यह कहने में कोई गुरेज नहीं है कि गांव की महिलाएं कृषि के कारण अपनी आजीविका का रास्ता मजबूत कर रही हैं। एक तरफ जहां इससे पर्यावरण को बढ़ावा मिल रहा है, तो वहीं दूसरी तरफ महिलाओं अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को भी बेहतर करने का प्रयास सतत खेती के जरिए कर रही हैं। उत्तर प्रदेश और बिहार के अलावा मध्य प्रदेश में भी महिलाएं कृषि को कमाई के लिए प्रथम मानते हुए अपने कार्य को आगे बढ़ा रही हैं।
मध्य प्रदेश के बालाघाट में खेती को प्रमुख माना जाता है। यहां पर किसानों ने पारंपरिक खेती से फसल उगाने का फैसला किया है और इसे खेती के लिए जरूरी भी मान रहे हैं। खासतौर पर खेती की गुणत्ता बढ़ाने के लिए जैविक खाद का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस गांव में राष्ट्रीय प्राकृतिक मिशन के जरिए गांव की महिलाओं ने जैविक संसाधन केंद्र की स्थापना की और इस केंद्र के जरिए न सिर्फ अपनी कमाई को बढ़ा रही हैं, बल्कि प्रकृति की रक्षा करने के लिए भी प्रण ले रही हैं और इसके लिए अनेक काम भी कर रही हैं।
बालाघाट के बिरसा तहसील के छोटे से गांव निक्कुम की महिलाओं के साथ समूह बनाकर डेलन बाई अनोखा कार्य कर रही हैं। उन्होंने जैविक उत्पाद का समूह बनाया है। यहां पर अलग-अलग तरह के खाद बनाने का काम कर रही हैं। इस काम में सरकार की तरफ से भी उन्हें लगातार मदद मिल रही है। जैविक खाद के साथ जैविक कीट नाशक और खेती के कार्य से जुड़ी हुई चीजों का भी उत्पादन किया जा रहा है। हालांकि इन महिलाओं के समूह ने पहले सरकार की तरफ से मिलने वाली योजना से जुड़कर इसका प्रशिक्षण लिया है और फिर उन्होंने गोबर,नीम औऱ प्राकृतिक चीजों का इस्तेमाल करते हुए जैविक खाद बनान का कार्य कर रही हैं। इसे दूसरे किसानों को बेचकर भी आर्थिक तौर पर लाभ प्राप्त कर रही हैं।