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पद्म भूषण सम्मानित एस.एल भैरप्पा की लोकप्रिय 5 किताबें

टीम Her Circle |  April 09, 2026

एस.एल भैरप्पा कन्नड़ भाषा के एक लोकप्रिय उपन्यासकारों में गिने जाते हैं। उनका पूरा नाम संतेशिवरा लिंगन्नैया भैरप्पा है। कम उम्र में माता-पिता के निधन के बाद उनका जीवन कठिनाई से गुजरा। लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। अपनी पढ़ाई को जारी रखा। उन्होंने दर्शनशास्त्र में उच्च शिक्षा प्राप्त की। पीएचडी की डिग्री हासिल की। इसके साथ ही उन्होंने अपनी लेखनी का सफर जारी रखा। 2003 में पद्म भूषण से सम्मानित भैरप्पा ने 20 से अधिक उपन्यास लिखे हैं। उनकी लेखनी में ज्ञान का भंडार दिखाई पड़ता है। उन्होंने इतिहास और धर्म के साथ भारतीय समाज पर भी अपनी लेखनी को प्रस्तुत किया। पद्म भूषण के प्रतिष्ठित पुरस्कार से पहले उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार भी मिला है। आइए जानते हैं उनकी लिखी हुई लोकप्रिय 5 किताबों के बारे में।

‘पर्व’ कन्नड़ भाषा में लिखी हुई किताब की समीक्षा

पर्व के जरिए एस.एल भैरप्पा ने एक कालजयी कन्नड़ उपन्यास पेश किया है। इसका प्रकाशन 1975 में हुआ। इस किताब में महाभारत की कहानी को मानवीय नजरिए से पेश किया है। हालांकि कन्नड़ के बाद इसे हिंदी भाषा में भी प्रकाशित किया गया। इस किताब की सबसे बड़ी दिलचस्पी यह है कि पर्व में ंमहाभारत के पात्रों को वैज्ञानिक नजरिए से पेश किया है। द्रौपदी, कुंती, भीम और कृष्ण जैसे किरदारों को नए नजरिए से पेश किया है, जो कि काफी दिलचस्प और अनोखी लगती है। उन्होंने एक तरह से महाभारत के सभी किरदारों को नायक या खलनायक के नजरिए से नहीं बल्कि इच्छाओं और संघर्षों के बीच घिरा हुआ दिखाया है। यह भी सही है कि कुछ पाठकों को यह उपन्यास लंबा और जटिल लग सकता है। वैसे, उन पाठकों के लिए यह काफी दिलचस्प हो सकता है, जो इतिहास और धर्म में रुचि रखते हैं।

एस.एल भैरप्पा  की किताब ‘आवरण’ की समीक्षा

आवरण का मतलब होता है, ढकना। भैरप्पा ने अपनी कहानी आवरण में इतिहास के छिपे हुए पहलुओं को उजागर करने की कोशिश की है। आप यह भी समझ सकते हैं कि यह उपन्यास एक तरह से सत्य के पीछे छिपे हुए सत्य को केंद्रित करता है। इतिहास को किस तरह लिखा जाता है और उसमें क्या छुपाया जाता है, इसे खासतौर पर लिखा गया है। एक तरह से आवरण की कहानी शोध और खोज के साथ आगे बढ़ती हुई दिखाई देती है। साथ ही आपके लिए रहस्य और जिज्ञासा के साथ यह कहानी अपनी दुनिया में ली जाती है। पाठकों को गंभीरता से सोचने के लिए भी प्रेरित करती है। 

‘सारथा’ किताब की समीक्षा

यह एक तरह से ऐतिहासिक उपन्यास है। जो कि 8 वीं शताब्दी के भारत में ज्ञान, धर्म और संस्कृति की खोज को दिखाता है। कहानी एक व्यापारी की यात्रा पर आधारित है। विभिन्न स्थानों और समाजों के अनुभवों से कथा आगे बढ़ती है। प्राचीन भारत के व्यापारिक मार्ग, नगरों और जीवनशैली का सजीव चित्रण इसमें किया गया है। समाज की संरचना, परंपराएं और आर्थिक गतिविधियां विस्तार से दिखाई गई हैं। उल्लेखनीय है कि इस किताब में आदि शंकराचार्य, मंंडन मिश्र, उभय भारती और कुमारिल भट्ट जैसे ऐतिहासिक प्रभावशाली चेहरों को इसमें शामिल किया गया है। यह उपन्यास केवल एक कहानी नहीं है, बल्कि एक युग का दस्तावेज है, जो कि परंपरा और आधुनिकता के बीच मूल्यों के संघर्ष को भी रेखांकित करती है। कन्नड़ के अलावा इस किताब को हिंदी और अंग्रेजी में भी अनुवाद किया गया है। 

एस.एल भैरप्पा कन्नड़ भाषा की किताब दत्तू की समीक्षा



दत्तू किताब को साल 1975 में साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला। इस किताब की कहानी ब्राह्मण पुजारीकी बेटी सत्यभामा के इर्द-गिर्द घूमती है, जो जातिगत बंधनों को तोड़कर अपनी पसंद के व्यक्ति से विवाह करने के लिए कठोर संघर्ष करती है। इसके साथ ही भावनाओं, संघर्ष और इच्छाओं के माध्यम से समाज का विश्लेषण भी किया गया है। पात्र केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामाजिक प्रतीक भी हैं। “दत्तू” केवल एक कहानी नहीं, बल्कि भारतीय समाज में जाति और सामाजिक असमानता की पड़ताल है। यह उपन्यास पाठकों को सामाजिक संरचना, मानवीय संघर्ष और आत्म-खोज पर गंभीर सोच के लिए प्रेरित करता है।

एस.एल भैरप्पा कन्नड़ भाषा  में लिखी हुई ‘तंतू’ की समीक्षा

“तंतु” का अर्थ है सूत्र या धागा, और उपन्यास में जीवन के विभिन्न पहलुओं को आपस में जोड़ने वाला यह सूत्र मानव संबंधों, राजनीति और सामाजिक बदलावों का प्रतीक है। यह कहानी एक परिवार और उसके आस-पास के समाज की यात्रा के माध्यम से आधुनिक भारत के परिदृश्य को दर्शाती है। इसकी कहानी परिवार, राजनीति और सामाजिक मूल्यों के इर्द-गिर्द घूमती है। पात्रों के संघर्ष और संबंध जीवन के विभिन्न पहलुओं को उजागर करते हैं। आधुनिक समाज में नैतिकता, जिम्मेदारी और बदलाव पर ध्यान दिलाती है। उपन्यास समाज में बदलाव, राजनीतिक और पारिवारिक संरचना पर केंद्रित है। समाज के विभिन्न वर्गों, उनकी मानसिकता और समस्याओं का सजीव चित्रण भी करती है। “तंतु” केवल एक उपन्यास नहीं, बल्कि आधुनिक भारतीय समाज, परिवार और राजनीति की गहन पड़ताल है। यह पाठकों को सोचने, विश्लेषण करने और सामाजिक वास्तविकताओं को समझने के लिए प्रेरित करता है।



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