इस बात का हम अनुमान नहीं लगा पाते हैं, लेकिन कई बार एक परेशानी जरूर आती है कि हम बेवजह की शॉपिंग स्ट्रेस में कर लेते हैं और हमें कुछ पता भी नहीं चलता है। आइए इसके बारे में जानें कि यह आपके फाइनेंशियल प्लानिंग के लिए क्यों खतरनाक है।
क्या होती है रिटेल थेरेपी

स्ट्रेस शॉपिंग के बारे में हम आपको बता दें कि इसे एक तरह से रिटेल थेरेपी के नाम से भी जाना जाता है और खास बात यह भी है कि इसे तनाव से निपटने का एक तरीका भी माना जाता है, लेकिन यह आपकी मानसिक स्थिति के लिए बिल्कुल बेहतर नहीं है और खास बात यह भी है कि यह आपकी आर्थिक सेहत को बुरी तरह नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए इस बात को समझना है कि यह जो एक तरीका है शॉपिंग करने का, इससे आपके आर्थिक फैसलों की जगह भावनाएं ले लेती हैं, जिससे लंबे समय की सुरक्षा की कीमत पर कुछ समय के लिए तो खुशी मिलती है, लेकिन बाद में नुकसान होता है। इसलिए आपको यही कोशिश करनी चाहिए कि आप इसके चक्कर में फंसने की कोशिश न करें।
महीने के बजट को करता है खराब
इसके बारे में आपको जानकारी जरूर होनी चाहिए कि यह पूर्ण रूप से आपकी फाइनेंशियल प्लानिंग को खराब करता है और महीने का बजट बिगाड़ता है और यही नहीं इमोशनल होकर खर्च करना बिना किसी योजना के होता है, जिससे तुरंत आपका कैश फ्लो बिगड़ जाता है और बजट की सीमाएं टूट जाती हैं।
कर्ज में फंस सकती हैं आप

आपको इस बात को भी समझना जरूरी है कि ज्यादा ब्याज वाला यह एक कर्ज वाली स्थिति बन जाती है और फिर आप इसमें फंसते चले जाते हैं और फिर कुछ लोग अक्सर क्रेडिट कार्ड से बेइंतहां शॉपिंग कर लेते हैं और यह सोचते हैं कि बाद में खरीदारी करनी है, ऐसे में भी वह जान नहीं पाते और जरूरत से ज्यादा खर्च कर देते हैं। गौरतलब है कि इससे आपकी महीने की बचत या इमरजेंसी फंड खत्म हो जाती है और फिर आपके पास जो जमा पूंजी होती है, वह भी पूरी तरह से खत्म हो जाती है। और आपके पास जो भी आपने पैसे बचाये हैं, वे पैसे गैर जरूरी चीजों में खर्च हो जाते हैं। इसलिए कभी भी स्ट्रेस में आकर शॉपिंग के बारे में न सोचें।
लंबे समय के लक्ष्यों में देरी होती है
एक बात का खास ख्याल रखना इसलिए भी जरूरी है कि अगर आपकी कंपाउंडिंग ग्रोथ रुक जाती है, जिससे घर खरीदने या जल्दी रिटायर होने जैसे बड़े लक्ष्यों को पूरा करने में आपको हमेशा दिक्कत ही आएगी और फिर इसे पूरा करने में सीधे तौर पर देरी हो सकती है। साथ ही साथ आपको गिल्ट-स्ट्रेस भी बात में होता रहेगा और उससे आपके स्ट्रेस का लेवल और अधिक बढ़ जाता है या बढ़ जायेगा, फिर इससे आपको और परेशानी हो सकती है। बता दें कि चीजें खरीदने से कुछ समय के लिए डोपामाइन का एहसास (खुशी) मिलता है, जिसके तुरंत बाद आर्थिक अपराधबोध होता है, जिससे तनाव बढ़ता है और और ज्यादा खरीदारी करने का मन करता है। इसलिए खुद को रोक कर रखना बेहद जरूरी है।
निबटने के कुछ खास तरीके

आपको अगर स्ट्रेस शॉपिंग से मुक्ति चाहिए और खुद को तनाव में खरीदारी करने से रोकने की कोशिश करनी है, तो इसके लिए आपको 48-घंटे का नियम जरूर फॉलो करना है, इसमें आपको करना यह है कि आपको किसी भी गैर-जरूरी चीज को खरीदने से पहले पूरे दो दिन इंतजार करना है, ताकि खरीदने की भावनात्मक इच्छा कम हो जाए और फिर आप इस बात को समझ पाएं कि अब इसकी जरूरत आपको नहीं है और फिर आपको करना यह है कि ऐसी चीजें आपको डाइवर्ट करने की कोशिश करें, उसे अनसब्सक्राइब करके डिलीट कर देने की कोशिश करें और फिर तुरंत खरीदारी की इच्छा जगाने वाली चीजों को हटाने के लिए अपने फोन से शॉपिंग ऐप्स हटा दें और इसके साथ ही साथ रिटेलर के मार्केटिंग ईमेल से अनसब्सक्राइब करें। आपको इस बात पर फोकस करना चाहिए कि आपको उसे खरीदने के लिए कितना अधिक खर्च करने की जरूरत पड़ी है, साथ ही शॉपिंग की जगह तनाव कम करने वाली बेहतर आदतें अपनाएं, और अपना समय व्यायाम करने या पढ़ने या किसी दोस्त को फोन करने में लगाएं। यही आपके लिए बेस्ट तरीका होगा। इसके अलावा, आपको अलग तरह का अकाउंट रखना होगा, जिसमें आपको जब भी पैसे आपको खर्च करने का मन करें, आप उसमें पैसे डालती जाएं। यह प्रैक्टिस करें, इससे काफी फायदे होते हैं और यकीनन आपको पैसे भी बचेंगे और भविष्य के लिए पैसे जमा हो पाएंगे। आपको एक काम और करना है कि आपको अपनी सैलरी को पहले ही दिन इन्वेस्टमेंट में ऑटोमैटिक रूप से ट्रांसफर होने के लिए सेट कर देना है, ताकि आप उसे खर्च न कर सकें। फिर अपने क्रेडिट को फ्रीज करके रखना है, ताकि आप चाह कर भी पैसे नहीं निकाल पाएं। इससे आप बहुत हद तक अपने पैसे बचा पाएंगी।