कभी-कभी आपको जरूर मन होता होगा कि हम कुछ ऐसा खाना खाएं, जो वन डिश मील हो और जिसे बनाने में बहुत मेहनत न लगे। आइए ऐसी कुछ डिशेज के बारे में जानें।
क्या होता है वन डिश मील

आपको बता दें कि वन-डिश मील, जिसे वन-पॉट मील भी कहा जाता है एक पूरा, बैलेंस्ड खाना होता है, जिसमें सभी जरूरी चीजें, जिसमें आमतौर पर प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट (स्टार्च) और सब्जियां शामिल होती हैं और एक ही बर्तन में एक साथ पकाई जाती हैं। इसे खाने में बहुत मजा आता है और लोग इसे काफी एन्जॉय भी करते हैं और यह हेल्दी भी होता है, इसलिए इसे खाने के बारे में जरूर सोचना चाहिए और बनाने के बारे में भी। इस कुकिंग स्टाइल का मुख्य उद्देश्य तैयारी और सफाई की प्रक्रिया को आसान बनाना है, साथ ही यह भी पक्का करना है कि एक सर्विंग में सही पोषण मिले।
खास विशेषताओं की बात
अगर हम इनकी खास विशेषताओं की बात करें, तो मुख्य विशेषताएं यह होती है कि सिंगल वेसल में यानि कि सब कुछ एक ही बर्तन में तैयार किया जाता है, जैसे डच ओवन, स्लो कुकर, स्किलेट, शीट पैन या वॉक में और साथ ही इन मील्स में आमतौर पर कई फ़ूड ग्रुप्स को एक ही डिश में मिलाया जाता है, जिससे सलाद या ब्रेड जैसी अलग साइड डिश की जरूरत नहीं पड़ती। अगर किसी सामग्री को एक साथ पकाने से फ्लेवर आपस में मिल जाते हैं, जिससे अक्सर उन्हें अलग-अलग पकाने की तुलना में ज्यादा अच्छा और स्वादिष्ट नतीजा मिलता है।
फायदे हैं पौष्टिकता के

इसके सबसे बड़े फायदे यह होते हैं कि खाना बर्बाद नहीं होता है और कुछ देशों में शादियों में यह नियम बनाया गया है कि ऐसे डिश रखे जाएं, ताकि बेफिजूल की बर्बादी न हो। साथ ही यह काफी समय की बचत करवाता है और अक्सर कम ईंधन का इस्तेमाल होता है और अधिक दिक्कत नहीं होती है, अगर घर में कई लोग खाने पर आ रहे हैं, तो इसका ध्यान रखना अच्छा होता है। फिर अगर स्वास्थ्य की बात करें, तो एक ही बर्तन में खाना पकाने से विटामिन और मिनरल बने रहते हैं, जो खाना पकाने के पानी के साथ निकल जाते हैं अमूमन। जैसे कि जब आप नूडल्स या चावल खाते हैं, तो जैसे अनाज को सीधे शोरबे में पकाया जाता है, तो वे सब्जियों और मांस से निकले सभी मिनरल्स और विटामिन्स को सोख लेते हैं। वहीं खाने को सिर्फ एक बर्नर या उपकरण को गर्म करके कम ऊर्जा का इस्तेमाल होता है और सफाई के दौरान पानी की बर्बादी भी काफी कम होती है। वहीं इसके मनोवैज्ञानिक प्रभाव यह होते हैं कि कई एक-डिश मील शेयर करने के लिए डिजाइन किए जाते हैं, जो साथ में खाना खाते समय सामाजिक बंधन और पारिवारिक रिश्तों को मजबूत करने में मदद करते हैं।
जानें थोड़ा इतिहास भी
ऐतिहासिक और सांस्कृतिक मूल की बात करें, तो वन डिश खाना बनाने का तरीका कई सभ्यताओं में जरूरत की वजह से विकसित हुआ, जहां ईंधन और संसाधन कम थे। जैसे कि मध्यकालीन यूरोप में एक बड़ा कच्चा लोहे का बर्तन अक्सर चूल्हे की आग पर रखा जाता था, जिसमें सामग्री लगातार डाली जाती थी ,ताकि एक धीमी आंच पर पकने वाला स्टू बन सके जो परिवारों को कई दिनों तक खिलाता था। वहीं अगर बात प्राचीन मेसोपोटामिया और एशिया की करें तो पुरातात्विक सबूत बताते हैं कि शुरुआती सभ्यताएं हजारों साल पहले से मिट्टी के बर्तनों का इस्तेमाल करके स्वादिष्ट स्टू और दलिया बनाती थीं। वहीं खानाबदोश जनजातियां यूरेशियाई खानाबदोश खुले में आग पर पकाए गए पौष्टिक, आसानी से ले जाने वाले भोजन के लिए पोर्टेबल बर्तनों पर निर्भर रहते थे।
कई सारे हैं विकल्प

अगर कई सारे विकल्पों की बात करें, तो एक से बढ़ कर एक विकल्प मौजूद हैं, जैसे कि भारत में खिचड़ी (चावल और दाल) को अक्सर सबसे अच्छा इंडियन कम्फर्ट फ़ूड माना जाता है, जबकि बिरयानी की शुरुआत बड़ी सेनाओं को कुशलता से खाना खिलाने के लिए एक कामचलाऊ भोजन के रूप में हुई थी। वहीं पूर्वी एशिया में जापान के डोनाबे (मिट्टी के बर्तन) का इस्तेमाल सुकियाकी जैसे सामुदायिक हॉट पॉट के लिए किया जाता है, जबकि चीन में चावल से बनी दलिया का हजारों साल पुराना इतिहास है। वहीं उत्तरी अफ्रीका में टैगिन का मतलब खास शंकु के आकार का बर्तन और उसके अंदर पकाया जाने वाला मांस और फल का धीरे-धीरे पकाया गया खाना दोनों होता है। साथ ही यूरोप में स्पेन का पेला और फ्रांस का पॉट-ओ-फू स्थानीय स्टार्च को उपलब्ध प्रोटीन के साथ मिलाने के क्लासिक उदाहरण हैं।
ये भी कर सकते हैं ट्राई
वन-पॉट पास्ता, जिसमें नूडल्स को सीधे सॉस में पकाने से (जैसे क्रीमी टोमेटो बेसिल) पास्ता का स्टार्च बना रहता है, जिससे एक ही पैन में नैचुरली गाढ़ा और सिल्की सॉस बनता है। वहीं सॉसेज, दाल और चने जैसी चीजों का मजेदार कॉम्बिनेशन कम मेहनत में ज़्यादा प्रोटीन वाला खाना देता है। इनके अलावा, एक ही ट्रे में आलू और हरी बीन्स के साथ चिकन रोस्ट करना। इनके अलावा, चिकन और ब्रोकली राइस कैसरोल जैसी डिश में कच्चे चावल, लिक्विड और प्रोटीन को एक पैन में मिलाकर एक साथ बेक किया जाता है। अगर भारतीय विकल्पों की बात करें, तो बिरयानी, सबसे मशहूर इंडियन वन-डिश मील होती है और यह मैरीनेटेड मीट (चिकन, मटन, या कटहल) और आधे उबले बासमती चावल की खुशबूदार परत होती है, जिसे धीमी आंच पर (दम पर) एक साथ पकाया जाता है। इनके अलावा, बिरयानी से अलग, चावल और सामग्री (सब्जियां, मीट, या छोले) को शुरू से ही एक साथ भूनकर पकाया जाता है। इन्हें पुलाव कहा जाता है। साथ ही कर्नाटक की एक मसालेदार, खट्टी-मीठी और पौष्टिक पारंपरिक डिश जो चावल, दाल (तूर दाल), और गाजर और बीन्स जैसी कई तरह की सब्जियों से बनाई जाती है। गुजरात में एक टॉप ना दाल भात बनाई जाती है, यह एक गुजराती "वन-पॉट" स्पेशल डिश, जिसमें चावल, दाल और भरवां सब्जियां (जैसे छोटे आलू और प्याज) को एक साथ प्रेशर कुकर में पकाया जाता है। साथ ही उंधियू भी एक डिश है, यह गुजरात की सर्दियों की एक खास डिश है, जिसमें मौसमी सब्जियों और मसालों को मिट्टी के बर्तन में पकाया जाता है।