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जन्मदिन खास: कमला दास की लेखनी में महिलाओं की आवाज

टीम Her Circle |  May 30, 2026

साहित्य की पृष्ठभूमि पर कई महिला साहित्यकार हैं, जिन्होंने अपनी लेखनी से साहित्य की दुनिया में महिलाओं की मौजूदगी को मजबूत किया है। इसमें एक नाम कमला दास का शामिल है। कमला दास का जन्म 31 मई 1934 को केरल के त्रिशूर क्षेत्र में हुआ था। कमला दास का नाम साहसी महिला लेखकों में लिया जाता है। कमला दास का जन्म साहित्यिक परिवार में हुआ। उनकी मां खुद बालमणि अम्मा भी लोकप्रिय कवयित्री रही हैं। आइए जानते हैं विस्तार से।

कमला दास की ‘माय स्टोरी’ की समीक्षा

कमला दास की माय स्टोरी एक तरह से भारतीय साहित्य में एक साहसिक और विवाद पूर्ण कृति मानी जाती है। यह केवल एक आत्मकथा नहीं, बल्कि एक स्त्री के भीतर चल रहे संघर्षों का दस्तावेज़ है। कमला दास ने अपने बचपन, विवाह, प्रेम, अकेलेपन और मानसिक पीड़ा को बिना किसी झिझक के व्यक्त किया है। उनकी भाषा सरल, भावुक और आत्म स्वीकृति पूर्ण है। एक तरह से देखा जाए, तो यह एक महिला की आजाद पहचान, उसकी भावनात्मक जरूरतों और समाज के दोगले मानदंडों पर तीखा सवाल उठाती है। इस आत्मकथा को लेकर खुद कमला दास ने एक दफा कहा था कि कुछ भागों में साहित्यिक प्रभाव के लिए कल्पना का प्रयोग किया गया है। फिर भी इसका सामाजिक महत्व कम नहीं होता है।

‘समर इन कलकत्ता’ की समीक्षा विस्तार से

कमला दास का यह पहला अंग्रेजी कविता संग्रह है। इसका प्रकाशन 1965 में हुआ। इस किताब में आपको 50 कविताओं का संकलन भी मिलेगा।  कमला दास ने उस समय स्त्री की इच्छाओं, दबी भावनाओं और शारीरिक आकांक्षाओं को साफ शब्दों में लिखा है। कमला दास ने अपने निजी अनुभवों, मानसिक पीड़ा, प्रेम, निराशा और अकेलेपन को बिना किसी आडंबर के प्रस्तुत किया है। कमला दास की भाषा सरल, बोलचाल की और अत्यंत भावुक है। वे कठिन शब्दों या अलंकारों के बजाय सीधी और प्रभावशाली अभिव्यक्ति का प्रयोग करती हैं।

द  डिसेंडेंट्स  (Descendants)   

कमला दास की सबसे प्रभावशाली किताब में यह शामिल है।  इसमें प्रेम की असफलता, विवाह की घुटन को बखूबी प्रस्तुत किया गया है।  कमला दास की  खूबी यह है कि उनकी लिखी हुई कविताएं केवल व्यक्तिगत अनुभव नहीं लगतीं, बल्कि वे आधुनिक स्त्री की सामूहिक पीड़ा का प्रतिनिधित्व करती हैं। कमला दास की कविताओं में प्रेम केवल रोमांटिक अनुभूति नहीं है। उसमें शारीरिकता, वासना और मानसिक खालीपन की गहराई को भी दिखाती है। कुल मिलाकर देखा जाए, तो उनकी लिखी हुई यह कविता एक गहन, संवेदनशील और साहसिक कविता-संग्रह है। 

‘द ओल्ड प्ले हाउस एंड अंडर रूम’ की समीक्षा विस्तार से

कमला दास की यह काफी लोकप्रिय कविता-संग्रह है।  इन कविताओं में स्त्री की मानसिक पीड़ा, प्रेम की असफलता, विवाह की घुटन और आत्म-पहचान की खोज को गहरी संवेदनशीलता के साथ चित्रित किया गया है।कमला दास की कविताओं में प्रेम केवल रोमांटिक अनुभव नहीं है। उसमें शारीरिकता, वासना, मानसिक खालीपन और निराशा का मिश्रण है। कुल मिलाकर देखा जाए, तो द ओल्ड प्ले हाउस एंड अंडर रूम भारतीय अंग्रेजी साहित्य में मील का पत्थर माना जाता है। इस संग्रह ने भारतीय महिला कवियों को आजाद होकर भावनाएं व्यक्त करने की प्रेरणा दी है। 

‘अल्फाबेट ऑफ लस्ट’ की समीक्षा विस्तार से

यह कमला दास का लोकप्रिय उपन्यास है, जो कि 1976 में प्रकाशित हुआ है।  कमला दास ने इसमें स्त्री-मन की दबी इच्छाओं और समाज की सोच पर तीखा प्रहार किया गया है। एक तरह से देखा जाए, तो यह उपन्यास खास तौर पर आधुनिक शिक्षित महिला के मानसिक और भावनात्मक संघर्षों को केंद्र में रखता है। इस उपन्यास की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसका नारीवादी स्वर है। कमला दास ने स्त्री की इच्छाओं, उसकी भावनात्मक भूख और उसकी स्वतंत्र पहचान को अत्यंत साहसिक ढंग से प्रस्तुत किया।

  


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