साथ ही वे अपने फॉलोअर्स को उन पारंपरिक जंगली साग-सब्जियों के बारे में बताती हैं, जिन्हें लोग भूल चुके हैं, जैसे सांथी (डेज़र्ट हॉर्सपर्सलेन), चौलाई (अमरैंथ) और कोंद्रा; वे इनके शरीर को ठंडक देने वाले गुणों और पोषक तत्वों के बारे में भी बताती हैं। वहीं कैलाश वती शहर में रहने वाले लोगों को मौसम के हिसाब से खान-पान चुनने की सलाह देती हैं, जैसे मॉनसून के दौरान कीटनाशकों वाली पालक से बचना और उसकी जगह शरीर को ठंडक देने वाली मौसमी साग-सब्जियों को चुनना। साथ ही वह ऑर्गेनिक लिक्विड फर्टिलाइज़र और मिट्टी को पोषण देने वाले आसान घरेलू नुस्खे बताती हैं, खासकर बसंत पंचमी जैसे मौसम बदलने के समय। गौर करें, तो वह ऐसे बहुत लोकप्रिय वीडियो बनाती हैं, जिनमें लोगों को बिना केमिकल वाले घरेलू कीटनाशक बनाना, ऑर्गेनिक किचन गार्डनिंग के तरीके और राबरी जैसे पारंपरिक प्रोबायोटिक ड्रिंक्स बनाना सिखाया जाता है। इसलिए भी इनकी लोकप्रियता काफी पसंद की जाती रही है और आगे भी पसंद किये जाते रहेंगे। इसलिए भी उनकी लोकप्रियता बहुत है और इस उम्र में भी वह जिंदादिली से ही जी रही हैं। हाल में उन्हें एक खास मैगजीन की ओर से पुरस्कार भी मिला।
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