सब लेफ्टिनेंट आस्था पूनिया ने भारतीय नौसेना की पहली महिला लड़ाकू पायलट बनकर इतिहास रच दिया है। उन्हें आईएनएस डेगा में उन्हें प्रतिष्ठित विंग्स ऑफ गोल्ड से सम्मानित किया गया है। उनकी यह उपलब्धि नौसेना विमान और भारत के सशस्त्र बलों में लैंगिक समावेशन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के हिसवाड़ा गांव की निवासी आस्था पूनिया की यात्रा जिज्ञासा से भरी रही है। आस्था ने अपनी पढ़ाई को हमेशा जारी रखा। उन्होंने बनस्थली विद्यापीठ से बी टेक में ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की है। उन्होंने यह भी बताया कि देश की सेवा करने के अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखने में इंस्टीट्यूट के अनुशासन काफी असरदार रहा है। आस्था अपनी पढ़ाई और अनुशासन को ही खुद की सफलता का श्रेय मानती हैं।
यह कहने में कोई गुरेज नहीं है कि आस्था के हौसले की कहानी ने कई महिलाओं को उड़ने का सपना दिखाया है। लड़ाकू विमान की कमान हाथ में लेकर उन्होंने महिलाओं को शक्तिशाली होने का संदेश दिया है। उन्होंने अपने हौसले से यह बता दिया है कि महिलाएं देश की रक्षा के लिए हर ऊंचाई को छू सकती हैं। पूनिया की नियुक्ति से यह स्पष्ट संदेश मिलता है कि भारत में लड़ाकू विमान की कमान अब महिलाओं के हाथ में भी आ सकती है। गौरतलब है कि आस्था का पूरा परिवार शिक्षा के क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। उनके माता-पिता शिक्षक रहे हैं। ज्ञात हो कि लेफ्टिनेंट शिवंगी भारतीय नौसेना की पहली महिला पायलट हैं। उन्होंने 2 दिसंबर को कोच्चि में अपना परिचालन प्रशिक्षण पूरा करने के बाद नौसेना संचालन के तौर पर कार्यभार संभाला।