जनवरी के साथ साल की शुरुआत होती है और इसी के साथ कई प्रख्यात लेखकों के जन्म का दिन भी आता है, जो कि इस माह को विशेष बना देता है। मनोवैज्ञानिक यर्थाथवाद के लिए लोकप्रिय उपन्यासकार जैनेन्द्र कुमार का जन्मदिन 2 जनवरी 1905 को हुआ। इसके बाद शमशेर बहादुर सिंह का जन्म 13 जनवरी 1911 को हुआ, जो कि एक प्रयोगवादी कवि रहे हैं। 26 जनवरी 1907 में महादेवी वर्मा का जन्म हुआ। कवि नाटककार और कथाकार जयशंकर प्रसाद का जन्म 30 जनवरी 1889 को हुआ। आइए विस्तार से जानते हैं इन सभी के बारे में विस्तार से।
उपन्यासकार जैनेन्द्र कुमार के बारे में विस्तार से

जैनेंद्र कुमार हिंदी साहित्य के प्रमुख उपन्यासकार, कथाकार और चिंतक रहे हैं। जैनेंद्र कुमार के साहित्य की खास विशेषता रही है। उन्होंने अपने साहित्य में व्यक्ति के मनोजगत का गहन विश्लेषण किया है। उन्होंने अपनी रचनाओं में कथानक से अधिक चरित्र और मनोविज्ञान पर अधिक ध्यान दिया है। उनके लेखन की भाषा अधिक सरल ,भावपूर्ण और चिंतनशील रही है। उनके उपन्यासों में सामाजिक घटनाओं से अधिक मानव मन की उलझनें प्रमुख रही हैं। उनका प्रमुख उपन्यास परख रहा है, जो कि साल 1929 में प्रकाशित हुआ। इसके बाद सुनीता, त्यागपत्र, कल्याणी , सुखदा का नाम शामिल है। परख से उन्हें खासतौर पर ख्याति मिली। इसके अलावा कहानी संग्रह वातायन, पत्नी और नीलम देश की राजकुमारी को भी काफी पसंद किया गया। उनकी विचारधारा महात्मा गांधी के विचारों से प्रभावित रही है। सत्य की खोज उनके साहित्य का केंद्रीय विषय रही है। साल 1971 में उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। उपन्यास परख के लिए उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार भी मिला।
उपन्यासकार शमशेर बहादुर सिंह के बारे में विस्तार से

शमशेर बहादुर सिंह एक उपन्यासकार नहीं बल्कि हिंदी के लोकप्रिय आधुनिक कवि थे। शमशेर बहादुर सिंह को हिंदी कविता का कवि कहा जाता है। उनकी कविताओं की प्रमुख विशेषता यह रही है कि उनके लेखन में प्रेम, सौंदर्य, संवेदना और आत्मानुभूति दिखाई देती है। उनकी कविता में उर्दू की नजाकत और हिंदी की गंभीरता का सुंदर दृश्य दिखाई देता है। उनकी कविताएं गहन और कलात्मक रही हैं। हालांकि दूसरे कवियों के मुकाबले उनकी कविताएं संक्षिप्त लेकिन गहन होती हैं। उनकी भावनाएं सीधे न कहकर हमेशा संकेतों में व्यक्त की जाती हैं। सौंदर्य और प्रेम उनकी कविता का केंद्रीय तत्व है। खासतौर पर उन्हें परंपरा का महत्वपूर्ण कवि माना जाता है। उन्होंने हिंदी कविता को अधिक कलात्मक और बौद्धिक ऊंचाई दी है। शमशेर बहादुर सिंह को साहित्य अकादमी पुरस्कार और पद्मश्री से सम्मानित किया गया है।
महादेवी वर्मा के साहित्य के बारे में विस्तार से

हिंदी साहित्य की परंपरा की सबसे सशक्त और संवेदनशील कवयित्री महादेवी वर्मा रही हैं। महादेवी वर्मा की लेखनी भावनात्मक होने के साथ हमेशा से महिलाओं के पक्ष में रही हैं। उनके प्रमुख काव्य-संग्रहों की बात की जाए, तो उनका प्रारंभिक काव्य निहार करुण भाव प्रधान रहा है। रश्मि काव्य-संग्रह के जरिए उन्होंने आत्मसंघर्ष और चेतना को विस्तार दिया है। नीरजा में सौंदर्य, प्रेम और वेदना को संतुलित तरीके से दिखाया है। उनकी लिखी हुई काव्य की विशेषताएं कई सारी रही हैं। विरह और वेदना के साथ नारी-हृदय की कोमल अनुभूतियां भी होती रही हैं।ज्ञात हो कि महादेवी वर्मा का गद्य भी उतना प्रभावशाली है जितनी उनकी कविता रही है। उनके गद्य में भाषा की कोमलता, संवेदनशील दृष्टि और सामाजिक-मानवीय सरोकार स्पष्ट दिखाई देते हैं। महादेवी वर्मा के लेखन में नारी-वेदना, करुणा, मानवतावाद और आध्यात्मिकता का सुंदर समन्वय मिलता है। उन्होंने हिंदी साहित्य को भावनात्मक गहराई और सौंदर्य बोध की नई ऊंचाइयां प्रदान कीं।
कवि नाटककार और कथाकार जयशंकर के बारे में विस्तार से
कवि, नाटककार और कथाकार जयशंकर प्रसाद से है। वे हिंदी साहित्य के छायावाद युग के प्रमुख स्तंभ माने जाते हैं। उनका व्यक्तित्व और कृतित्व अत्यंत बहुआयामी था। उन्होंने कविता, नाटक, उपन्यास और कहानी सभी विधाओं में उत्कृष्ट रचनाएं दीं।जयशंकर प्रसाद ने भारतीय संस्कृति, इतिहास, दर्शन और मानवीय संवेदना को अपने साहित्य का आधार बनाया।जयशंकर प्रसाद हिंदी के श्रेष्ठ ऐतिहासिक नाटककार माने जाते हैं। उनके नाटकों में भारतीय गौरव, राष्ट्र प्रेम, त्याग और नारी गरिमा का सशक्त चित्रण है। कंकाल, तितली, इरावती उपन्यास में सामाजिक यथार्थ, नारी जीवन की पीड़ा और मनोवैज्ञानिक गहराई देखने को मिलती है। प्रसाद की कहानियां भावनात्मक, संवेदनशील और आदर्शवादी दृष्टिकोण युक्त है।