ग्रामीण जीवन के बीच बीते कई दिनों से कई महिलाएं आत्मनिर्भरता का उदाहरण बनकर सामने आयी हैं। इसी फेहरिस्त में एक नाम शामिल होने जा रहा है, विद्युत सखी गीता देवी का। जी हां, गीता देवी ने अपने हौसले और हिम्मत के साथ अपने प्रेरणादायक सफर की नायाब कहानी लिखी है। आइए जानते हैं विस्तार से।
बागपत की गीता देवी ने स्वयं सहायता समूह की मदद से खुद को गरीबी से बाहर निकालने का प्रण लिया। उन्होंने बीसी सखी के तौर पर अपना काम शुरू किया और अच्छी कमाई की। उनके इस प्रयास को देखकर अन्य महिलाएं भी काफी प्रभावित हुई हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर उन्होंने अपने जीवन की दिशा बदली और पूरे गांव को आत्मनिर्भर और आर्थिक तौर पर सशक्त बनाने का सराहनीय कार्य भी किया और इसके लिए उन्हें तारीफ भी मिली है।
राज्य सरकार द्वारा जारी की गई स्वयं सहायता समूह से जुड़ने का फैसला और खुद को सशक्त करने की शुरुआत साल 2018 में गीता ने की। साथ ही वक्त के साथ आगे बढ़ते हुए उन्होंने समूह की अध्यक्ष का भी कार्यभार संभाला। गांव-गांव जाकर उन्होंने महिलाओं को घर से बाहर निकलकर आत्मनिर्भर बनने की सीख भी दी। वर्तमान में 11 समूहों की महिलाओं का वह नेतृत्व कर रही हैं। सरकार से उन्हें इसके लिए सहायता भी प्राप्त हुई है। विद्युत सखी के तौर पर कार्य करते हुए उन्होंने हर घर जाकर बिजली संग्रह का कार्य भी शुरू किया। विद्युत सखी के तौर पर कार्य करते हुए वह हर महीने लगभग 50 हजार की कमाई भी करती हैं। इसके साथ उन्होंने 2 करोड़ के करीब की बिजली बिल का संग्रह करते हुए 2 लाख की कमीशन भी मिली है। उनके काम की सराहना दिल्ली तक की जा चुकी है। साल 2023 में गीता को लखपति दीदी का भी हिस्सा बनाया गया।