दादी और नानी के जमाने से हस्तकला उनके जीवन की पहचान रही है। लेकिन बदलते वक्त के साथ हस्तकला ने अपना रूप बदला और महिलाओं को आर्थिक आजादी देने का भी काम किया है। उत्तर प्रदेश के फरीदाबाद जिले की महिलाएं भी यह काम बखूबी कर रही हैं। सिलाई और कढ़ाई केवल उनके घर की सजावट का हिस्सा नहीं रहा है, बल्कि उनके जीवन को भी आकार देने का काम कर रहा है। सिलाई, कढ़ाई, बुनाई, क्रोशिया और अन्य पारंपरिक कलाओं के जरिए महिलाएं खुद के लिए आकर्षक और उपयोगी उत्पाद की तैयारी कर रही हैं।
उल्लेखनीय है कि उनके द्वारा बनाए गए कुशन कवर, सजावटी सामान और हाथ से बनाई गई चीजों की मांग भी तेजी से बढ़ रही है, लोग अपने घर को सजाने और उपहार में देने के लिए इन सभी सामानों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस वजह से बाजार में इन सभी चीजों की मांग हमेशा रहती है। साथ ही महिलाएं एक दूसरे को देखरकर इस काम के प्रति खुद को आगे की तरफ बढ़ा रही हैं। साथ ही कई महिलाएं ऐसी भी हैं जो कि प्रशिक्षण देने का भी काम कर रही हैं।
त्योहार के मौके पर हस्तकला का काम और तेजी से किया जाता है, जिसके वजह से महिलाओं के काम की मांग बढ़ी है और उनकी आमदनी भी बढ़ रही है। कई महिलाएं ऐसी भी हैं, जो कि पढ़ाई के साथ हस्तकला की बारीकी सीखना चाहती हैं, ताकि भविष्य में कहीं पर भी रहकर हस्तकला के माध्यम से अपनी आमदनी को मजबूत किया जा सके। अपने घर के काम से समय निकालकर महिलाएं खासतौर पर हस्तकला का प्रशिक्षण ले रही हैं। उनका कहना है कि अपने आर्थिक हालात को मजबूत करने के लिए समय निकालना जरूरी है। इस तरह महिलाएं खुद की आर्थिक जरूरतों के साथ परिवार को भी आर्थिक तौर पर मजबूती देने का कार्य कर रही हैं।