पूरे भारत में अलग-अलग तरीके के शूज मार्केट हैं यानी जूतों के बाजार हैं, जहां से आप शानदार खरीदारी कर सकती हैं, आइए जानें विस्तार से।
बदल रहा है दौर

भारत में फैशन का दौर बदला है और इसके साथ ही बढ़ती इनकम, शहरीकरण और फैशन ट्रेंड्स की वजह से भारत का शू मार्केट तेजी से बढ़ रहा है, जिससे यह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा प्रोड्यूसर और कंज्यूमर बन गया है। अनुमान है कि 2030-2034 तक यह $40 बिलियन से ज्यादा का हो जाएगा। इसकी वजह कैजुअल, एथलेटिक और लग्जरी फुटवियर की मजबूत डिमांड है और अभी इन दिनों नॉन-एथलेटिक जूते हावी हैं, लेकिन एथलेटिक फुटवियर सबसे तेजी से बढ़ रहे हैं, जबकि लेदर एक जरूरी मटीरियल बना हुआ है, हालांकि नॉन-लेदर भी जगह बना रहा है। तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे भारत के मुख्य प्रोडक्शन हब, डिमांड को पूरा करने के लिए लगातार सप्लाई सुनिश्चित करते हैं। MSME 95 प्रतिशत से ज्यादा प्रोडक्शन यूनिट बनाते हैं, और रोजगार में भी उनका बड़ा योगदान है। फुटवियर मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री में लगभग 1.10 मिलियन लोगों की वर्कफोर्स के साथ, भारत एक ग्लोबल लीडर के तौर पर अच्छी स्थिति में है। देश का फुटवियर एक्सपोर्ट, जिसमें कैजुअल जूते, सैंडल, बूट और मोकासिन शामिल हैं, ग्लोबल ट्रेड का एक बड़ा हिस्सा है, जिसके मुख्य बाजार यूएसए, जर्मनी और यूएई में हैं।
शू कैपिटल
आपको इस बात की जानकारी होनी ही चाहिए कि भारत में आगरा को भारत की शू कैपिटल के नाम से जाना जाता है, क्योंकि यह फुटवियर बनाने का सबसे बड़ा हब है, खासकर लेदर के जूतों के लिए। यह कानपुर, चेन्नई और दिल्ली जैसे बड़े सेंटर्स के साथ-साथ घरेलू प्रोडक्शन और एक्सपोर्ट में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है। इसकी जूते बनाने की परंपरा मुगल काल से चली आ रही है, जो विरासत को आधुनिक इंडस्ट्री के साथ मिलाती है। वहीं तमिलनाडु तेजी से एक मजबूत दावेदार के तौर पर उभर रहा है, और सरकारी मदद, आधुनिक पार्कों में निवेश, और एक्सपोर्ट पर आधारित, टिकाऊ मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस की वजह से नया फुटवियर कैपिटल बन रहा है, जिससे बड़े ब्रांड आकर्षित हो रहे हैं और रोजगार बढ़ रहा है। इस शहर को जूता नगरी भी कहते हैं, जहाँ मशीनों की बजाय हाथ से मजबूत और टिकाऊ जूते-चप्पल बनाए जाते हैं और बड़े शहरों में भेजे जाते हैं।
जूतियों के शहर

अगर हम जूतियों के शहर की बात करें, तो इस लिहाज से भी भारत बहुत धनी है, क्योंकि यहां कई सारे जूतियों के शहर हैं, जिनमें पंजाब की जूतियां बेहद लोकप्रिय हैं, फिर जोधपुर और जयपुर की जूतियां भी लोकप्रिय हैं। इन जूतियों की खासियत यह होती है कि ये जूतियां पूरी तरह से हाथ से बनी हैं और इनमें उच्च गुणवत्ता वाली सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। जूतियां अब पारंपरिक फैशन का एक अभिन्न अंग बन गई हैं, जो आपको उत्तर भारत की सांस्कृतिक परंपरा से जोड़ती हैं। ये जूतियां प्रीमियम गुणवत्ता वाले सिंथेटिक कपड़े से विशेष रूप से हस्तनिर्मित हैं, जो पारंपरिक एहसास के साथ आराम प्रदान करती हैं। पटियाला की जूतियां भी काफी लोकप्रिय हैं। वहीं अगर बात करें, उदयपुर की तो उदयपुर की जूतियां मुख्य रूप से पारंपरिक राजस्थानी मोजड़ी (मोजारी) होती हैं, जो अपने हस्तनिर्मित डिजाइन, रंगीन कढ़ाई और शाही लुक के लिए प्रसिद्ध हैं, जो बापू बाजार जैसे स्थानीय बाजारों और कई ऑनलाइन स्टोर्स पर मिलती हैं और ये लेदर से बनी होती हैं, जो अक्सर शादियों और त्योहारों के लिए लोकप्रिय हैं। उदयपुर का यह बाजार स्थानीय जूतियों और मोजड़ियों के लिए एक प्रसिद्ध स्थान है, जहां कई छोटे-बड़े विक्रेता मिलते हैं। अमृतसर की जूतियां भी काफी लोकप्रिय हैं।
बूट्स
अगर बूट्स की बात करें, तो भारत में 'बेस्ट' बूट्स के लिए कोई एक खास शहर नहीं, बल्कि आगरा, कानपुर दिल्ली और चेन्नई में आपको अच्छी क्वालिटी के बूट्स मिलेंगे, जैसे शहर मशहूर हैं, जो अलग-अलग तरह के बूट्स के लिए जाने जाते हैं। इन्हें कई स्टाइल में पहना जा सकता है, खासतौर से कैजुअल लुक्स के लिए इसे काफी पसंद किया जाता है। दिल्ली के सरोजनी नगर मार्केट में आप खूब शॉपिंग कर सकती हैं।
कानपुर के जूते

कानपुर को भी जूतों का शहर कहते हैं। यहां की खासियत यह है कि आपको यहां हर तरह के जूते, जैसे कैजुअल, सेफ्टी और फॉर्मल, मिल जाएंगे, जो फैक्ट्री रेट पर मिलते हैं। कानपुर के लेदर उत्पाद अमेरिका और यूरोप जैसे देशों में भी निर्यात किए जाते हैं, जिससे इसकी गुणवत्ता की पुष्टि होती है। यहां के जूते अच्छी क्वालिटी के लेदर और PU सोल के साथ आरामदायक और स्टाइलिश होते हैं, जो लंबे समय तक चलते हैं। कानपुर पूरी दुनिया में 'सैलरी' (घोड़े की काठी के सामान) और 'सेफ्टी शूज' के सबसे बड़े केंद्रों में से एक है। यहां बने सेफ्टी जूते अपनी मजबूती के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध हैं।
चप्पल
चप्पल वाले शहर के संदर्भ में बात की जाये, तो कोल्हापुर अपनी प्रसिद्ध कोल्हापुरी चप्पलों के लिए जाना जाता है, क्योंकि ये सभी शहर पारंपरिक और हाथ से बने जूतों-चप्पलों के लिए मशहूर हैं, जो देशभर में भेजे जाते हैं। यह शहर अपनी पारंपरिक, हाथ से बनी चमड़े की चप्पलों, कोल्हापुरी चप्पल के लिए विश्व-प्रसिद्ध है, जो अपनी मजबूती और विरासत के लिए जानी जाती हैं। साथ ही तमिलनाडु के वेल्लोर में मजबूत, हाथ से सिलाई की हुई चमड़े की चप्पलें बनती हैं, जो दक्षिण भारतीय घरों में लोकप्रिय हैं। वहीं गोबर से "डनग स्लीपर्स" जैसी अनोखी चप्पलें भी बनती हैं।