ग्रामीण इलाकों में महिलाओं के लिए खेती एक मात्र सशक्त कमाई का जरिया बन चुकी है। ऐसे में किसी न किसी जरिए महिलाएं खेती में अधिक श्रम करते हुए खुद के लिए रोजगार के अवसर तलाश कर रही हैं और सफलता से आगे बढ़ रही हैं। मध्य प्रदेश राज्य के उत्तरी भाग शिवपुरी जिले की पिछोर तहसील के लोटन गांव की भगवती केवट ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा का कार्य कर रही हैं। भगवती अपने परिवार के साथ खरबूज की खेती करती हैं।
साथ ही अपने पूरे परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी को भी संभालती हैं। खरबूज की खेती से उन्हें काफी अच्छा मुनाफा भी हो रहा है। खरबूज की खेती करने के लिए भी भगवती अपने परिवार के साथ काफी मेहनत करती हैं। सबसे पहले खेत को तैयार किया जाता है और फिर खरबूज के लिए खाद डाली जाती है। इसके बाद खरबूज के बीज को बोया जाता है और फिर पौधों की दिन-रात देखभाल करनी पड़ती है। पौधों में पानी डालना पड़ता है।
यह भी जान लें कि शिवपुरी जिले में बिजली की सुविधा में ढिलाई है, ऐसे में इंजन के सहारे तालाब से पानी निकाला जाता है और खेती के लिए सिंचाई का काम पूरी किया जाता है। उल्लेखनीय है कि खरबूज बीते कई सालों में खेती के लिए सर्वप्रथम पर्याय बन गया है। पांच बीघा जमीन में खरबूज की खेती की जाती है। इसमें 50 हजार के करीब का खर्च होता है और फिर इससे अच्छी कमाई की जाती है। यह भी है कि खरबूज की खेती के लिए धूप अच्छी मानी जाती है। बारिश और ठंड में इसकी खेती को नुकसान भी पहुंचता है। पौधों पर कीड़े लग जाते हैं। लेकिन भगवती ने नुकसान के बाद भी हार नहीं मानी है और उनका परिवार खुद को आर्थिक हालात से बाहर निकाल पाया है। भगवती के इस हौसले ने गांव की अन्य महिलाओं को भी प्रभावित किया और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित भी किया है।