अभी जिस तरह से अर्थव्यवस्था में अस्थिरता चल रही है, यह बेहद जरूरी है कि आप अपने दिमाग का इस्तेमाल ठीक से करें और पैसे किस तरह से बच सकते हैं, उनके बारे में सोचें। आइए जानते हैं विस्तार से।
मनोविज्ञान का खेल है सारा

बचत करने का मन बनाना, गणित से कहीं ज्यादा मनोविज्ञान और अपनी पहचान से जुड़ा है। दरअसल, कमाने के लिए खर्च करने वाली सोच से हटकर कमाने के लिए कुछ बनाने वाली सोच अपनाना, लंबे समय तक चलने वाली आर्थिक सुरक्षा की नींव रखता है। इसलिए इसे अपनाना बेहद जरूरी है। इसलिए बेहद जरूरी है कि कुछ बातों का ध्यान जरूर रखा जाये, जैसे कि खर्च आपकी आंखों के सामने हो, यह बेहद जरूरी है। डिजिटल पेमेंट और UPI से खर्च दिखता नहीं है, जिससे आप अनुमान ही नहीं लगा पाते हैं कि कितना खर्च हुआ है। वहीं रोजाना के बजट के लिए कैश का इस्तेमाल करने से एक तरह की रुकावट पैदा करती है, जिससे आपको एहसास होता है कि आपके हाथ से पैसा निकल रहा है। साथ ही मानसिक हिसाब-किताब रखना भी बेहद जरूरी है, जैसे कि अपने पैसे को मन में कुछ खास हिस्सों में बांट लें, जैसे इमरजेंसी फंड, छुट्टियां या भविष्य के लिए। ऐसे में पैसे को कोई खास मकसद देने से उसे किसी छोटी-मोटी चीज पर खर्च करना मुश्किल हो जाता है। एक बात और सोचें कि जब आप किसी दुकान में जाने से पहले या बाद में जाएं, तो इससे पहले क्लिक करने से पहले, कार्ट की जांच कर लें, फिर खुद से पूछें कि क्या हर चीज आपके असली प्लान का हिस्सा थी। इससे बिना सोचे-समझे खर्च करने की आदत टूट जाती है।
माइंडसेट बदलें
यह बेहद जरूरी है कि आप खुद से यह कहना बंद करें कि आप पैसे को संभालने के बारे में बहुत मैच्योर नहीं हैं। इसके बजाय, खुद को एक बचत करने वाले और निवेशक के तौर पर देखें। कोई भी फैसला लेते समय, खुद से पूछें कि एक आर्थिक रूप से सुरक्षित व्यक्ति क्या करता। आपको यह भी समझना है कि आपके शब्द कैसे हैं, जैसे कि मैं इसे अफोर्ड नहीं कर सकता की जगह, मैं इस पर पैसे खर्च नहीं करता कहना शुरू करें। गौर करें, तो आपके पहले वाक्य में कमी और पाबंदी दिखती है, जबकि दूसरा वाक्य नियंत्रण और अपनी मर्जी दिखाता है। एक बात पर और फोकस करें कि आपको अपनी पिछली गलतियों को माफ करने के बारे में खुद से ही सोचना है, मतलब अगर पिछली बार गलती कर दी है, तो दोबारा वहीं करेंगे, ऐसा नहीं सोचना है या करना है।
बचत को एक खेल की तरह देखें

आपको इस बारे में भी गंभीरता से सोचना है कि आपको बचत को किसी सजा या पाबंदी के तौर पर देखने के बजाय, इसे एक खेल या चुनौती की तरह देखें, जिसमें आप अपनी आर्थिक आजादी जीतने के लिए मुकाबला कर रहे हैं। आप खुद ही तय करें कि इस महीने में मैंने इतनी सेविंग की है और इस महीने में मुझे इतने और करने है, आप खुद देखेंगी कि कहां-कहां आप पैसे कट कर सकती हैं और कट करती जाएंगी, इसके अलावा, आपको इस पर भी ध्यान देना होगा कि किस तरह से बचत को किसी गेम की तरह देखना है और पैसे बचाना है।
गुल्लक जैसा खेल
एक समय में हमारी मांओं ने खूब सेविंग की है और इसके लिए वह गुल्लक लेती थीं, आप भी एक गुल्लक लें और हर दिन उसमें बढ़ा-बढ़ा के पैसे डालें और सेव करें, यह पूरे दिन खत्म होने के बाद की ऐक्टिविटी रखें और अपने घर वालों को भी शामिल करें, आप चाहें तो सबके अलग गुल्लक रख सकती हैं और लास्ट में देखें कि किसने कितनी सेविंग की, इस तरीके से भी आप खेल-खेल में पैसे बचा सकती हैं।
कुछ इन तरीकों को भी सीखें

सेविंग को समझ लें कि एक क्रिकेट मैच है, अब आपको एक क्रिकेट मैच की तरह देखें, जहां आपको अपनी विकेट बचानी है। तो इसे खेलना कैसे हैं, वह हम आपको बताते हैं कि हफ्ते में 2 दिन तय करें कि आज जीरो खर्च का दिन है। जरूरी चीजों के अलावा एक रुपया भी बाहर नहीं खर्च करना है, फिर महीने की आखिरी तारीख में देखें कि आपने कितने दिन अपनी विकेट बचाई। हर सफल दिन के लिए खुद को एक स्टार दें। गौरतलब है कि अपनी किसी बुरी या महंगी आदत को बचत का जरिया बनाएं। वहीं अगर आप बाहर की कॉफी पीते हैं, सिगरेट पीते हैं, या जंक फूड खाते हैं, तो जितना पैसा वहां खर्च किया, उसका 50 प्रतिशत टैक्स के रूप में अपनी बचत में डालें। आप गौर करेंगी कि या तो आपकी बुरी आदत छूट जाएगी या आपकी बचत तेजी से बढ़ेगी।