उत्तर प्रदेश इलाके की थारू महिलाएं कमाल कर रही हैं। वे वहां के आर्ट फॉर्म को पहचान दिलाने और संरक्षण करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उत्तर प्रदेश के खीरी जिले में गोब्रोला गांव है और वहां थारू महिलाओं द्वारा कई ऐसी चीजें तैयार की जा रही हैं, जो ग्रामीण पर्यटन को पूर्ण रूप से बढ़ावा दे रहा है। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।
दरअसल, गोब्रोला अपने टिकाऊ जूट क्राफ्ट के लिए मशहूर है। और यहां की थारू महिला कारीगर पारंपरिक विरासत और क्रिएटिव एंटरप्रेन्योरशिप का मेल करते हुए, जूट के बारीक काम वाले गलीचे और रोज़मर्रा के काम आने वाली चीजें हाथ से बनाती हैं। बता दें कि थारू महिलाओं की बनाई ये चीजें पर्यावरण के अनुकूल आदिवासी कला परंपरा को दिखाती हैं, जो लखीमपुर खीरी के तराई इलाकों और आस-पास के सीमावर्ती क्षेत्रों में गहराई से जुड़ी हुई है। जंगल से मिलने वाले स्थानीय संसाधनों और घर की पुरानी चीजों का इस्तेमाल करके, ये कारीगर काम की और आकर्षक चीज़ें बनाती हैं, जो परिवार के लिए बेहतरीन तोहफे और बाजार में बिकने वाले उत्पादों, दोनों के तौर पर काम आती हैं। साथ ही यहां महिलाएं स्थानीय वेटलैंड्स (नम भूमि) से जंगली मूंज घास और कांस के डंठल इकट्ठा करती हैं, उन्हें धूप में सुखाती हैं और गहरे रंगों में रंगती हैं। वे इनसे बारीक बुनाई वाली ढकिया और टोकरियां बना रही हैं और साथ ही डलवा यानी कि पूजा के लिए उथली टोकरिया भी बना रही हैं और साथ ही साथ कोस्टर और सजावटी फूलों के गमले बनाती हैं। साथ ही साथ कपड़े की इस बेहद बारीक कारीगरी में चमकीले सूती बेस पर पैचवर्क का इस्तेमाल किया जाता है। गौरतलब है कि महिलाएं प्रकृति से प्रेरित आकृतियां और मोर (मजूर), मछली और फूल काटती हैं और उन्हें पारंपरिक कपड़ों और घर के लिनन और चादर, पर्दे आदि सिलती हैं। इसलिए इन्हें बेहद पसंद किया जा रहा है और उन्हें काफी बढ़ावा भी दिया जा रहा है।
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