कहते हैं कि अगर आप में हुनर है, तो उम्र उसे रोक नहीं सकती है। यही कर दिखाया है 45 साल की प्रेरणा अरोड़ा ने। जी हां, प्रेरणा अरोड़ा मे हाउसवाइफ से गन शूटर बनकर कई मेडल हासिल किए हैं। दिल्ली की पूनम अरोड़ा उन सभी महिलाओं के लिए प्रेरणा बनी हैं, जो कि अपने सपनों को पखं नहीं दे पाती हैं। उल्लेखनीय है कि साल 2025 तक केवल उन्होंने खुद को घर तक सीमित रखा। परिवार की जिम्मेदारी संभाली और उसी को अपने जीवन का लक्ष्य माना।
घर और परिवार के साथ बच्चों के सपनों को पूरा करने में अपना फोकस रखा। लेकिन बेटी के सपने ने उनके जीवन में रोशनी लाई। हालांकि पूनम को बचपन से खेलों को काफी शौक रहा है। हमेशा से शूटिंग रेंज में खिलाड़ियों को देखकर उनके मन में भी शूटिंग सीखने की ख्वाहिश रहती थी। बेटी के साथ उन्होंने भी अपने सपने को पूरा करने का फैसला किया। 45 साल की उम्र के बाद उन्होंने खुद को चुनौती दी। पिस्टल शूटिंग की ट्रेनिंग शुरू की। हर दिन परिवार और घर से समय निकालक घंटों अभ्यास किया। एक ही निशाने पर कई बार फोकस किया। दिक्कत और परेशानी के बीच उन्होंने खुद का हौसला कम होने नहीं दिया और खुद को आगे बढ़ाया।
परिवार और बच्चों के साथ पति ने भी उनका साथ दिया और उनके शौक की सराहना की। खुद को इस खेल में पूरी तरह से प्रशिक्षण देने के बाद उन्होंने जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया। अपनी मेहनत और लगातार प्रयास के दम पर कई स्वर्ण पदक हासिल किए और अपना नाम सुनहरे शब्दों में लिखवाया। इस तरह पूनम अरोड़ा उन सभी महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गईं, जो सपने देखने के साथ उसे पूरा करने का जज्बा भी रखते हैं। उन्होंने साबित कर दिखाया है कि सपनों की उम्र नहीं होती।