मासिक धर्म की स्वच्छता एक तरह से हर महिला की सेहत के लिए जरूरी है। ग्रामीण इलाकों में घर संभालने वाली महिलाएं इस काम को अच्छी तरह समझ रही हैं और इस तरफ अपने हाथ आगे बढ़ा रही हैं। बिहार की गुड़िया देवी ने कम कीमत वाले पैड बनाकर मासिक धर्म की सफाई पर खास तौर पर ध्यान देकर एक बड़ा कदम उठाया है। आइए जानते हैं विस्तार से।
मुज्जफरपुर में बिहार की जीविका पहल के तहत गुड़िया देवी के नेतृत्व में महिलाएं किफायती दर में सैनिटरी पैड बनाती हैं। इससे वे रोजगार पैदा कर रही हैं और खासतौर पर पीरियड्स के दौरान साफ-सफाई के बारे में जागरूकता बढ़ाने का काम कर रही हैं साथ ही ग्रामीण समुदायों को सशक्त बनाने का काम भी कर रही हैं। बिहार के सकरा ब्लॉक के सरमस्पुर पंचायत के एक गांव की महिलाएं सैनिटरी पैड बनाकर एक क्रांति लेकर आयी हैं। यह महिलाएं न सिर्फ रोजगार पैदा कर रही हैं, बल्कि पीरिड्स के दौरान साफ-सफाई से जुड़ी पुरानी परंपराओं को भी तोड़ रही हैं। यह सभी महिलाएं जीविका पहल के तहत इन महिलाओं ने महिलाओं के नेतृत्व वाले सफल कारोबार का एक माडल तैयार किया है।
इस बदलाव में सबसे आगे ‘सच्ची सहेली स्वावलंबी’ सहकारी समूह की अध्यक्ष गुड़िया देवी हैं। ज्ञात हो कि गुड़िया देवी का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। कई सारी चुनौतियों का सामना करने के बावजूद उन्होंने न केवल अपने जीवन को एक मकसद दिया है, बल्कि अपने जैसी कई अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनाया है। इससे पहले गुड़िया ने अपनी पढ़ाई पूरी की। इसके बाद साल 2006 में शादी के बाद गुड़िया की जिम्मेदारी बढ़ गई हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति ने उसे अपने सपने को पूरा करने नहीं दिया लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर ही था।
साल 2012 में स्वयं सहायता समूह की सदस्य के तौर पर जीविका पहल से जुड़ी लेकिन उन्हें पता भी नहीं चला और वह उस समूह का एक अहम हिस्सा बन गई हैं। साल 2022 में जीविका की एक टीम उनके गांव भी गई और मासिक धर्म के दौरान साफ-सफाई और सैनिटरी पैड के इस्तेमाल की अहमियत के बारे में जागरूकता का सत्र भी आयोजित किया गया। इस सेशन के दौरान गुड़िया को पता चला कि ज्यादातर ग्रामीण महिलाएं पीरियड्स के समय पुराने कपड़े का इस्तेमाल करती थीं, जिससे उन्हें इन्फेक्शन और सेहत से जुड़ी दूसरी गंभीर परेशानियां हो सकती थीं।
ज्यादा महिलाओं को इन समस्याओं से जूझते हुए देखकर उसे एहसास हुआ कि महिलाओं की सेहत में सुधार करना ही उसकी प्राथमिकता होगी। उन्होंने न सिर्फ सैनिटरी पैड बनने के साथ इसका प्रचार भी किया और महिलाओं को इसके लाभ भी बताएं। गुड़िया अपनी टीम के साथ मिलकर हर दिन 3 हजार के करीब का पैड बनाती हैं। 45 रुपए प्रति पैकेट बनाए जाते हैं और इस समूह में 30 से अधिक महिलाएं हैं। गांव में महिलाओं को इसे 28 रुपए में किफायती दर में दिया जाता है।