ग्रामीण महिलाओं के लिए सेहत हमेशा से चुनौती रहा है। अक्सर महिलाएं समाज या फिर परिवार की शर्म से अपनी सेहत की किसी भी परेशानी को किसी के साथ साझा नहीं करती हैं। इसी परेशानी को ध्यान में रखते हुए हैदराबाद की बी-वेल कंपनी की तरफ से एआई आधारित सॉफ्टवेयर अन्नु को विकसित किया गया है। आइए जानते हैं विस्तार से।
उल्लेखनीय है कि यह सॉफ्टवेयर खासतौर पर उन महिलाओं के लिए बनाया गया है, जो कि सामाजिक संकोच या फिर किसी भी तरह की जानकारी के अभाव में सेहत से जुड़ी अपनी समस्या पर किसी भी तरह का कोई एक्शन नहीं ले पाती हैं। इस तरह महिलाएं खुद की सेहत के साथ समझौता करती हैं। इस वजह से राज्य सरकार भी इस एआई अन्नु की सुविधाओं की बढ़ाई कर रही है। गोरखपुर के एआई क्लीनिक कार्यालय में राज्य सरकार द्वारा इस बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। साथ ही यह फैसला लिया गया है कि राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान जिम्स में संचालित इंक्यूबेशन सेंटर में एआई क्लिनिक के तहत परफॉर्मेंस को बेहतर करने के लिए इनक्यूबेटर किया जाएगा। यह इनक्यूबेट एआई अन्नु को महिलाओं तक पहुंचाने में और अधिक सहायक बनेगा। इसके बाद एक टोल फ्री नंबर जारी किया जाएगा। जिसके जरिए महिलाएं अपनी सेहत से जुड़ी समस्याओं को साझा कर सकेंगी।
एआई अन्नु की खूबी यह भी है कि यह स्मार्टफोन के साथ साधारण से की-पैड के फोन पर भी मौजूद होगा। जहां से महिलाएं इसका उपयोग आसानी से कर सकती हैं। इस तरह से हर तबके की महिलाएं एआई अन्नु से जुड़ सकती हैं। अगर बात की जाए, इस बारे में कि आखिरकार एआई अन्नु के निर्माण का आइडिया कहां से आया, तो इस संबंध में हैदराबाद की बी-वेल कंपनी के फाउंडर एम. हरिप्रसाद ने जानकारी दी है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महिलाओं में होने वाली सेहत संबंधी समस्याओं के डाटा को एनालाइज किया गया है, उससे यह जानकारी मिली है कि सबसे अधिक भारतीय युवा और महिलाएं अपनी समस्या पर खुलकर बात नहीं करते हैं। साथ ही ग्रामीण इलाकों में यह समस्या सबसे अधिक है।
खासतौर पर ग्रामीण इलाकों में महिलाएं गर्भधारण के दौरान सेहत से जुड़ी किसी भी समस्या पर खुलकर अपनी तकलीफ को साझा नहीं करती हैं। इससे भविष्य में उनकी समस्याएं बढ़ जाती हैं। इन सभी परेशानी को समझते हुए एआई अन्नु का निर्माण किया गया है। एआई अन्नु इस तरह से काम करेगा कि कीपैड से फोन नंबर डायल करने पर उन्हें एआई से जोड़ा जाएगा और फोन करने वाले को बीमारी से संबंधित सवाल पर मार्गदर्शन किया जाएगा। इस दौरान अगर एआई अन्नु को लगा कि फोन करने वाले व्यक्ति को डॉक्टर से मिलने की जरूरत है, तो उसे स्थानीय सरकारी अस्पताल में डॉक्टर से मिलने का स्लॉट निशुल्क बुक करके दिया जाएगा और डॉक्टर की पूरी जानकारी भी दी जाएगी। इस तरह से एआई अन्नु महिलाओं के लिए सखी बनकर काम करेगी।
AI कैसे करेगा महिलाओं की मदद
एआई आधारित मोबाइल ऐप्स महिलाओं से बीमारी के लक्षण पूछकर संबंधित बीमारी का अनुमान लगा सकती है। साथ ही किसी बीमारी से जुड़ी जटिलताओं पर भी रोशनी डाल सकती है। खान-पान और डाइट को लेकर भी एआई मदद कर सकता है। AI-पावर्ड सिस्टम डॉक्टरों को दूर बैठे मरीजों से जोड़ सकते हैं। वीडियो कॉल पर परामर्श कर सकते हैं। ग्रामीण महिलाओं को घर बैठे सलाह दी जा सकती है। गर्भवती महिलाओं के साथ बच्चों से जुड़ी समस्याओं का भी एआई समाधान कर सकता है। मासिक धर्म से जुड़ी सावधानी और सफाई पर भी एआई अपना ज्ञान साझा कर सकता है। एक तरह से कम खर्च में सेहत सखी का साथ हमेशा महिलाओं के साथ रह सकता है। इसलिए बहुत जरूरी है कि ग्रामीण महिलाओं के बीच डिजिटल साक्षरता बढ़नी चाहिए। इंटरनेट और मोबाइल की भी पहुंच महिलाओं तक होना जरूरी है।
ग्रामीण महिलाओं की सेहत से जुड़ी साल 2025- 2026 की रिपोर्ट
राष्ट्रीय सांख्यिकी संगठन के ताजा आंकड़ों के अनुसार दिल रोग देश की सबसे बड़ी समस्या है। सर्वे के अनुसार भारत में कुल बीमारियों में दिल की हिस्सेदारी 25 प्रतिशत के करीब है। ग्रामीण- शहरी दोनों क्षेत्रों में इलाज का खर्च अधिक हो रहा है। एक अन्य शोध के अनुसार 50 से अधिक भारतीय महिलाएं एनीमिया से प्रभावित हैं। ग्रामीण इलाकों में यह समस्या अधिक है। इसकी वजह भोजन में कमी. गर्भावस्था के दौरान देखभाल नहीं होने से और आयरन सप्लीमेंट की कमी इसरी प्रमुख वजह है।