यह कहने में कोई गुरेज नहीं है कि खेती के साथ दुग्ध व्यवसाय केवल ग्रामीण महिलाओं तक सीमित नहीं है। महिलाएं खेती में भी आधुनिक तरीका अपनाकर खुद को आत्मनिर्भर बना रही हैं। बुंदेलखंड की ग्रामीण महिलाओं ने यह कर दिखाया है और आत्मनिर्भरता का नया मुकाम हासिल किया है। उल्लेखनीय है कि दुध का व्यवसाय करते हुए 1143 गांवों में महिलाओं ने अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है।
विदित हो कि बुंदेलखंड में करीब 90 हजार महिलाओं ने दो हजार करोड़ रुपए से अधिक का सामूहिक कारोबार खड़ा करते हुए इतिहास रच दिया है। उनके इस व्यवसाय की यात्रा झांसी जिले से शुरू हुई है। झांसी की महिलाओं के बाद बीते कुछ सालों में बांदा, चित्रकूट , हमीरपुर, जालौन और ललितपुर के साथ महोबा में महिलाएं सफलता का नया इतिहास लिख रही हैं। जैसा कि हम आपको पहले बता चुके हैं कि 1143 गांवों में महिलाओं का नेटवर्क फैला हुआ है। जहां पर महिलाएं हर दिन लगभग तीन लाख लीटर दूध का संग्रह कर रही हैं। पहले जहां महिलाओं को अपना सामान बेचने के लिए बिचौलियों से गुजरना पड़ता था, वहीं वर्तमान में महिलाओं के पास व्यवसाय के पैसे सीधे तौर पर उनके बैंक खाते में आ जाते हैं।
खुद को आर्थिक तौर पर मजबूत बनाने के साथ इन महिलाओं ने अपने परिवार और बच्चों की जिम्मेदारी को भी बखूबी संभाला है और अपने परिवार के लिए आर्थिक लाभ बनकर आयी हैं। यह काफी दिलचस्प है कि पहले जहां महिलाएं घर की रसोई में खुद को तपा रही थीं, वहीं पर अब महिलाएं घर की दहलीज को लांघ कर आगे बढ़ रही हैं। बुंदेलखंड की बेटियां खुद के पैरों पर खड़ा होकर सफलता की नई कहानी बुन रही हैं।