आपने कभी इस बात पर गौर किया है कि अगर आप जीवन में कुछ गोल यानी लक्ष्य तय कर लें, तो आपके लिए जीवन में प्लानिंग करना आसान हो जाता है और जीवन में सारे काम पूरे भी हो जाते हैं। मनी सेविंग को लेकर भी कुछ ऐसा ही होता है। तो आइए जानते हैं विस्तार से कि इसे कैसे किया जा सकता है।
क्या है गोल (लक्ष्य) आधारित सेविंग्स

लक्ष्य-आधारित बचत में कुछ खास और समय-सीमा वाले वित्तीय लक्ष्य तय करना अच्छा होता है, जैसे कि आपका इमरजेंसी फंड क्या है और फिर अगर आपको छुट्टी पर जाना हो तो, क्या करना चाहिए और उन्हें पाने के लिए नियमित रूप से पैसे जमा करने की प्रक्रिया को ऑटोमेट करना शामिल है। इससे बिना सोचे-समझे खर्च करने की आदत कम होती है और मोटिवेशन बढ़ता है। असरदार लक्ष्य ठोस और उन पर काम करने लायक होते हैं।
अपने लक्ष्यों को परिभाषित करें और उन्हें वर्गीकृत करें
गौर करें, तो आपको अल्पकालिक 0–2 वर्ष के लिए तत्काल जरूरतों पर ध्यान में रखते हुए उसके लिए सेविंग्स करनी चाहिए, साथ ही एक इमरजेंसी फंड, जिसमें 3–6 महीने के खर्चों का लक्ष्य रख कर आपको उसके बारे में सोचना चाहिए। वहीं छुट्टियां या घर की छोटी-मोटी मरम्मत के लिए भी आपको कुछ पैसे का लक्ष्य रखना ही चाहिए। वहीं अगर मध्यमकालिक वर्षों को देखें, तो 2–5 वर्ष के लिए जीवन की बड़ी घटनाएं , जैसे कि घर के लिए डाउन पेमेंट, नई कार या शादी की रखनी चाहिए और उसके अनुसार ही सेविंग्स करनी चाहिए। फिर अगर यह न हो तो दीर्घकालिक, जैसे कि 5+ वर्ष से अधिक के लिए रिटायरमेंट या बच्चे की उच्च शिक्षा के लिए बड़ी संपत्ति बनाने पर भी ध्यान रखना चाहिए।
सोच समझ कर खर्च

इस बात पर ध्यान देना बेहद जरूरी है कि आप जब इस तरह की सेविंग्स के बारे में सोचते हैं, तो आप बिना सोचे कोई भी पैसे खर्च नहीं करते हैं और फिर जब हर रुपये का कोई काम तय होता है, तो आप गैर-जरूरी चीजों पर खर्च करने के लिए बचत में से पैसे निकालने की संभावना कम रखते हैं, क्योंकि आप जानते हैं कि आप किसी खास भविष्य के लक्ष्य से पैसे ले सकेंगे या निकाल सकेंगे। साथ ही आपको साफतौर पर भावनात्मक स्थिरता भी मिलती है। साथ ही आप किसी रिटायरमेंट फंड को घबराकर बेचने की संभावना कम रखते हैं, जिसके बारे में आप जानते हैं कि आपको अगले 20 सालों तक उसकी जरूरत नहीं पड़ेगी।
कोई पछतावा नहीं खर्च को लेकर
अगर हम एक लक्ष्य के साथ खर्च करते हैं, तो बिना किसी पछतावे के खर्च करने की हिम्मत रखते हैं और यह जानना कि आपके जरूरी लक्ष्यों के लिए पैसे का इंतजाम हो चुका है, आपको अपने बचे हुए पैसों को अपने भविष्य की सुरक्षा को लेकर चिंतित हुए बिना खर्च करने की आजादी देता है। इसलिए भी इसको करने के बारे में जरूर सोचें। साथ ही आप अपनी निवेश रणनीति को अपने लक्ष्य की समय-सीमा के हिसाब से तय कर सकते हैं।
बड़े लक्ष्य को पाने के आसानी

आपको इस बात को समझना होगा कि जब आप प्लानिंग के साथ सेविंग करते हैं, तब बड़े लक्ष्यों (जैसे घर के डाउन पेमेंट) को छोटे-छोटे, मापने लायक पड़ावों में बांटने से आपकी प्रगति साफ दिखाई देती है और आपको कुछ हासिल करने का एहसास होता है। और तो और बड़े खर्चों के लिए पहले से ही योजना बनाकर और पैसे बचाकर, आप शादी, कार या घर की मरम्मत जैसी चीजों के लिए ज्यादा से ज्यादा ब्याज वाले लोन लेने से बच सकते हैं। वहीं लक्ष्य-आधारित योजना आपको अपेक्षित महंगाई के आधार पर भविष्य के खर्चों का हिसाब लगाने में मदद करती है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि जब सही समय आए, तो आपके पास अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिए पर्याप्त बचत हो।