हम अगर किसी को दान करते हैं, तो हमें इस बात का खास ख्याल रखना चाहिए कि कभी इस बात का ढिंढोरा न पिटें और ऐसी कोई बात न करें, जिससे किसी का दिल दुखे। दरअसल, दान देने की परंपरा यानि लोगों के लिए मदद के हाथ बढ़ाने वाली परंपरा। आइए जानें विस्तार से।
समझें नीयत

दान की परंपरा को जीवित रखना केवल दिए जाने वाले धन या वस्तुओं से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। यह एक स्वस्थ समाज के ताने-बाने को थामे रखने वाला एक महत्वपूर्ण डोर है और चाहे यह एक सांस्कृतिक प्रथा हो, या एक व्यक्तिगत पारिवारिक मूल्य हो, इस परंपरा को बनाए रखना बेहद प्रभावशाली है। इस बात को हमेशा हमें समझना होगा कि नीयत सही होनी चाहिए, अगर हमारी नीयत सही होगी, तभी हम सामने वाले से अपने मन की बात कह पाएंगे और समझ पाएंगे।
सामाजिक सामंजस्य को मजबूत करना
अगर दान के बारे में बात करें, तो विभिन्न सामाजिक-आर्थिक समूहों के बीच एक सेतु का काम करता है। यह सामुदायिक जिम्मेदारी की भावना को बढ़ावा देता है और हमें याद दिलाता है कि हम सभी आपस में जुड़े हुए हैं। जब लोग दान करते हैं, तो वे दूसरों के संघर्षों को समझते हैं, जिससे सहानुभूति बढ़ती है और सामाजिक सदभाव बढ़ता है इसलिए इसे भी समझना जरूरी है।
मिलता है लोगों का प्यार ही प्यार
जब भी आप लोगों के प्रति प्यार से हाथ बढ़ाते हैं, आपको यह नजर आएगा कि किस तरह लोग आपको प्यार भी नजर से देखते हैं और किस तरह लोग प्यार से हाथ बढ़ाते हैं, इसलिए लोगों का प्यार आपको अपनाना चाहिए और आपकी छोटी-सी मदद आपको आगे बढ़ने का मौका देती है और आपको भी इस बात की तसल्ली मिलती है कि आपने किसी के लिए कुछ किया है, इसलिए यह बेहद जरूरी है कि लोगों का प्यार बरकरार रहे और इससे आपको भी तसल्ली ही मिलेगी और आपकी छोटी सी मदद किसी की जिंदगी में बड़ा बदलाव ला देगी, इसलिए इस बात का अच्छे से ख्याल रखें कि आपको क्या करना है और क्या नहीं करना है, क्योंकि कई बार दान को लेकर हम गलतफहमी में होते हैं कि हमने दान करके एहसान किया है, इस सोच को पूरी तरह से बदल देना जरूरी है, इसलिए इन बातों के बारे में कई बार सोचें और समझने की कोशिश करें कि लोगों का प्यार बहुत बड़ी चीज होती है, उससे बढ़ कर कुछ नहीं होता।
सीखेंगे अगले जेनेरेशन भी

यह भी सच है कि आप अपने परिवार में जब ऐसी चीजें करती हैं, तो बच्चे भी देख कर आपसे सीखते हैं और यह परंपराएं बढ़ती है, इसलिए बच्चों को बचपन से ही सिखाएं कि शेयरिंग ही केयरिंग है और इसे हमें जरूर करना चाहिए और इस तरह से वह भी अगले जेनेरेशन तक इसे बढ़ाएगा और दान की संस्कृति या परंपरा जारी रहेगी। दरअसल, अगर कोई परिवार या समुदाय दान को प्राथमिकता देता है, तो यह अगली पीढ़ी में विकास की मानसिकता पैदा करता है। दान की परंपरा को देखते हुए बड़े होने वाले बच्चे सीखते हैं, वे अपने विशेषाधिकारों को पहचानते हैं। वे सीखते हैं कि उनके पास किसी के जीवन को बदलने की शक्ति है। दान करना एक बोझ के बजाय एक सहज क्रिया बन जाता है।
मानसिक विकास
इस बात को भी समझना बेहद जरूरी है कि विज्ञान लगातार यह दर्शाता है कि परोपकारी खर्च (दूसरों को देना) मस्तिष्क के पुरस्कार केंद्रों को सक्रिय करता है। इस घटना को अक्सर सहायक का उत्साह कहा जाता है, जिसके परिणामस्वरूप तनाव और रक्तचाप में कमी आती है और खुशी और जीवन संतुष्टि की भावना बढ़ती है। साथ ही जीवन में उद्देश्य और अपनेपन की भावना मजबूत होती है। इसलिए मानसिक विकास के बारे में भी जरूर सोचना चाहिए और आगे बढ़ने के बारे में भी सोचना चाहिए।
आर्थिक स्थिरता और धन का संचलन
शुद्ध आर्थिक दृष्टिकोण से देखें तो दान की परंपरा धन के संचलन में सहायक होती है। बैंक खाते में निष्क्रिय पड़ा धन दान किए गए धन की तुलना में कम गति से चलता है। जब आप दान करते हैं, तो वह धन तुरंत सामाजिक कार्यकर्ताओं के वेतन, स्कूलों के लिए आवश्यक सामग्री या भूखों के लिए भोजन पर खर्च किया जाता है। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन मिलता है और गैर-लाभकारी क्षेत्र में रोजगार के अवसर पैदा होते हैं। आपको इस बात को भी समझना है कि दान देने की परंपरा से नेतृत्व क्षमता विकसित होती है। जब कोई व्यक्ति या कंपनी दान करने की आदत बना लेती है, तो वह दूसरों के लिए एक नैतिक मानक स्थापित करती है। यह प्रतिस्पर्धी उदारता व्यवस्था में बड़े बदलाव ला सकती है, क्योंकि अन्य लोग भी उसी स्तर का योगदान देने के लिए प्रेरित या सामाजिक रूप से दबावग्रस्त होते हैं। इसलिए इन बातों के बारे में भी गंभीरता से सोचें। यह भी सोचें कि छोटे और नियमित उपहार जैसे बिल की राशि को राउंड ऑफ करना, इस परंपरा को धन की परवाह किए बिना सभी के लिए सुलभ बनाते हैं।
कपड़े दान करते हुए रखें इन बातों का ध्यान

आपको इन बातों का ख्याल रखना बेहद जरूरी है कि अगर आप किसी को कपड़े दान कर रही हैं, तो वे साफ-सुथरे हों, कम इस्तेमाल किए गए हों और उनमें कोई फटा हुआ या दाग न हो। दान को जरूरतमंद व्यक्ति के लिए उपहार की तरह समझें। केवल काम करने वाले कपड़े (जिनमें ज़िप/बटन सही से काम कर रहे हों) और मौसम के अनुसार उपयुक्त कपड़े ही दान करें। अंडरगारमेंट्स, एक-एक मोजा या बहुत गंदे कपड़े दान करने से बचें। दान करने से पहले कपड़ों को हमेशा धो लें, और बेहतर होगा कि उन्हें तह करके रख लें। वहीं सर्दियों में सर्दियों के कपड़े और गर्मियों में गर्मियों के कपड़े दान करें ताकि उनका तुरंत उपयोग किया जा सके।
स्थानीय दान संस्थाओं के बारे में जानकारी जुटाएं और देखें कि क्या उन्हें नौकरी चाहने वालों के लिए पेशेवर पोशाक या कंबल जैसी विशिष्ट चीजों की आवश्यकता है, न कि केवल कपड़े दान करने की।
पैसे दान करते समय रखें इन बातों का ख्याल
इस बात का खास ख्याल रखें कि सुनिश्चित करें कि गैर-सरकारी संगठन या दान संस्था पंजीकृत है। भारत में, सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1860, भारतीय ट्रस्ट अधिनियम, 1885, या कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 8 के तहत पंजीकरण की जांच करें। यदि आप विदेशी नागरिक या दानदाता हैं, तो सुनिश्चित करें कि संगठन विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) के तहत पंजीकृत है। साथ ही वार्षिक रिपोर्ट, वित्तीय लेखापरीक्षाएं और उनकी वेबसाइट पर धन के उपयोग के संबंध में स्पष्ट जानकारी देखें।
कभी न शो ऑफ करें
आप देखते होंगे, ऐसे कई लोग होते हैं, जो हमेशा शो ऑफ करते हैं कि हमने इनको दान दिया, उनको दान दिया, ऐसे कामों में कभी नहीं फंसें। कभी भी इस बात का दिखावा नहीं करना चाहिए कि हमने ये दान में दिया है, वो दान में दिया है।