सुधा उदेशी एक आम महिला है, लेकिन उन्होंने अपनी आम जिंदगी को धावक बनाकर खास बना दिया है। 63 साल की उम्र में जहां पर महिलाएं खुद को परिवार की जिम्मेदारी के बीच या फिर नाती और पोती के जीवन को संवारने में सीमित रखते हैं, वहीं पर सुधा उदेशी ने मैराथन धावक बनकर यह साबित किया है कि दौड़ सोच से लंबी होनी चाहिए। अपनी इच्छाशक्ति और निरंतर प्रयासों को दर्शाते हुए उन्होंने खुद को धावक बनकर सेहतमंद रखा है और कई महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं। चलिए एक नजर डालते हैं उनके प्रेरणादायी सफर पर।