मंजरी शर्मा उन नामों में से एक हैं, जिन्होंने महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए बहाने नहीं, बल्कि उपाय ढूंढें और ग्रामीण महिलाओं को कुछ इस तरह से आत्मनिर्भर बनाया। आइए जानें विस्तार से।
फार्म दीदी के नाम से जानी जाने वालीं बिहार से संबंध रखने वालीं मंजरी शर्मा ने अपने गांव का मंजर ही बदल दिया। जी हां, आईआईएम जैसी जगह से स्नातक करने के बावजूद वह गांव लौटीं और उन्होंने बिहार में ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने और उन्हें आर्थिक आत्मनिर्भरता प्रदान करने के लिए आईआईएम स्नातक मंजरी शर्मा से मिलिए, जो फार्म दीदी के माध्यम से यह पहल चला रही हैं। दरअसल, फार्म दीदी ने अब तक 40 गांवों की 1,080 महिलाओं की मदद की है और इनका लक्ष्य दस लाख महिलाओं तक पहुंचना है। बता दें कि लगभग 100 महिला स्वयं सहायता समूह पहले से ही इस पहल का हिस्सा हैं और महिलाएं अच्छी आय अर्जित कर रही हैं। वहीं मंजरी की भूमिका उन्हें खाद्य सुरक्षा और व्यवसायिक पहलुओं के बारे में जागरूक करना था। साथ ही वह उन्हें उत्पादों का विश्व भर में विपणन करने और परिरक्षक-मुक्त स्थानीय खाद्य पदार्थों के बारे में जागरूकता फैलाने में मदद करती हैं। गौरतलब है कि वर्ष 2015 में, आईआईएम कोलकाता में अध्ययन के दौरान, उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा आयोजित "बढ़ चला बिहार" प्रतियोगिता में भाग लिया था और फिर यहां से उन्होंने आगे कदम बढ़ाया। उन्होंने महिला सशक्तिकरण पर शोध करने के लिए बिहार के सुदूर गांवों जिनमें पटना, बेगुसराय और खगड़िया सहित और भी कई जगह शामिल थे, वहां उन्होंने 15 दिन बिताए। इस अनुभव ने, जिसमें ग्रामीण महिलाओं ने उनसे पूछा कि वे अपने परिवारों के लिए अधिक आय कैसे कमा सकती हैं, उन्हें प्रेरित किया कि वे अंततः अपनी कंसल्टिंग की नौकरी छोड़ दें और ग्रामीण महिलाओं को उच्च गुणवत्ता वाले, पारंपरिक खाद्य उत्पादों को बेचने में मदद करें। साथ ही यह जानना भी उल्लेखनीय है कि उन्हें 2015 में बिहार सरकार द्वारा महिला सशक्तिकरण पर सर्वश्रेष्ठ शोध पत्र के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। *Image used is only for representational purpose