अमूमन यह बातें होती रहती हैं कि Gen z के साथ कदमताल करना मुश्किल है, दरअसल, हर जेनेरेशन को अपने अगले जेनरेशन के साथ तालमेल बिठाने में कुछ समय तक तो मुश्किलें होती ही हैं। लेकिन इसका यह कतई मतलब नहीं कि हम उनमें बुराइयां ही देखें, ऐसा करने की बजाय उनमें खूबियां देखना अच्छा होगा। आइए जानते हैं विस्तार से।
कौन हैं Gen z

जनरेशन जेड या जेन ज़ी को जूमर्स भी कहा जाता है इन के साथ मिलकर सामाजीकरण के लिए उनकी डिजिटल-फर्स्ट (डिजिटल-प्रथम) धारणा और खुले विचारों को बहुत पहचान मिली है। यह पीढ़ी तकनीक, स्थिरता और प्रामाणिकता महत्वपूर्ण है। दरअसल, यह 1997 और 2012 के बीच जन्मे जनसांख्यिकीय समूह को दर्शाता है, जो मिलेनियल्स के बाद आता है। भारत में इनकी आबादी लगभग 37.7 करोड़ से भी अधिक है, जो देश की कुल जनसंख्या का 30 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा है।
कमांड-कंट्रोल की सोच से बाहर आना होगा
Gen Z के साथ प्रभावी ढंग से घुलने-मिलने के लिए, Millennials को अपने पारंपरिक कमांड और कंट्रोल वाली सोच की संस्कृति से बिल्कुल बाहर निकल कर सोचना होगा, जी हां, इस तरीके को छोड़कर, प्रामाणिकता, पारदर्शिता और सहयोग पर आधारित तरीके को अपनाना होगा, तभी पिछली पीढ़ियों के विपरीत, जो औपचारिक ढांचों को महत्व देती हैं, Gen Z सच्चे जुड़ाव और साझा मूल्यों को प्राथमिकता देगी और आप आगे बढ़ने के बारे में सोचेंगे, इसलिए सोच में बदलाव लाना एक अहम जरूरत है।
भाषणबाजी नहीं शॉर्ट में समझाना

इस बात को भी समझना होगा कि Gen Z यह दिखाने की अक्सर कोशिश करते हैं कि उनके पास समय नहीं है, इसलिए वे कम शब्दों में पूरी बातें समझना चाहते हैं। वे टू द पॉइंट में यकीन करते हैं। उन्हें अक्सर लंबे ईमेल और औपचारिक मीटिंग्स धीमी या अनावश्यक लगती हैं। तुरंत, रियल-टाइम अपडेट्स के लिए Slack, Microsoft Teams, या WhatsApp जैसे प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल उन्हें बेहतर लगते हैं, तो हमारी कोशिश होनी चाहिए कि हम उनसे यह सीखें कि शॉर्ट कट में चीजें कैसे की जा सकती हैं और समय को किस तरह से बाकी की जरूरी चीजों में उपयोग किया जा सकता है। Millennials अक्सर लंबे पैराग्राफ भेजते हैं, जबकि Gen Z कई छोटे-छोटे मैसेज भेजना या वॉइस नोट्स का इस्तेमाल करना पसंद करते हैं। वहीं अगर उनकी विजुअल भाषा देखें, तो वे जटिल भावनाओं को व्यक्त करने के लिए मीम्स और इमोजी का इस्तेमाल करते हैं। वे वक्त को गैरजरूरी चीजों में बर्बाद करने में यकीन नहीं करते, तो यह एक अच्छी चीज हम उनसे सीख सकते हैं।
टीम साथ लेकर चलना
एक अच्छी संस्कृति, जो हमें इनसे सीखनी चाहिए कि ये टीम को लेकर चलने में यकीन करते हैं। ये कंट्रोल करने की बजाय टीम प्लेयर बनने में यकीन करते हैं, वहीं प्रोफेशनल माहौल में, ऊपर से नीचे तक चलने वाली लीडरशिप से दूर रहने में यकीन करते हैं। Gen Z ऐसे मैनेजरों को फॉलो करती है, जो सिर्फ अपने ओहदे पर निर्भर रहने के बजाय, दूसरों की भावनाओं को समझने वाले और सबके साथ मिलकर काम करने वाले होते हैं। ये तुरंत फीडबैक लेकर आगे बढ़ने में यकीन करते हैं और बेवजह की जीहुजूरी में भी विश्वास नहीं रखते हैं। वहीं रिवर्स मेंटरिंग की बात करें, तो आपको हमेशा उनसे सीखने के लिए तैयार रहने की जरूरत होनी चाहिए, खासकर नए डिजिटल टूल्स या सोशल मीडिया ट्रेंड्स के बारे में उन्हें काफी जानकारी रहती ही है।
Gen Z मानसिक संतुलन में रखते हैं यकीन

दरअसल, जनरेशन Z मानसिक स्वास्थ्य और वर्क लाइफ बैलेंस को बेहतर बना कर रखने में अच्छे होते हैं, वे अपने समय के साथ किसी भी तरह का कॉम्प्रमाइज नहीं करते हैं। वहीं वे अपने कार्यों के पीछे का कारण जानना चाहते हैं। यदि वे देखते हैं कि उनका काम किसी सामाजिक मिशन या नैतिक लक्ष्य में कैसे योगदान देता है, तो उनके काम में लगे रहने की संभावना अधिक होती है। इनके अलावा, उन्हें आपस में एक निजी जुड़ाव बनाने के लिए अपनी हॉबीज, पॉप कल्चर या घूमने-फिरने के अनुभवों पर बातचीत करना पसंद आता है और वे अनौपचारिक बातचीत को बढ़ावा देने के लिए डिजिटल फोरम या सोशल मीडिया ग्रुप का इस्तेमाल करना पसंद करते हैं।