साल 2025 बीत चुका है, लेकिन साहित्य की दुनिया में कभी-भी जा चुका साल खुद को खत्म नहीं कर पाता है। इसकी वजह साहित्य है। जी हां, साल 2025 में महिला आधारित कई सारी किताबें और उपन्यास प्रकाशित हुए हैं। हमारा मानना है कि आपको साल 2026 में नई किताबों के साथ एक बार हमारी बताई हुई इन सभी किताबों पर भी नजर घुमाना चाहिए। खासतौर पर यह सभी किताबें महिला दृष्टिकोण, महिला पात्र या फिर किसी महिला लेखक के अनुभवों पर आधारित है।
चिमामांडा न्गोजी अडिची का उपन्यास ‘ड्रीम काउंट’

ड्रीम काउंट उपन्यास नारीत्व, प्रवासी अनुभव, मां और बच्चे के रिश्ते के साथ सच्चे प्यार की तलाश जैसे विषयों को छूता है। इस उपन्यास का कुछ हिस्सा कोविड-19 महामारी के दौरान सेट किया गया है। साथ ही इसे एक मनोरंजक शैली में भी लिखा गया है,जो इस उपन्यास को खास बना देता है। चार मुख्य महिला पात्रों से इस उपन्यास की कहानी एक दूसरे से जुड़ी हुई है, जो कि पाठकों को पात्रों की आंतरिक दुनिया में गहराई तक लेकर जाती है। इस किताब को पढ़ने के एक नहीं बल्कि कई सारे कारण है। यह उपन्यास दिखाती है कि महिलाओं के सामने व्यक्तिगत चुनौतियां अपार हैं। इस वजह से उनकी ख्वाहिश और फैसले प्रभावित होते हैं। इस उपन्यास में आधुनिक महिला पात्रों को मजबूत और कहानी को भावपूर्ण कथा के तौर पर बखूबी प्रस्तुत किय गया है। यह उपन्यास विश्व की बेस्ट सेलर में भी शामिल है। संक्षेप में बताया जाए, तो यह उपन्यास चार महिलाओं के जरिए प्रेम और पहचान की खोज का एक अद्भुत चित्र पेश करता है।
एंजेला फ्लोरनोय का लिखा हुआ उपन्यास ‘द वाइल्डर्नेस’

पांच महिलाओं के 20 साल की दोस्ती और आधुनिक अमेरिकी जीवन की जटिलताओं, परिवार, करियर और निजी चुनौतियों को दिखाने वाला एक बहुत ही जरूरी उपन्यास है। साल 2025 में यह उपन्यास प्रकाशित हुआ है। यह सबसे लोकप्रिय महिला केंद्रित फिक्शन में शामिल है। इस उपन्यास को पढ़ने का सबसे मुख्य कारण यह है कि • गहरा मानवीय अनुभव और महिलाओं के बीच दोस्ती का अनूठा चित्रण। पात्रों की आवाज़ और उनके दृष्टिकोण को बड़े ही संवेदनशीलता से प्रस्तुत किया गया है। लेखक की लेखन शैली को पात्रों के बीच गहरे संबंधों को खूबसूरती से दिखाती है। एक तरह से यह उपन्यास दोस्ती की जटिलताओं, परिवार के घावों, अपनों की पहचान, आधुनिक अमेरिकी जीवन को गहराई से छूता है। एक तरह से यह उपन्यास महिलाओं के जीवन का गहरा चित्रण प्रस्तुत करती है।
एरिया अलवर का उपन्यास ‘गुड गर्ल’

अफगान मूल की 19 साल की छात्रा की कहानी है, गुड गर्ल। अपनी मर्जी से जटिल जीवन जीने की कहानी को एरिया ने प्रस्तुत किया है। नीला 19 साल की उम्र में अपने परिवार और समाज से दूर भागकर खुद की आवाज और पहचान की तलाश में है। इस उपन्यास को पढ़ने का मुख्य कारण यह है रि • निली नामक 19-साल की कलाकार की कहानी, जो अपने परिवार और खुद से पहचान बनाने की कोशिश करती है। इसरे साथ ही वह जन्म-भूमि, संस्कृति, कला और स्वतंत्रता जैसे विषयों को अपने अनुभव के ज़रिये समझाती है। इसलिए आपको एक दफा इस किताब को अवश्य पढ़नी चाहिए।
अंरुधति रॉय की किताब ‘मदर मैरी कम्स टू मी’
इस किताब में अंरुधति रॉय ने अपने निजी जीवन की यादों, अनुभूतियों और अनुभवी क्षणों को सीधे शब्दों में लिखा गया है। इसमें वह बताती हैं कि कैसे वे एक व्यक्ति और एक लोकप्रिय लेखिका बनी हैं। उनके माता-पिता, खासकर उनकी मां मैरी राॅय के साथ उनके रिश्ते ने उन पर गहरा प्रभाव डाला है। यह सिर्फ आदर या प्रेम की कहानी नहीं है, बल्कि दोस्तों, दुश्मनों, सुखद और कठोर अनुभवों का मिश्रण भी है, जिसमें प्यार, विरोध, दूरी और अंत में समझ का सफर शामिल है। इस उपन्यास में केरल से दिल्ली तक की यात्रा भी दिखाई गई है। अपने बचपन के अनुभवों से लेकर लिखने की राह पर बढ़ने तक के सफर को विस्तार से साझा करती हैं। केरल में जन्म,शिक्षा, जीवन की विपरीत स्थिति में और निर्माण क्रम के अनुभवों का बारीक चित्रण किया गया है। इस उपन्यास में लेखिका ने न केवल अपनी मां को याद करती हैं, बल्कि यह भी बताते हैं कि कैसे उन्हीं अनुभवों ने उन्हें एक आजाद, साहसी और खास विचार वाली लेखक बनाया है। उनकी लेखन शैली में सुंदरता, राजनीतिक स्पष्टता और मानवीय सहानुभूति का मिश्रण है, जो कि उनके पहले प्रकाशित उपन्यासों में भी दिखाई देता है।
बानू मुश्ताक की लिखी हुई किताब ‘हार्ट लैंप’

यह पुस्तक 2025 में प्रकाशित हुई और इसी साल अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार जीतकर साहित्य की दुनिया में भारत के लिए एक ऐतिहासिक पल साबित हुई है। खासकर क्योंकि यह कन्नड़ भाषा में लिखित पहली पुस्तक है जिसे इस प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह कहानी खासतौर पर महिलाओं और कन्याओं के नजरिए से है। इस कहानी में परिवार के रिश्ते, सामाजिक अपेक्षाओं, पितृसत्ता और परंपरागत सामाजिक संरचनाओं से लड़ाई को दिखाया गया है। कुछ पात्र ऐसे भी हैं, जो अपनी पहचान, सम्मान और आजादी के लिए संघर्ष करते हैं। लेखिका की कहानियां धर्म, जाति, समुदाय और सांस्कृतिक अपेक्षाओं के बीच जीवन की कठिनाइयों को उजागर करती हैं। यह कहानी उन सभी महिलाओं और आवाजों को सामने लाती हैं, जिनकी कहानियां अक्सर अनसुनी रह जाती हैं। इस कहानी में दर्द और पीड़ा की आवाजें साफ तौर पर दिखाई देती हैं। लेखिका ने अपने लेख के जरिए छोटी-छोटी आवाजें और बड़े-ब़ड़े बदलाव की तरफ इशारा करती हैं। आपको यह कहानी इसलिए भी पढ़नी चाहिए,क्योंकि कथा-संग्रह न केवल इंसानी रिश्तों को दर्शाता है, बल्कि भारतीय समाज में धार्मिक, सांस्कृतिक और वर्ग-दबाव को भी सामने लाता है।
सीमा कपूर की लिखी हुई किताब ‘यूं गुजरी है अब तलक’,
यह किताब आत्मकथा है। इस किताब में सीमा कपूर के निजी अनुभवों, उनके संघर्षों , परिवार, थिएटर और फिल्म जगत से जुड़े जीवन के सच और उनके रिश्तों की कहानी है। इस आत्मकथा में उन्होंने अपने जिंदगी के उतार-चढ़ाव, दर्द,आशाएं और प्यार की कठिनाइयों को बेहद ईमानदारी और संवेदनशीलता से लिखा है। सीमा कपूर का परिवार पारसी थिएटर एवं कला-संस्कृति से जुड़ा था। उनके पिता मदनलाल कपूर ने पारसी रंगमंच के लिये महत्वपूर्ण योगदान दिया, और माँ कमल कपूर ‘शबनम’ शायर थीं। भाई रंजीत कपूर, अन्नू कपूर और निखिल कपूर भी कला-साहित्य और अभिनय से जुड़े हैं। यह पृष्ठभूमि उनके जीवन की सांस्कृतिक जड़ों और संघर्षों को दर्शाती है।इसमें विशेष रूप से उनके रिश्ते ओम पुरी के साथ विवाह, अलगाव, तलाक और बाद के अनुभव को बहुत व्यक्तिगत रूप से साझा किया गया है। यह आत्मकथा उन पाठकों के लिए उपयोगी है, जो कि भावनात्मक रूप से जोड़ने वाली किताब है।