भारत में होली में क्षेत्रीय व्यंजनों की एक समृद्ध विविधता होती है, जिसमें मीठी गुझिया, स्वादिष्ट दही भल्ला और ताजा ठंडाई प्रमुख होती है। आइए जानें कहां बनती हैं क्या-क्या डिशेज।
महाराष्ट्र की होली के पकवान

अगर हम महाराष्ट्र की होली की बात करें, तो महाराष्ट्र की होली की खासियत होती है कि इस दिन यहां पूरन पोली बना कर खाना लोग पसंद करते हैं और काफी एन्जॉय करते हैं। पूरन पोली की अगर बात करें, तो गेहूं के आटे या मैदा और गेहूं के मिश्रण से बनी एक मीठी रोटी होती हैं, इसमें पूरन भरा जाता है, जो उबले हुए चने की दाल, गुड़ (या चीनी) से बना एक मीठा पेस्ट होता है और इसमें जायफल और इलायची का स्वाद होता है। इसे परंपरागत रूप से गरमागरम घी के साथ परोसा जाता है। इसे खाने का अपना ही मजा होता है। इसके अलावा, कटाची अमटी, एक पतली, मसालेदार और खट्टी दाल की करी होती है, जो पूरन पोली के साथ अनिवार्य रूप से परोसी जाती है। इसका नाम 'कट' से आया है, जो पूरन की स्टफिंग के लिए चना दाल उबालने के बाद बचा हुआ पानी होता है। इसमें सरसों के बीज, जीरा और गोडा मसाला, जो कि महाराष्ट्र का एक विशेष मसाला मिश्रण होता है और इसमें तड़का लगाया जाता है और अक्सर संतुलित स्वाद के लिए इमली और गुड़ भी मिलाया जाता है, इसे खाने में बेहद मजा आता है। साथ ही साथ श्रीखंड भी यहां बहुत खाया जाता है, यह एक गाढ़ा, मलाईदार व्यंजन है, जो छानी हुई दही (चक्का) को चीनी, केसर और इलायची के साथ मिलाकर बनाया जाता है। इसे अक्सर त्योहारों के भोजन के हिस्से के रूप में गरमागरम तली हुई पूरियों के साथ परोसा जाता है। इनके अलावा, मसाला मिल्क भी लोग शौक से पीते हैं, इसे दूध को गाढ़ा करके उसमें बादाम, काजू, पिस्ता, केसर और जायफल के पाउडर का मिश्रण मिलाकर बनाया जाता है। कोजागिरी पूर्णिमा का यह पेय विशेष महत्व रखता है और होली के दौरान भी यह एक लोकप्रिय पेय है।
उत्तर प्रदेश की होली और पकवान
उत्तर प्रदेश में भी होली पर बहार रहती है और कई तरह के पकवान खाये जाते हैं। जैसे गुजिया तो उत्तर प्रदेश में जरूर बनती है, लेकिन इसमें डाली जाती है चाशनी, फिर बनारस में पकवान के रूप में बनारस और मथुरा की होली में ठंडाई अनिवार्य है। साथ ही दूध, बादाम, सौंफ, और काली मिर्च से बनी इस ड्रिंक में मस्ती के लिए भांग मिलाई जाती है। साथ ही कांजी वड़ा भी होली का एक पारंपरिक पाचक व्यंजन है। राई और मसालों के पानी में मूंग दाल के बड़े भिगोकर रखे जाते हैं, जो भारी मिठाई खाने के बाद पाचन में मदद करते हैं। चाट अच्छी होती है यहां की। इनके अलावा कई घरों में दोपहर के भोजन में गर्मागर्म पूरी के साथ रसेदार आलू की सब्जी और कद्दू की खट्टी-मीठी सब्जी बनाई जाती है। साथ ही नमकपारे और शक्करपारे भी बनते हैं। साथ ही उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में होली पर कटहल की मसालेदार सब्जी या कोफ्ता बनाना शुभ माना जाता है।
राजस्थान में होली के पकवान

राजस्थान के होली के पकवान की बात करें, तो घेवर, राजस्थान की सबसे प्रसिद्ध मिठाई है। साथ ही यह मैदे और घी से बना एक जालीदार डिस्क जैसा व्यंजन है, जिसे चीनी की चाशनी में डुबोया जाता है और अक्सर रबड़ी व सूखे मेवों से सजाया जाता है। वहीं अगर होली की बात करें, तो मालपुआ यहां शौक से बनाई जाती है और होली पर रबड़ी के साथ परोसे जाने वाले ये मीठे पैनकेक राजस्थान, विशेष रूप से पुष्कर और जयपुर में बहुत लोकप्रिय हैं। वहीं साथ में मूंग दाल हलवा भी शुद्ध देसी घी में धीमी आंच पर भुनी हुई मूंग दाल से बना यह हलवा होली के शाही भोजन का हिस्सा होता है। साथ ही उत्तर भारत की तरह राजस्थान में भी मावा और सूखे मेवों से भरी हुई कुरकुरी गुजिया बनाई जाती है। यह राजस्थान का एक पारंपरिक होली व्यंजन है। साथ ही साथ मूंग दाल के बड़ों को राई, हींग और मसालों वाले फर्मेंटेड (खमीर उठे) पानी में डाला जाता है। यह पाचन के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। साथ ही दाल बाटी चूरमा भी साथ में खाई जाती है और होली जैसे बड़े त्योहारों पर इसे विशेष रूप से बनाया जाता है। साथ ही साथ उड़द दाल के नरम वड़ों को ठंडे दही और खट्टी-मीठी चटनी के साथ परोसा जाता है। और केर सांगरी भी बनाई और खाई जाती है, यह रेगिस्तानी सब्जियों से बनी एक सूखी और चटपटी डिश है जो लंबी अवधि तक खराब नहीं होती। साथ ही ठंडाई केसर, बादाम, पिस्ता और इलायची के मिश्रण से बनी ठंडाई होली का मुख्य आकर्षण है। साथ ही कई जगहों पर पारंपरिक राजस्थान में होली के दौरान साबूदाना खिचड़ी और दही जैसे फलाहारी व्यंजन भी उन लोगों के लिए बनाए जाते हैं, जो व्रत रखते हैं।
बिहार और झारखंड के पकवान

बिहार और झारखंड में भी बेहद शौक से सारे पकवान बनाये और खाये जाते हैं और होली यहां का बहुत बड़ा पर्व है। इसलिए इन्हें बेहद शौक से खाया जाता है। इस दिन यहां माल पुए, पुए, दही बड़े और इसके साथ कई तरह के पकवान बनाये जाते हैं। यहां होली में खासतौर से अन्य जगहों पर जो चाशनी वाले पुआ बनते हैं, उनसे अलग बिहारी पुआ एक मोटा, तला हुआ पैनकेक है जो मैदा, दूध, मसले हुए केले और चीनी के घोल से बनाया जाता है। मालपुआ वह प्रकार है जिसे चीनी की चाशनी में भिगोया जाता है। और इसे बेहद शौक से खाया जाता है। इसके अलावा, पेड़किया, लौंग लत्ता भी बेहद शौक से खाया जाता है, फिर ठंडाई और दही बड़े तो होते ही होते हैं, कई जगहों पर कटहल की सब्जी शौक से बनाई जाती है और साथ ही झारखंड में इस दिन कई तरह के ढुस्के खाये जाते हैं। जहां तक बात है दही बड़े की तो, मसालेदार दही में भिगोए हुए नरम मसूर के पकौड़े, जिनमें आमतौर पर भुना हुआ जीरा और काला नमक मिलाया जाता है। इस क्षेत्र में, ये मीठे पुआ के साथ परोसे जाने वाले एक अनिवार्य व्यंजन हैं।
गुजरात के पकवान होली में
गुजरात में भी होली के कई पकवान बनते हैं। जैसे यह उत्तर भारत की गुजिया के समान घूघरा बनता ही है। इसमें सूजी, मावा डाला जाता है और फिर नारियल और सूखे मेवों का मिश्रण भरा जाता है। वही यहां भी पूरन पोली बनती है और इसे स्थानीय भाषा में वेदमी भी कहा जाता है। यह तुवर दाल और गुड़ या चीनी के मिश्रण से भरी हुई रोटी है जिसे घी के साथ मिलाकर बनाया जाता है। साथ ही गेहूं के दादरे आटे से बनी मुठिया को तलकर और पीसकर गुड़ या चीनी की चाशनी में मिलाकर यह विशेष रूप से बनाई जाती है और साथ ही फाफड़ा के साथ जलेबी का मेल होली का सुबह का आनंद लेना एक अनिवार्य हिस्सा है।