लोग क्या कहेंगे जैसी बातों को सोच कर हमेशा घूंघट में रहने वालीं पटना शहर की ‘अम्मा’उर्फ देवनी देवी ने जब गृह उद्यमी बनने की ठानी, तो यकीनन वह कई होममेकर्स की प्रेरणा बनीं कि आपका शौक और पैशन किसी उम्र की मोहताज नहीं। खुद से अपनी सफलता की कहानी किस तरह से लिखी देवनी देवी में। Her Circle से उन्होंने खुद बातचीत में बताया।
अम्मा किचन की शुरुआत

गौरतलब है कि 'अम्मा किचन' पटना का एक लोकप्रिय फ़ूड वेंचर है, जिसकी शुरुआत 65 वर्षीय देवनी देवी ने किया है, उन्होंने शुरुआत एक छोटी-सी टिफिन सर्विस से किया था और अब सफल क्लाउड किचन और रेस्टोरेंट ब्रांड में बदल चुका है। 2022 में यह अस्तित्व में आया व्यवसाय के रूप में।
सोचा नहीं था ऐसा कुछ होगा

देवनी बताती हैं कि उनको खाना बनाने का शौक हमेशा से रहा, लेकिन कभी उन्होंने यह नहीं सोचा था कि व्यवसाय कर सकेंगी। वह बताती हैं कि उस जिस माहौल से आयी हैं, वहां समाज को बेहद ध्यान में रखा जाता था, इसलिए घूंघट निकाल कर बाहर निकलना भी नहीं होता था, उस वक्त खाना बनाने का मतलब और खिलाने का मतलब पूरी तरह से परिवार वालों को ही खिलाना होता था। वह सबसे पहले उठती थीं और सबसे बाद में सोती थीं। वह कहती हैं कि लेकिन खाना बनाने का उन्हें हमेशा से शौक रहा। हालांकि शादी के कई सालों के बाद भी उन्होंने इस हुनर को बहुत निखारने की कोशिश नहीं की, घर-परिवार की जिम्मेदारियों में ही जुड़ी रहीं, लेकिन एक दिन उन्होंने देखा कि दूसरों शहरों से जो बच्चे पटना पढ़ने आते थे और वहीं पास के हॉस्टल में रहते थे और अच्छा खाना नहीं खा पाते थे। उन्हें 20 रुपये में घर का खाना खिलाने से उन्होंने शुरुआत की और कम दिनों में ही एक से 50 बच्चे हो गए और इस तरह से उन्होंने इसे व्यवसाय का रूप दिया और ‘अम्मा किचन’ वर्ष 2022 में अस्तित्व में आया, उनके बेटे ने खास साथ दिया। वह कहती हैं कि उन्होंने शुरुआती दौर में खाना बनाने से लेकर पैक करके बच्चों तक पहुंचाने का काम खुद किया है और उन्हें यह बताते में कोई झिझक नहीं है।
मजाक भी बना

देवनी बताती हैं कि जब उन्होंने इस काम की शुरुआत की थी, तो उनका बहुत मजाक बना था और लोगों ने इसे छोटा काम कहा था, उनको यह भी सुनना पड़ा कि शायद इनके पति नहीं कमाते हैं, इसलिए इसे यह काम करना पड़ रहा है। लेकिन उन्होंने लोगों की बातों पर बिल्कुल ध्यान नहीं दिया और अपना काम करती रहीं।
सोने के गहनों को ठोस बनाया

देवनी देवी बताती हैं कि इस व्यवसाय ने उन्हें आत्मनिर्भर बनाया है और इस व्यवसाय के फलने-फूलने के बाद उन्होंने सबसे पहला काम अपनी आमदनी से यह किया कि अपने सारे पुराने जेवरों को उन्होंने असली यानी प्योर गोल्ड में बदला। वह कहती हैं कि जब उनकी शादी हुई थी, उनकी उम्र महज 16 साल थी और उस वक़्त उन्हें उतनी समझ भी नहीं थी। उस वक़्त हॉलमार्क का चलन नहीं था और मन या भरी से सोना दिया जाता था और वह असली है या नहीं, इस बात की गारंटी नहीं होती थी, इसलिए उन्होंने तय किया कि वह सारे पुराने सोनों को एक्सचेंज करके बेहतर ज्वेलरी बनवाएंगी, ताकि वह सही तरीके से निवेश कर सकें। कभी बेहद कम पैसों से शुरू किया गया यह व्यवसाय उन्हें करोड़ों की कमाई तक पहुंचा चुका है।
परिवार का मिला सहयोग

देवनी देवी बताती हैं कि पहले उनके पति नाखुश थे व्यवसाय को लेकर, कुछ महीनों तक उनकी बातचीत भी बंद रही थी, लेकिन फिर बाद में उन्होंने पूर्ण रूप से सपोर्ट किया। अभी पूरा परिवार बेटे, बहू और उनके पति उन्हें इस काम में सहयोग करते हैं। अम्मा जी की थाली की खास बात यह है कि यह पूर्ण रूप से घर का खाना है और मेन्यू में बिहारी खान-पान से लेकर कई वेरायटी है। देवनी बताती हैं कि उनके 20 से अधिक स्टाफ हैं और वह हाइजीन का पूरा ध्यान रखती हैं। अभी इनकी थाली 100 रुपये से 300 रुपये तक की होती है। अम्मा किचन के लोकप्रिय होने की वजह देवनी यह भी मानती हैं कि कोविड में भी उन्होंने बच्चों को खाना पहुंचाया और सबका विश्वास जीता। वह मानती हैं कि लोगों को खाना खिलाना एक आशीर्वाद है और वह इसे हमेशा जारी रखेंगी और वह यह भी कहती हैं कि वह चाहती हैं कि उनके जैसी महिलाएं आराम करने के बारे में नहीं काम करने के बारे में सोचें, क्योंकि नामुमकिन कुछ भी नहीं।