जब हम यह सोच रहे होते हैं कि अरे साड़ी पहन कर कोई भी काम करना कितना कठिन है, भारती मुड़ी वह शख्स हैं, जो एक गांव की लड़कियों को फुटबॉल खेल की ट्रेनिंग दे रही हैं। जी हां, हम बात कर रहे हैं भारती मुड़ी की। आइए जानते हैं विस्तार से।
भारत के ऐसे कई कोने में कई लड़कियां हैं, जो अपने सपनों को उड़ान देना चाहती हैं, लेकिन दे नहीं पाती हैं, ऐसे में पश्चिम बंगाल में एक ऐसी महिला हैं, जो जरूरतमंद लड़कियां फुटबॉल खेलना चाहती हैं, लेकिन खेल नहीं पाती हैं, उन्हें खेलना सीखा रही हैं और आगे बढ़ना सीखा रही हैं। जी हां, भारती मुडी ऐसी ही महिला का नाम है और वह पश्चिम बंगाल के बांकुरा ज़िले के छत्ना ब्लॉक के डुमडुमी गांव की एक बेहतरीन फुटबॉल कोच हैं। उनकी खासियत यह है कि वह मैदान पर पारंपरिक साड़ी पहनकर जरूरतमंद आदिवासी लड़कियों को मुफ्त में फ़ुटबॉल की ट्रेनिंग देती हैं, जिसके लिए उनकी काफी सराहना होती रहती है। अगर उनकी प्रेरणादायक और संघर्ष से भरी कहानी की बात करें, तो कम उम्र में, भारती एक प्रतिभाशाली ट्रैक-एंड फील्ड एथलीट थीं और उनकी दिल से इच्छा थी कि वह प्रोफेशनल तौर पर फुटबॉल खेलें। हालांकि, पैसे की तंगी, परिवार की भारी जिम्मेदारियों और समाज में जेंडर से जुड़ी पाबंदियों के कारण उन्हें अपने खेल के सपनों को छोड़ना पड़ा। लेकिन फिर वर्ष 2009 में, अपनी बेटी तानिया के कहने और पति के सहयोग से, भारती ने तय किया कि गांव की लड़कियों को भी वैसी ही मुश्किलों का सामना न करना पड़े। उन्होंने गांव में फुटटबॉल ट्रेनिंग का एक प्रोग्राम शुरू किया। खास बात यह रही कि इनकी कोचिंग पूरी तरह से मुफ्त रही और इसके पीछे उनका लक्ष्य यही था कि कोई भी लड़की पैसे या फीस न भरने की वजह से खेलना न छोड़े और किसी बच्चे के आगे बढ़ने में फीस रुकावट न बने। गौरतलब है कि हर शाम, भारती गांव के धूल भरे खेल के मैदान में अपनी स्टूडेंट्स को पासिंग, ड्रिबलिंग और टैक्टिकल डिफेंसिव ड्रिल्स सिखाती हुई मिल जाती हैं और ये सब वे पारंपरिक साड़ी पहनकर ही आसानी से करती हैं। उल्लेखनीय है कि उनकी ट्रेनिंग ने बेहतरीन एथलेटिक टैलेंट तैयार किया है, जिससे उनके कम से कम 18 स्टूडेंट्स ने स्टेट-लेवल फुटबॉल टूर्नामेंट में वेस्ट बंगाल का प्रतिनिधित्व किया है। कई स्टूडेंट्स ने गोवा, चंडीगढ़ और भोपाल जैसे शहरों में नेशनल टूर्नामेंट में भी हिस्सा लिया है। उनके मार्गदर्शन से, दूर-दराज के आदिवासी इलाकों की कई लड़कियों ने स्पोर्ट्स कोटे के जरिए सफलतापूर्वक पक्की सरकारी नौकरी हासिल की है। उनके मार्गदर्शन से, दूर-दराज के आदिवासी इलाकों की कई लड़कियों ने स्पोर्ट्स कोटे के जरिए सफलतापूर्वक पक्की सरकारी नौकरी हासिल की, वाकई वह मिसाल हैं।
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