उत्तर प्रदेश के सिरौली गौसपुर तहसील के डलई पुरवा गांव की रहने वाली हैं पूजा पाल। पूजा पाल का नाम उन लड़कियों में हमेशा शामिल किया जायेगा, जिन्होंने अपनी सूझ-बूझ से बेहद कम उम्र में एक पहचान बना ली है। 17 वर्षीय बाल वैज्ञानिक पूजा पाल ने कम लागत वाली 'धूल रहित थ्रेशर' बना कर देश भर में पहचान बनायीं। पेश है उनसे बातचीत के मुख्य अंश।
क्यों हो रही है चर्चा

Image Credit : Rajiv Shrivastava
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के सिरौलीगौसपुर तहसील के डलई पुरवा गांव की रहने वाली 17 वर्षीय बाल वैज्ञानिक पूजा पाल ने कम लागत वाली 'धूल रहित थ्रेशर' (Dust-Free Thresher) मशीन बनाकर देश-विदेश में अपनी पहचान बनाई हैं। उन्हें राष्ट्रपति समेत उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और देश के प्रधानमंत्री से भी सराहना मिली है और पूजा कहती हैं कि ये सारे क्षण उनके लिए स्मरणीय हैं।
कैसे आया आइडिया
पूजा बताती हैं कि उनके स्कूल के पास थ्रेशर मशीन थी और वहां से काफी धूल उड़ती थी, इसकी वजह से वह देखती थीं कि सिर्फ उन्हें ही नहीं, बाकी छात्रों को भी परेशानी हो रही है, ऐसे में उन्हें एक आइडिया आया और उन्होंने ऐसा मॉडल बना दिया, जिसमें टीन और पंखे की मदद से बनाए गए इस मॉडल में धूल एक थैले में जमा हो जाती है, जो न केवल पर्यावरण के लिए सुरक्षित है, बल्कि किसानों के लिए भी उपयोगी है। वह खुद बताती हैं कि उन्हें इस मॉडल को तैयार करने के लिए उनके शिक्षक राजीव श्रीवास्तव सर ने काफी प्रेरित किया और मार्गदर्शन दिया। इसे बनाने में पूजा ने खुद के पैसे खर्च किये, जो कि उनके खुद के लिए बड़ी रकम हैं।
मिली पहचान

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पूजा ने बताया कि वह इस वक्त 12 वीं की परीक्षा दे रही हैं और उनका सपना है कि आगे वह विज्ञान के ही क्षेत्र में ऊंचाइयों को छुएं। गौरतलब है कि यह मॉडल वर्ष 2020 में जिला और मंडल स्तर पर चुना गया, फिर राज्यस्तरीय प्रदर्शनी और अंततः राष्ट्रीय विज्ञान मेले तक पहुंचा। वर्ष 2024 में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा आयोजित राष्ट्रीय विज्ञान मेले में भी पूजा के मॉडल ने सभी का ध्यान खींचा। उनकी प्रतिभा को देखते हुए जून 2025 में भारत सरकार ने उन्हें शैक्षिक भ्रमण के लिए जापान भेजा गया। पूजा बताती हैं कि वहां जाकर उन्होंने महसूस किया कि जापान में अपने देश से लोग बहुत प्यार करते हैं और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए कई तरह के काम किये जा रहे हैं और वे लोग छोटी-छोटी चीजों को और प्रयासों को काफी प्रोमोट करते हैं। पूजा बताती हैं कि हवाई जहाज पर चढ़ने का भी उनका अनुभव शानदार रहा और उन्हें आत्मविश्वास आया।
माता-पिता के संघर्ष को है समझा

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पूजा ने अपनी बातचीत में कहा कि उन्होंने हमेशा अपने पिता को संघर्ष करते हुए देखा है और वह मजदूरी करके मुझे और मेरे बाकी के भाई-बहनों को पढ़ा रहे हैं, लेकिन मैं चाहती हूं कि अपनी शिक्षा से मैं अपने घर और गांव की तस्वीर बदलूं। मां को भी रसोइया का काम करते हुए देखती हूं, लेकिन मैं सबकी स्थिति को बेहतर करना चाहती हूं। पूजा बताती हैं कि वह मवेशियों का ध्यान रखते हुए और खेत के बाकी काम करे हुए अपनी पढ़ाई पूरी करती हैं।
सिर्फ पढ़ाई पर फोकस

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पूजा की पूरी कोशिश यही रहती है कि वह कभी शिकायत करने या उनके पास क्या नहीं है, उसकी कमी निकालने में नहीं रहती हैं, बल्कि वह प्रतिकूल परिस्थितियों में भी पढ़ाई करना नहीं भूलतीं, वह मानती हैं कि अगर वह कुछ कर पायीं, तो गांव की अन्य लड़कियां भी उनसे प्रेरणा लेकर और उनके परिवार वाले उन्हें आगे बढ़ने का मौका देंगे। वह कहती हैं कि वह अपने गांव में बच्चों के लिए अच्छा स्कूल खोलना चाहती हैं और उन्हें पढ़ाना भी चाहती हैं। गौरतलब है कि उनका खुद का जो घर है, वह बेहद अच्छी स्थिति में नहीं है, गांव में पूर्ण रूप से बिजली की भी व्यवस्था नहीं है। लेकिन फिर भी उन्होंने सिर्फ फोकस अपनी पढ़ाई पर ही रखा है। बता दें कि पढ़ाई करते हुए, 2025 में जापान में भारत का प्रतिनिधित्व किया और राष्ट्रपति से सम्मानित होकर वह एक प्रेरणा बन गई हैं। गौरतलब है कि पूजा ने धूल रहित थ्रेशर का मॉडल तैयार किया है, जो मड़ाई के दौरान उड़ने वाली हानिकारक धूल को नियंत्रित करता है।
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