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होम / एन्गेज / खानपान / रेसिपी

आइए जानते हैं हर मर्ज की दवा चाय बनाने की विधियां

टीम Her Circle |  अप्रैल 15, 2025

सुस्ती भगाकर तरोताजा होना हो तो चाय, मूड ऑफ हो तो चाय, खुश हो तो चाय, सिर दर्द हो तो चाय और सिर में दर्द न हो तब भी चाहिए चाय। हम भारतीयों के लिए चाय, सिर्फ चाय नहीं, बल्कि इमोशन है। तो आइए जानते हैं भारतीय चाय के प्रकार और उन्हें बनाने की विधि। 

भारतीयों की पसंद मसालेदार चाय

हमारी दिनचर्या के साथ हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा है चाय। यही वजह है कि हमारा दिन चाय के बिना शुरू ही नहीं होता। मसाला चाय, अदरक चाय, दालचीनी चाय, कालीमिर्च चाय, तुलसी-पुदीना चाय और खालिस दूध की मलाईदार चाय। हर मूड़, हर मौसम और हर परिस्थिती के लिए जरूरी है चाय। भारतीय परंपरा में विभिन्न प्रांतों के अनुसार चाय के भी विभिन्न प्रकार हैं, लेकिन इन सबमें सबसे अधिक पसंद की जाती है भारतीय मसालों से बनी मसालेदार कड़क चाय। दरअसल मसाला चाय की परंपरा हमारे भारत में हजारों साल पुरानी है। आयुर्वेदिक और चीनी चिकित्सा के अंतर्गत स्वस्थ पेय के रूप में विभिन्न मसालों के साथ बनी मसालेदार चाय का महत्व तब से है, जब चाय की खोज भी नहीं हुई थी। हालांकि चाय का स्वरूप कैसा रहा होगा, इसकी कल्पना आप काढ़े या दूध और मसालों से बने उकाले से कर सकती हैं। हालांकि मसालेदार चाय की शुरुआत कैसे हुई यह किस्सा भी खासा दिलचस्प है। दरअसल 1900 के दशक में जब अंग्रेजों ने असम में चाय के बागान लगाए थे, तब चाय आम भारतीयों के लिए काफी महंगी हुआ करती थी। यही वजह है कि दुकानदारों ने कम लागत में इस स्वादिष्ट पेय की तरफ आम भारतीयों का ध्यान आकर्षित करने के लिए मसाले, दूध और शक्कर मिलाकर एक ऐसी चाय बनाई, जिसे सभी ने हाथों हाथ लिया और यह हमारी परंपरा का हिस्सा बन गई, जो आज तक कायम है।

मसालेदार कड़क चाय

सामग्री:

डेढ़ कप पानी 

1 कप दूध 

2 चम्मच चाय की पत्ती 

1 कुटी हुई इलायची 

1 इंच अदरक का टुकड़ा 

आधा चम्मच चाय मसाला 

शक्कर स्वादानुसार 

विधि:

एक सॉसपैन लेकर उसमें डेढ़ कप पानी डालकर उसे खौलने दे। जब पानी खौलने लगे, तब उसमें 2 चम्मच चाय की पत्ती डाल दें। ध्यान रखिए कि चाय बनाते वक्त चाय की पत्तियां खौलते पानी में ही आप डालें, जिससे उसका रस उसमें अच्छी तरह निखर जाए। चाय पत्ती के तुरंत बाद शक्कर और अदरक घिसकर डाल दें। वैसे दो कप चाय में 1 चम्मच घिसी अदरक डाली जाती है, लेकिन शक्कर की तरह अपनी पसंद अनुसार आप अदरक की मात्रा भी कम-ज्यादा कर सकती हैं। अब उसमें 1 कप दूध के साथ कुटी इलायची और आधा चम्मच चाय मसाला भी मिला दें। गौरतलब है कि चाय पूरी तरह आपके स्वाद पर निर्भर करती है, ऐसे में ऊपर बताई गई सामग्री आप अपनी पसंद अनुसार कम या ज्यादा कर सकती हैं। इसके अलावा चाय का मसाला भी पूरी तरह ऑप्शनल है। अगर आपको चाय मसाला का फ्लेवर पसंद न हो, तो आप उसकी जगह काली मिर्च, लौंग और दालचीनी भी कूटकर डाल सकती हैं। जब चाय खौलने लगे तो आंच मद्धम करके उसे 4 से 5 मिनट तक और पकाएं। इससे चाय पत्ती के साथ मसालों का स्वाद भी चाय में अच्छी तरह घुल जाएगी। 5  मिनट बाद आपकी मसालेदार कड़क चाय तैयार है। आप इसे सुबह-शाम स्नैक्स के साथ या अपनी पसंद अनुसार कभी भी पी सकती हैं।   

अदरक चाय

सामग्री:

2 कप पानी 

एक/चौथाई कप गरम दूध  

2 बड़े चम्मच चाय पत्ती 

1 इंच घिसी हुई अदरक 

शक्कर स्वादानुसार 

विधि:

अदरक की चाय बनाने के लिए सबसे पहले एक सॉसपैन में 2 कप पानी डालकर उसे खौलने के लिए गैस पर रख दें। जब पानी खौलने लगे तो चाय की पत्ती के साथ घिसी अदरक डालकर उसे लगभग 2 मिनट तक मद्धम आंच पर खौलने दें। 2 मिनट बाद गैस बंद करके सॉसपैन को 1 मिनट के लिए ढंककर अलग रख दें। 1 मिनट बाद इसमें गरम दूध और स्वादानुसार शक्कर मिलाकर कप में छान लें। आम तौर पर बारिश के मौसम में प्याज के पकौड़ों के साथ अदरक की चाय का स्वाद दुगुना हो जाता है। बारिश के अलावा सर्दियों के मौसम में भी इसे काफी पसंद की जाती है। स्वाद में तीखी और स्वादिष्ट अदरक की चाय बुखार या सर्दी-खांसी के लिए भी बेहद लाभदायक है। इसे पीने से आपके गले के साथ सिर को भी राहत मिलती है। अगर यह कहें तो गलत नहीं होगा कि हर मर्ज की दवा है अदरक की चाय। हालांकि अदरक की चाय बनाते वक्त इस बात का खास ध्यान रखिए कि हमेशा गरम दूध का ही इस्तेमाल करें। अगर आप ठंडे दूध का इस्तेमाल करेंगी तो हो सकता है अदरक के साथ मिलते ही दूध फट जाए और आपकी चाय बर्बाद हो जाए। 

अदरक-तुलसी चाय

सामग्री:

डेढ़ कप पानी 

2 कप दूध 

1 टुकड़ा घिसी अदरक 

7 से 8 तुलसी के ताजे पत्ते 

4 लौंग

1 हरी इलायची 

1 चुटकी दालचीनी पाउडर 

2 चम्मच शक्कर 

1 चम्मच चाय पत्ती 

विधि:

सबसे पहले 1 सॉसपैन में पानी लेकर उसे गर्म करने के लिए रख दें। जब पानी खौलने लगे तो उसमें घिसी अदरक के साथ कुटी हुई लौंग, काली मिर्च, इलायची, दालचीनी पाउडर और तुलसी के पत्ते मिलाकर उसे 2 मिनट के लिए धीमी आंच पर खौलने दें। 2 मिनट बाद चायपत्ती और शक्कर डालकर कुछ देर पकने दें। लगभग 1 मिनट बाद दूध डालकर 4 से 5 मिनट अच्छी तरह पकाएं। संभव हो तो बीच-बीच में कंसिस्टेंसी चेक करने के लिए चाय को चम्मच से हिलाते रहिए। पांच मिनट बाद चाय को कप में छानकर अपने सुकून को इंजॉय कीजिए। आम तौर पर यह चाय तब पी जाती है, जब सर्दी-खांसी या बुखार हो। वाइरल इंफेक्शन को दूर भगाने और उससे दूर रहने का सबसे बेहतरीन तरीका है अदरक-तुलसी की चाय।

लेमनग्रास मसाला चाय 

सामग्री:

2 कप पानी 

1 कप दूध 

4 चम्मच शक्कर या स्वादानुसार 

2 चम्मच चायपत्ती 

2 चम्मच कटी हुई लेमनग्रास की पत्तियां 

एक/चौथाई छोटी चम्मच चाय मसाला पाउडर (ऑप्शनल)

1 इंच घिसी हुई अदरक  

विधि:

एक सॉसपैन में पानी डालकर उसे खौलने दें। जब पानी खौल जाए तो उसमें चाय पत्ती के साथ लेमनग्रास पत्तियां, घिसी हुई अदरक और चाय मसाला मिला दें। जब आपको लगे कि इनका रंग निखर गया है, तो चाय में दूध और शक्कर मिलाकर लगभग 4 से 5 मिनट धीमी आंच पर इसे पकने दें। 5 मिनट बाद गरमा-गरम पकौड़ों या नमकीन बिस्कुट के साथ इस चाय को इंजॉय कीजिए। सच पूछिए तो बारिश के साथ सर्दियों के मौसम में लेमनग्रास मसाला चाय का कोई जवाब नहीं। विशेष रूप से बारिश के मौसम में जब अदरक अच्छे नहीं आते तो लेमनग्रास काफी हद तक चाय में अदरक की भरपाई करते हुए चाय का स्वाद बढ़ा देते हैं। 

गुड़-पुदीना चाय

सामग्री:

डेढ़ कप पानी 

8 से 10 पुदीने की पत्तियां 

3 चम्मच गुड़ का पाउडर या अपनी मिठास अनुसार गुड़ का एक टुकड़ा 

1 चम्मच चाय पत्ती 

1 इंच घिसी हुई अदरक 

2 कप दूध 

विधि:

गुड़-पुदीने की चाय बनाने के लिए सबसे पहले सारी सामग्रियों को इकट्ठा कर लें, फिर एक सॉसपैन में डेढ़ कप पानी लेकर उसे खौलने के लिए रख दें। पानी उबलने लगे तब उसमें पुदीने के पत्तों के साथ घिसी अदरक और चाय पत्ती डालकर 2 से 3 मिनट के लिए मद्धम आंच पर उबलने दें। 3 मिनट बाद दूध डालकर चाय को धीमी आंच पर कम से कम 5 मिनट और पकाएं। चाय पकने के बाद इसमें गुड़ मिला दें। ध्यान रहे खौलते चाय में गुड़ मिलाने से दूध फटने की संभावना सबसे अधिक होती है। ऐसे में गैस बंद करके ही चाय में गुड़ मिलाएं और एक कप में छानकर गरमा-गरम गुड़-पुदीने की चाय का मजा लें। गौरतलब है कि शक्कर से बनी चाय के मुकाबले गुड़ से बनी चाय आम लोगों के लिए ही नहीं, डायबिटीज से पीड़ित लोगों के लिए भी फायदेमंद है।

 

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