मिलिए बिहार की कंचन प्रकाश से, जो एक मशहूर भारतीय लोक-समकालीन कलाकार, डिजाइनर और शिक्षाविद हैं। उन्हें मुख्य रूप से बिहार के बज्जीकांचल क्षेत्र की 100 साल पुरानी पारंपरिक लोक कला 'बज्जीका कला' (बसेरी चित्रकला) को पुनर्जीवित करने और उसे वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने में उनके अहम योगदान के लिए जाना जाता है। आइए जानते हैं विस्तार से।
पूरी दुनिया में अपनी अलग और अद्भुत पहचान बनाने के लिए कला आपके लिए खास माध्यम बन सकता है। यह बात कंचन प्रकाश ने साबित की है। जी हां, कंचन प्रकाश ने 'बज्जीका कला' को खास पहचान दिला दी है। बिहार के ही मुजफ्फरपुर में जन्मी और पली-बढ़ीं कंचन का रूझान हमेशा ही आर्ट और कला की तरफ रहा। गौरतलब है कि उन्होंने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से बैचलर ऑफ फाइन आर्ट्स (BFA) और NIFT दिल्ली से पोस्ट-ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की है। लेकिन उन्होंने फिर से अपनी जड़ों तक लौटने का निर्णय लिया। जी हां, अगर आप उनकी पेंटिंग्स को ध्यान से देखेंगे, तो यह महसूस करेंगे कि ग्रामीण जीवन, पारंपरिक त्योहारों (जैसे छठ पूजा) और कोहबर व मछरियन तालाब (मछली के तालाब) जैसे विषयों से काफी प्रेरित हैं। साथ ही वह कागज या कैनवस पर ब्रश और पेंट का इस्तेमाल करके भारतीय लोक कढ़ाई, खासकर सुजनी कढ़ाई के 'रनिंग' और 'चेन-स्टिच' वाले असर को दिखाती हैं और एक अलग तरह की समकालीन शैली बनाती हैं। उनके कामों के बारे में बात करें, तो उनके काम मिट्टी की दीवारों से निकलकर प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचे हैं, जिसमें बेल्जियम के 'म्यूज़ियम ऑफ़ सेक्रेड आर्ट' में उनकी कलाकृतियों का स्थायी प्रदर्शन भी शामिल है। वहीं क्षेत्रीय लोक संस्कृति को बचाने के काम में पूरी तरह से लगने से पहले, उन्होंने NCR के लेदर गारमेंट्स और सामान उद्योग में बड़े यूरोपीय खरीदारों के लिए लगभग 20 साल तक फ्रीलांस डिजाइन इंजीनियर के तौर पर काम किया। लेकिन उनकी रुचि हमेशा से कुछ अलग करने की थी और उन्होंने इसे कर भी दिखाया। उल्लेखनीय है कि कंचन अपनी संरक्षण की कोशिशों को स्थानीय स्तर पर उद्यमिता के केंद्रों में बदलकर ग्रामीण बेरोजगारी से सीधे तौर पर निपटती हैं। वह पूरे बिहार में ग्रामीण युवाओं और गृहणियों के लिए कैनवस पेंटिंग और म्यूरल (दीवार-चित्रण) की गहन कार्यशालाएं आयोजित करती हैं। महिलाओं को ऐसी चीजों, जैसे कैनवस, कपड़े और कमर्शियल टेपेस्ट्री पर पेंटिंग करना सिखाकर, वह उन्हें आत्मनिर्भर बनने में मदद करती हैं। बता दें कि उन्हें प्रतिष्ठित बिहार कला पुरस्कार और अपने क्षेत्र में सीनियर फेलोशिप से सम्मानित किया गया।
वाकई, इस आर्ट की खास पहचान बनी है, इसके लिए कंचन प्रकाश की तारीफ तो बनती है।
*Lead Photo Credit : @KanchanPrakash Facebook.