img
settings about us
  • follow us
  • follow us
write to us:
Hercircle.in@ril.com
terms of use | privacy policy � 2021 herCircle

  • होम
  • HERoes
  • bizruptors
  • कनेक्ट
  • एन्गेज
  • ग्रो

search

search
all
communities
people
articles
videos
experts
courses
masterclasses
DIY
Job
notifications
img
Priority notifications
view more notifications
ArticleImage
home / engage / साहित्य / किताब-घर

जन्मदिन विशेष- रवींद्रनाथ टैगोर की रचना में नारी वर्णन

टीम Her Circle |  May 07, 2026

जन्मदिन विशेष- रवींद्रनाथ टैगोर की रचना में नारी वर्णन

बांग्ला साहित्य और संस्कृति को रवींद्रनाथ टैगोर ने अपनी लिखावट से सदा के लिए अमर कर दिया है। साल 1913 में ‘नोबेल पुरस्कार’ से सम्मानित रवींद्रनाथ टैगोर का जन्म 7 मई 1861 को कोलकाता में हुआ। साहित्य के प्रति उनका प्रेम राष्ट्रगान तक पहुंचा। भारत का राष्ट्र गान ‘जन गण मन’ और बांग्लादेश का राष्ट्र गान ‘आमार सोनार बांगला’ उन्होंने लिखा। साथ ही नोबेल पुरस्कार पाने वाले पहले एशियाई भी वे रहे हैं। गुरुदेव के नाम से लोकप्रिय रवींद्रनाथ टैगोर ने अपनी लिखावट में नारी जीवन का वर्णन खूबसूरती से किया है। आइए जानते हैं विस्तार से।

महिलाओं के मन की स्थिति 

टैगोर की रचनाओं में महिलाओं के मन की स्थिति को बखूबी पेश किया गया है। टैगोर की रचनाओं में महिला शक्तिशाली होने के साथ संवेदनशील भी रही हैं। साथ ही पुरुष प्रधान समाज में अपनी पहचान बनाने की कोशिश करती हुई दिखाई दी हैं। उन्होंने स्त्री को केवल पारंपरिक सीमाओं में बांधकर  नहीं देखा, बल्कि उसे स्वतंत्र चेतना, आत्मसम्मान और संवेदनशीलता से परिपूर्ण मानव के रूप में प्रस्तुत किया। उनकी रचनाएँ आज भी नारी-सम्मान, स्वतंत्रता और समानता का संदेश देती हैं।  

टैगोर की रचना ‘स्त्रीर पत्र’

टैगोर की लिखी हुई  ‘स्त्रीर पत्र’  काफी साल पुरानी होने के बाद भी वर्तमान में प्रचलित और समकालीन है। यह कहानी मृणाल की है, जो कि अपने पति को पत्र लिखती है, जो कि पुरी की तीर्थयात्रा पर जाने के बाद लिखा गया है। एक तरह से यह रचना पितृसत्तात्मक व्यवस्था पर चोट मारने का कार्य करती है। मृणाल पति को खत में लिखती है कि उनका विवाह 12 साल की उम्र में हुआ। इस उम्र में विवाह का अर्थ उन्हें नहीं पता था। मृणाल ने बताया है कि कैसे दुल्हन की चयन प्रक्रिया से गुजरना उनके लिए तीखा अनुभव रहा है। इसमें टैगोर ने एक स्त्री के भीतर छिपी पीड़ा, उसकी संवेदनाओं और उसके आत्मबोध को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त किया है। एक तरह से यह कहानी महिलाओं को सोचने पर मजबूर करती है कि क्या समाज ने वास्तव में महिलाओं को उनका उचित सम्मान और आजादी दी है।

‘चोखेर बाली’ 

इस उपन्यास में टैगोर ने महिला के मन , प्रेम, अकेलेपन और सामाजिक बंधनों को प्रस्तुत किया है। कहानी का मुख्य पात्र एक विधवा है, जिसे समाज में खुलकर जीने की आजादी नहीं है। वह प्रेम, अपनापन और अपनी पहचान की तलाश में संघर्ष करती है।  टैगोर ने स्त्री के मन की भावनाओं, इच्छाओं और पीड़ा को बहुत संवेदनशीलता से प्रस्तुत किया है। देखा जाए, तो चोखेर बाली प्रेम कथा नहीं है, बल्कि नारी की आजादी की कहानी है।

‘नष्टनीड़’

यह टैगोर की लोकप्रिय लघु कथा है। इस कहानी में टैगोर ने दांपत्य जीवन, भावनात्मक अकेलेपन, स्त्री-मन की सूक्ष्म इच्छाओं तथा मानवीय संबंधों की जटिलताओं का अत्यंत मार्मिक चित्रण किया है। इस रचना में केवल पति और पत्नी के संबंधों को बयान नहीं किया गया है, बल्कि एक महिला की आंतरिक दुनिया का भी साफ चित्रण किया गया है। टैगोर ने इस कहानी में आधुनिक शिक्षित स्त्री की मानसिक स्थिति और उसके भावनात्मक संघर्ष को बड़ी गहराई से व्यक्त किया है।

‘घरे-बाइरे’ 

‘घरे-बाइरे’ का अर्थ है घर और बाहर। रवींद्रनाथ टैगोर का यह उपन्यास नारी चेतना पर आधारित एक प्रमुख रचना मानी गई है। कहानी का मुख्य पात्र बिमला एक गृहिणी है। उसका पति उदार और शिक्षित है, जो बिमला को बाहरी की दुनिया से परिचित कराता है। इसी बीच “संदीप” नामक उग्र राष्ट्रवादी नेता उनके जीवन में प्रवेश करता है।संदीप के प्रभाव में बिमला राष्ट्रवाद और आकर्षण के बीच उलझ जाती है। धीरे-धीरे उसे समझ आता है कि संदीप का राष्ट्रप्रेम स्वार्थ और दिखावे से भरा है, जबकि निखिल का प्रेम सच्चा और मानवीय है। यह उपन्यास मानवीय मूल्यों का गहरा अध्ययन करता है।

‘योगायोग’

इस उपन्यास में टैगोर ने विवाह, सत्ता, अहंकार और स्त्री के आत्मसम्मान के संघर्ष को गहराई से चित्रित किया है। कहानी की मुख्य पात्र “कुमुदिनी”  एक संस्कारी और संवेदनीशल महिला है। उसका विवाह एक धनी और अहंकारी व्यक्ति से होता है। विवाह के बाद उसे पति की उपेक्षा का सामना करना पड़ता है। इस कहानी के जरिए टैगोर ने दिखाया है कि  टैगोर ने उसके माध्यम से यह दिखाया कि स्त्री केवल परिवार की मर्यादा निभाने वाली नहीं, बल्कि अपनी भावनाओं और सम्मान वाली स्वतंत्र व्यक्तित्व भी है।  


शेयर करें
img
लिंक कॉपी किया!
edit
reply
होम
हेल्प
वीडियोज़
कनेक्ट
गोल्स
  • © herCircle

  • फॉलो अस
  • कनेक्ट
  • एन्गेज
  • ग्रो
  • गोल्स
  • हेल्प
  • हमें जानिए
  • सेटिंग्स
  • इस्तेमाल करने की शर्तें
  • प्राइवेसी पॉलिसी
  • कनेक्ट:
  • email हमें लिखें
    Hercircle.in@ril.com

  • वीमेंस कलेक्टिव

  • © 2020 her circle