मिलेट्स की उपयोगिती और महत्व हर राज्य में बड़ा हुआ है। खासतौर पर पहाड़ी इलाकों में मिलेट्स को लेकर एक व्यापक पहल शुरू की गई है, जो कि सराहनीय है। उत्तराखंड में खासतौर पर इसके लिए योजना बनाई गई है। इसके लिए चमोली को सीड हब के तौर पर विकसित करने का फैसला लिया गया है। सीड हब का सारा फोकस बीजों की गुणवत्ता को परखने और सुधारने के साथ मोटे अनाज को देश के साथ विदेश तक पहुंचाने का जिम्मा लिया जाएगा।
इसके अलावा ग्रामीण विकास विभाग भी अपनी परियोजना के तहत मोटे अनाज की लोकप्रियता को बढ़ाने का भी कार्य करेगा। इसमें खासतौर पर पारंपरिक बीजों को संरक्षित करने के अलावा वैज्ञानिक तरीके से भी इस पर काम किया जाएगा। इससे यह होगा की बीजों का उत्पादन उसी क्षेत्र तक सीमित रह जाता है, इसलिए जरूरी है कि उसकी उत्पादन क्षमता पर ध्यान दिया जाए। इसके लिए बीजों को लेकर राज्य सरकार योजना के तहत पूरा कार्य करेगी।
इस योजना को खासतौर पर चमोली इसलिए केंद्र में रखा गया है, क्योंकि पारंपरिक फसलों का उत्पादन पहले से बेहतर माना जाता है। साथ ही उच्च गुणवत्ता वाले बीजों का संग्रह भी किया जाएगा। गांव के लोगों को भी इससे जोड़ा जाएगा। इस परियोजना के तहत करीब एक हजार ग्रामीण परिवारों को सीधे तौर पर सीड हब से जोड़ा जाएगा। यह परिवार अपने इलाके में उगने वाली बीजों का बचाव करेगा और उसके उत्पादन पर भी बल देगा। इस पूरी योजना का असर यह होगा कि मिलेट्स यानी कि मोटा अनाज में लाल चावल, पहाड़ी राजमा, चोलाई और रामदाना जैसी फसलें भी शामिल हैं। जाहिर सी बात है कि सेहत के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए और मिलेट्स को इससे जोड़ने के लिए इस तरह की पहल की गई है।