महिलाओं को अपने हुनर को पहचान देने के लिए केवल अपने पंख पसारने की देर है। जी हां, उम्र ने कभी-भी महिलाओं को बांध कर नहीं रखा है। ठीक ऐसा ही करके दिखा रही हैं, 54 साल की पंजाब निवासी चरणजीत कौर। उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी नहीं की, लेकिन अपने हुनर को हमेशा सबसे आगे रखा और अपनी काबिलियत को पहचान बनाई है। पंजाब के लुधियाना निवासी 54 साल की चरणजीत कौर महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रही हैं।
अपनी मेहनत और लग्न से उन्होंने अपनी जूट की कला को बिजनेस का रूप दे दिया है। उनके जूट के बैग की सप्लाई देश से लेकर विदेश तक होती है और इससे उनकी महीने की लाखों की कमाई भी हो जाती है। हालांकि आर्थिक तंगी उन्हें यहां तक लेकर आयी है। उन्होंने शुरुआत में जूट के बैग बनाने का कार्य शुरू किया। लेकिन इसके पीछे की वजह परिवार के आर्थिक हालात रहे हैं। परिवार का सहारा बनने के लिए उन्होंने जूट बैग बनाने की कला सीखी और उन्होंने समराला के कृषि विज्ञान केंद्र से इसकी ट्रेनिंग ली और अपने काम की शुरुआत की,जो कि वर्तमान में बिजनेस का रूप ले लिया है।
शुरू में घर से ही अपने काम की शुरुआत की और छोटे आर्डर लेने का कार्य किया। लोगों ने उनके काम की सराहना की और एक के बाद एक उनका काम बढ़ता चला गया।उनके जूट के बैग की मांग भी बढ़ने लगी और एक के बाद उनका बिजनेस बढ़ता चला गया और लोगों के बीच उसका प्रचार भी होने लगा। जाहिर सी बात है कि पर्यावरण के हित में होने के कारण जूट के बैग की मांग काफी अधिक है।
इसके साथ उनके इस बैग के दाम भी काफी कम है। 45 रूपए से लेकर 100 रुपए के बीच उनके जूट बैग की कीमत है। हालांकि जूट के बारीक काम के साथ उनके एक बैग की कीमत हजार रूपए तक पहुंचती है और लोग इसे पसंद भी करते हैं। इससे हर महीने 50 हजार से एक लाख तक की कमाई कर लेती हैं। उन्होंने अपने इस काम से गांव की अन्य महिलाओं को भी जोड़ा है। उन्हें ट्रेनिंग दी और इससे ग्राहकों के बड़े आर्डर को पूरा करने का भी काम होता है।