सस्टेनेबल तरीका प्लास्टिक को बचाने का खास होता है और ग्राम प्रधान प्रियंका इसमें माहिर हैं। उन्होंने अपने गांव को कैसे सही तरीका सिखाया प्लास्टिक के इस्तेमाल का आइए जानते हैं विस्तार से।
उत्तर प्रदेश के राजपुर इलाके की तस्वीर पूरी तरह से बदल चुकी है, क्योंकि प्रियंका ने वह कमाल कर दिखाया है। जी हां, ग्राम प्रधान प्रियंका ने अपने गांव को प्लास्टिक का सही और सस्टेनेबल तरीका सीखा दिया है। उन्होंने अपनी सूझ - बूझ से प्लास्टिक का भी सही इस्तेमाल किया है। जी हां, जमीनी स्तर पर उनकी नई और अनोखी पहलों ने राजपुर को राष्ट्रीय 'स्वच्छ भारत मिशन' के अनुरूप एक आदर्श स्वच्छ गांव बना दिया है। गौरतलब है कि दिल्ली में पली-बढ़ीं और मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएट प्रियंका, 2019 में शादी के बाद राजपुर आ गयीं और फिर जब उन्होंने देखा कि वहां बहुत ज्यादा कचरा और बुनियादी सुविधाओं की कमी है, तो वह यह सब देखकर काफी अधिक हैरान हो गयीं, जिसके बाद उन्होंने 2021 में स्थानीय चुनाव लड़ा और जीत हासिल की और ठान लिया यह बात कि वह यह सबकुछ बदल कर रहेंगी। ऐसे में पद संभालने के सिर्फ एक साल के अंदर ही उन्होंने सिंगल-यूज प्लास्टिक पर प्रभावी ढंग से रोक लगा दी। साथ ही उन्होंने एक खास "प्लास्टिक बैंक" योजना शुरू की, जिसमें ग्रामीणों को प्लास्टिक कचरे के बदले पैसे या घर के काम आने वाली चीज़ें इनाम के तौर पर दी जाती थीं। गौरतलब है कि गांव के अंतर्गत ही प्लास्टिक कचरा प्रबंधन यूनिट और ज़ीरो-वेस्ट (कचरा-मुक्त) प्रबंधन यूनिट बनायीं। फिर घरेलू गंदे पानी को साफ करने और उसका दोबारा इस्तेमाल करने के लिए स्थानीय स्तर पर रीसाइक्लिंग तकनीक अपनायी। साथ ही पूरी पंचायत में 44-45 CCTV कैमरों का नेटवर्क लगाया, जिससे राजपुर एक बहुत सुरक्षित ग्रामीण इलाका बन गया। एक नई मल्टीपर्पस पंचायत बिल्डिंग, बेहतर जूनियर स्कूल, आंगनवाड़ी केंद्र और राशन वितरण की एक सही दुकान बनवायी। स्थानीय युवाओं की पढ़ाई और सरकारी परीक्षाओं की तैयारी में मदद के लिए एक आधुनिक डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा शुरू की। पक्की सड़कों और सिंचाई के लिए एक ज़रूरी नए पुल के साथ-साथ मुफ़्त पब्लिक वाई-फ़ाई ज़ोन भी बनाया। इससे साफ साबित होता है कि इंसान जो करना चाहता है, कर ही लेता है। वाकई में प्रियंका एक मिसाल हैं।
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