बांस से बनीं चीजों से भी व्यापार किया जा सकता है। यह साबित किया है झारखंड के खूंटी जिले में रहने वालीं मीरा देवी ने। आइए जानते हैं विस्तार से।
मीरा देवी ने बांस से सुंदर - सुंदर चीजें बना कर कमाल किया है। बता दें कि मीरा देवी झारखंड के खूंटी ज़िले की एक जानी-मानी आदिवासी उद्यमी और कुशल कारीगर हैं। उन्होंने टिकाऊ बांस के हस्तशिल्प के जरिए अपनी ज़िंदगी बदलने और स्थानीय ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पहचान हासिल की है।अगर उनके शुरुआत की बात की जाये, तो शुरुआत में एक आम गृहिणी रहीं मीरा देवी ने 2018 में 'टोरपा रूरल डेवलपमेंट सोसाइटी फॉर विमेन' (TRDSW) द्वारा आयोजित बांस शिल्प प्रशिक्षण कार्यक्रम में हिस्सा लिया। बाद में, उन्होंने माहिर प्रशिक्षकों से अपनी कला को और बेहतर बनाने के लिए रांची की यात्रा की। फिर उन्होंने राणिया ब्लॉक के स्थानीय जंगलों में प्राकृतिक रूप से उगने वाले बंगाल बांस (बैम्बुसा टुल्डा) का इस्तेमाल करके, वह पेन स्टैंड, लैंप शेड, फूलों के गुलदान और पारंपरिक टोकरियों जैसे कई तरह के पर्यावरण-अनुकूल उत्पाद बनाती हैं। एक खास बात यह भी रही है कि वह एक मास्टर ट्रेनर के तौर पर, वह अब अपने दूर-दराज़ इलाके की दूसरी आदिवासी महिलाओं को हस्तशिल्प की चीजें बनाने का प्रशिक्षण देकर उन्हें आगे बढ़ा रही हैं और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बना रही हैं। उनके बनाए उत्पादों को अलग-अलग इलाकों में बेचा जाता है। वाकई में कला के माध्यम से उन्होंने खास पहचान स्थापित कर ली है, जो सराहनीय है।
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